रेवाड़ी में 'जहरीली हवा' का कहर, लगातार दूसरे दिन 'गंभीर' श्रेणी में AQI; सांसों पर मंडराया संकट
रेवाड़ी की हवा लगातार जहरीली हो रही है, बुधवार को 534 एक्यूआइ के साथ यह विश्व का सबसे प्रदूषित शहर ...और पढ़ें

रेवाड़ी में गंभीर श्रेणी में एक्यूआई। जागरण
HighLights
रेवाड़ी में वायु गुणवत्ता सूचकांक 406, गंभीर श्रेणी में।
सड़कों पर धूल, कचरा जलाने से प्रदूषण बढ़ रहा है।
बच्चों और बुजुर्गों को सांस लेने में भारी दिक्कतें।
जागरण संवाददाता, रेवाड़ी। रेवाड़ी जिले की हवा जहरीली होती जा रही है, लेकिन प्रदूषण रोकने के सरकारी आदेश सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गए हैं। न तो सड़कों पर स्वीपिंग मशीनों से सफाई हो रही है और न ही पानी का छिड़काव किया जा रहा है।
नतीजा यह है कि सड़कों से दिनभर उड़ रही धूल प्रदूषण के स्तर को लगातार बढ़ा रही है। बुधवार की शाम रेवाड़ी 534 एक्यूआइ के साथ विश्व का सबसे प्रदूषित शहर बन गया था।
एक्यूआई इन के आंकड़ों के अनुसार बृहस्पतिवार की सुबह भी एक्यूआई 406 दर्ज किया गया, जो गंभीर श्रेणी में आता है। दीवाली से पहले ही हालात इतने खराब हो गए हैं कि लोगों को घरों में भी सांस लेने में दिक्कत हो रही है। बृहस्पतिवार को भी दिनभर स्माग की हल्की चादर छाई रही।
सड़कों से उड़ रही धूल बनी मुसीबत
शहर की ज्यादातर सड़कों पर धूल की मोटी परत जमी हुई है। वाहनों के गुजरते ही धूल का गुबार उठता है, जो सीधे लोगों के फेफड़ों में जा रहा है। नगर परिषद की ओर से न तो पानी का छिड़काव हो रहा है।
वहीं सड़कों के किनारे और डिवाइडर के सहारे पड़ी मिट्टी को संबंधित विभाग की तरफ से सफाई कराई जा रही है। शहर के गढ़ी बोलनी रोड, हुडा बाइपास, दिल्ली-जयपुर हाईवे पर हालात सबसे ज्यादा खराब हैं।
खुले में फेंका जा रहा कचरा
शहर के कई इलाकों में खुले में कचरा फेंका जा रहा है। इतना ही नहीं, कचरे को आग के हवाले भी किया जा रहा है। इससे निकलने वाला धुआं हवा को और जहरीला कर रहा है। शिकायतों के बाद भी कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। न तो कचरा जलाने वालों पर जुर्माना लग रहा है और न ही कोई सख्त कदम उठाया जा रहा है।
बच्चों और बुजुर्गों की बढ़ी परेशानी
प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। सुबह-शाम उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही है। आंखों में जलन, गले में खराश और खांसी की शिकायत बढ़ गई है। चिकित्सकों ने अस्थमा और दिल के मरीजों को घर से बाहर न निकलने और मास्क लगाने की सलाह दी है।
लोगों का कहना है कि प्रशासन ने दीपावली को लेकर पटाखों पर तो पाबंदी लगा दी, लेकिन प्रदूषण के असली कारणों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। अगर समय रहते सड़कों पर पानी का छिड़काव, स्वीपिंग और कचरा जलाने पर रोक नहीं लगी तो दीपावली के बाद हालात और भयावह हो जाएंगे।
नगर परिषद को सड़कों पर पानी के छिड़काव व स्वीपिंग मशीन से सफाई कराने को लेकर निर्देश दिए हुए हैं। वहीं कचरे को खुले में फेंकना व आग के हवाले करना गलत है। अगर लापरवाही करते हुए कोई व्यक्ति मिलता है तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा। - अजय यादव, एसडीओ हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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