'अलगाववाद और नफरत से दूर रहे युवा', पानीपत के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल ने बयां किया विभाजन का दर्दनाक किस्सा
पानीपत के आईबी (पीजी) कॉलेज में दैनिक जागरण के 'भारत रक्षा पर्व' अभियान के तहत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर विशेष व्याख्यान आयोजित हुआ।

विभाजन के दौरान कुछ ऐसा था हाल
HighLights
आईबी कॉलेज पानीपत में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कार्यक्रम
लेफ्टिनेंट कर्नल सतीश ओबराय ने विभाजन को दर्दनाक कहानी बताया
युवाओं को देश की अखंडता और भाईचारे का संदेश दिया
जागरण संवाददाता, पानीपत। आइबी (पीजी) कालेज, पानीपत में दैनिक जागरण के 'भारत रक्षा पर्व' अभियान 'तगड़ा' कार्यक्रम एवं विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम कालेज की राष्ट्रीय सेवा योजना एवं राष्ट्रीय कैडेट कार्प्स द्वारा दैनिक जागरण के सहयोग से किया गया। इसमें मुख्य वक्ता रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल सतीश कुमार ओबराय रहे।
कार्यक्रम का उद्देश्य वर्ष 1947 में भारत विभाजन के दौरान विस्थापन, हिंसा और अपनों को खोने वाले लाखों लोगों की पीड़ा को स्मरण करना तथा युवा पीढ़ी को इतिहास की इस त्रासदी से अवगत कराना रहा।
मुख्य अतिथि को तुलसी का पौधा भेंट कर स्वागत किया गया। कालेज प्रिंसिपल डॉ. सतवीर सिंह ने कहा कि विभाजन की त्रासदी को याद करना केवल अतीत का स्मरण नहीं, बल्कि वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को मानवता, एकता और सामाजिक सौहार्द का महत्व समझाना भी है।
विभाजन नक्शे पर खींची लकीर नहीं, लाखों परिवारों के उजड़ने की कहानी
मुख्य वक्ता रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल सतीश कुमार ओबराय ने कहा कि, 'विभाजन केवल नक्शे पर खींची गई लकीर नहीं, लाखों परिवारों के उजड़ने, उनके सपने टूटने और अकल्पनीय संघर्ष की दर्दनाक कहानी है।'
उन्होंने विभाजन में मुस्लिम लीग की भूमिका पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। मुस्लिम लीग की अलगाववादी नीतियों और द्विराष्ट्र सिद्धांत ने इस भीषण त्रासदी की नींव रखी थी। 'आज की युवा पीढ़ी को इस विभीषिका से यह सबक लेना चाहिए कि धर्म, जाति या संप्रदाय के नाम पर नफरत का कोई स्थान हमारे समाज में नहीं होना चाहिए। देश की अखंडता, संप्रभुता और आपसी भाईचारे की रक्षा करना अब आप युवाओं का सर्वोच्च कर्तव्य है।'
मानवता और भाईचारे से बढ़कर कोई मूल्य नहीं
एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी खुशबू ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस हमें याद दिलाता है कि मानवता और भाईचारे से बढ़कर कोई मूल्य नहीं है। संयोजक लेफ्टिनेंट डॉ. नरवीर ने सभी विद्यार्थियों को अतीत की पीड़ा को याद कर वर्तमान में एकता और भविष्य में सौहार्दपूर्ण समाज के निर्माण का संदेश दिया। इस अवसर पर डा. नीतू और सहायक प्राध्यापक कुलदीप मौजूद रहे।
