यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 04, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
बेटे को क्रिकेटर बनाने को घर में बनाया मैदान व लगवाई फ्लड लाइट
पिता को पसंद नहीं था कि बेटा क्रिकेटर बने। वह उसे भी पहलवान बनाना चाहता था। लेकिन, बेटे ने जिद की तो घर के खाली हिस्से में मैदान बनाया व फ्लड लाइट लगवाई। बॉलिंग मशीन भी ले आया।

पानीपत, [विजय गाहल्याण]। पहलवान पिता को क्रिकेट नहीं पसंद था और वह नहीं चाहता था कि बेटा क्रिकेटर बने। वह उसे अपनी तरह पहलवान बनाना चाहता था, लेकिन वीरेंद्र सहवाग बेटे की जिद थी कि वह क्रिकेटर ही बनेगा। अंत वह बेटे की जिद अागे हार गया और फिर तो उसने उसे मुक्कमल क्रिकेटर बनाने की ठान ली।फिर क्या था, उसने घर के खाली हिस्से में मैदान बना लिया, फ्लड लाइड लगवा ली और बॉलिंग मशीन भी खरीद ली। आज बेटा हरियाणा के उभरते खिलाडि़यों में है और उसकी चयन राज्य की अंडर 16 टीम में हुआ है।
हरियाणा की अंडर 16 टीम में चुना गया अजय नांदल
हम बात कर रहे हैं डाहर के किसान पवन पहलवान इकलौते बेटे अजय नांदल की। पवन ने बेटे को कुश्ती के दांव-पेंच भी सिखाए लेकिन वीरेंद्र सहवाग के फैन अजय को कुश्ती नहीं भायी। पिता से बोल दिया उसे तो सिर्फ क्रिकेट खेलना है।पहले तो काफी मना किसा लेकिन बेटे की हसरत देख वह उसे क्रिकेट का प्रशिक्षण देने में जुट गए। पिता की मेहनत की बदौलत और अपनी लगन की बदौलत अजय अाज हरियाणा की टीम में है।

अजय को बॉलिंग मशीन से अभ्यास करवाते पिता पवन पहलवान।
सबसे पहले दिक्कत आ गई कि खेलने के लिए मैदान नहीं था। इसके बाद घर के खाली हिस्से को ही मैदान में तब्दील कर दिया। चारों तरफ फ्लड लाइट लगवाई। गेदबाज नहीं मिलने पर पौने दो लाख रुपये की बॉलिंग मशीन खरीद ली, ताकि अजय बल्लेबाजी का लगातार अभ्यास कर सके। इसके लिए पवन पहलवान ने खुद मशीन को ऑपरेट करने की ट्रेनिंग भी ली।
इसी मेहनत का नतीजा है कि अजय का चयन हरियाणा की अंडर-16 क्रिकेट टीम में हुआ है। हरियाणा की टीम 21 दिसंबर तक चलने वाली नार्थ जोन क्रिकेट प्रतियोगिता मे भाग ले रही है। इससे पहले भी अजय गत वर्ष अंडर-14 ध्रुव ट्राफी मे खेलकर बेहतरीन प्रदर्शन कर चुका है। उनके कोच तेजी सिंह का कहना है कि अगर अभिभावक खेल को बढ़ावा दें तो अच्छे खिलाड़ी तैयार हो सकते हैं।
मोटापे को मात देकर बना ऑलराउंडर
16 साल का अजय आलराउंडर है। अजय ने बताया कि वह 11 साल की उम्र मे 50 किलो से ज्यादा वजन हो गया था। ठीक से दौड़ नहीं पाता था। पिता ने सुबह-शाम दौड़ कराई। इससे उसका वजन घटा और फिर बल्लेबाजी व ऑफ स्पिन गेंदबाजी का अभ्यास किया। आर्य गर्ल्स स्कूल मे कोच प्रवीण ने बल्लेबाजी की तकनीक मे सुधार कराया।
खेलने के लिए दूसरे जिलों में ले जाते हैं खिलाने
पवन पहलवान बताते हैं कि गांव मे कबड्डी व कुश्ती खेल लोकप्रिय है। वह भी अजय को अच्छा पहलवान बनाना चाहते थे। बेटे की जिद क्रिकेटर बनने की थी। उसकी इच्छा को नही दबाया। अजय बेहतरीन टीमो के साथ खेले, इसके लिए उसे हर रविवार को सोनीपत, गुड़गांव, करनाल, गन्नौर, गोहाना और क्रिकेट मैच खेलने के लिए खुद गाड़ी चलाकर जाता हूं।

