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पानीपत के रीपक कंसल बने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष, कोविड मुआवजा समेत कई याचिकाओं से रहे चर्चित

Updated: Sun, 23 Aug 2026 02:22 AM (IST)

पानीपत में वकालत की शुरुआत करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता रीपक कंसल सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष चुने गए हैं।

पानीपत के रीपक कंसल बने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष। फोटो जागरण

पानीपत के रीपक कंसल बने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष। फोटो जागरण

HighLights

  1. रीपक कंसल सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष चुने गए।

  2. उन्होंने पानीपत में वकालत की शुरुआती बारीकियां सीखीं।

  3. जनहित याचिकाओं के माध्यम से बनाई अपनी अलग पहचान।

जागरण संवाददाता पानीपत। पानीपत बार में वकालत की शुरुआती बारीकियां सीखने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता रीपक कंसल अब सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष बन गए हैं। 2026-27 के चुनाव में 61 मतों के अंतर से जीत दर्ज कर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के विधिक गलियारों में अपनी मजबूत पकड़ का परिचय दिया है।

उनकी जीत के बाद पानीपत के विधिक गलियारों में खुशी का माहौल है। सुप्रीम कोर्ट में रविवार को लगने वाले समाधान शिविर में भी न्यायधीशों के साथ रीपक कंसल बैच के साथ बैठ कर लोगों की समस्याओं का निपटारा करवाते हैं। रीपक कंसल का पानीपत से जुड़ाव बना हुआ है, वह पानीपत आते रहते हैं। उनकी जीत को पानीपत बार के अधिवक्ता भी अपनी उपलब्धि के तौर पर देख रहे हैं।

पत्नी नगर पार्षद रहीं, बच्चे भी पढ़ाई में आगे

रीपक कंसल ने बताया कि उन्होंने एसडी कालेज से ग्रेजुएशन की। इसके बाद 2003 से 2004 तक पानीपत में एडवोकेट यशपाल अग्रवाल के पास प्रैक्टिस की। इसके बाद दिल्ली में अपने चचेरे भाई के पास चले गए।

वहां उनके चैंबर से वकालत की। उनकी पत्नी गीता रानी पानीपत के वार्ड नंबर 17 से नगर पार्षद रह चुकी हैं। उनकी बेटी अंशिका कंसल चार्टर्ड अकाउंटेंसी की पढ़ाई कर रही हैं, बेटा आदी कंसल बीटेक का छात्र है। उनके एससीबीए कोषाध्यक्ष चुने जाने पर पानीपत बार सहित दिल्ली के विधिक जगत से जुड़े लोगों ने उन्हें बधाई दी है।

जनहित की याचिकाओं से बनाई अलग पहचान

रीपक कंसल कई जनहित से जुड़े मामलों में कानूनी पैरवी के लिए भी जाने जाते हैं। कोविड-19 के दौरान कोरोना से जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को मुआवजे की मांग से जुड़ी याचिका में भी उनका नाम सामने आया था।

वहीं, दिव्यांगों के अधिकारों से जुड़े मामले में उन्होंने वाणी एवं भाषा संबंधी दिव्यांगता वाले लोगों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ देने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पीआइएल दायर की थी। इस मामले में शीर्ष अदालत ने केंद्र से जवाब मांगा था।