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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 30, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    तेजाब से झुलसा चेहरा, दो महीने PGI में तड़पती रहीं, अब दूसरों के लिए प्रेरणा बनीं रोहतक की रितु

    Updated: Sun, 30 Mar 2025 12:05 PM (IST)

    रोहतक की रहने वाली रितु सैनी (Ritu Saini) एक तेजाब हमले की शिकार हैं। जिन्होंने अपनी हिम्मत और दृढ़ संकल्प से दूसरों के लिए प्रेरणा बनने का काम किया। ...और पढ़ें

    छपाक फिल्म में काम कर चुकी हैं रितु शर्मा
    छपाक फिल्म में काम कर चुकी हैं रितु शर्मा

    HighLights

    1. रितु सैनी के चेहरे पर 2012 में दो लड़कों ने फेंका था तेजाब
    2. दो माह तक PGI में उपचार के चलते कराहती रहीं थी रितु

    अरुण शर्मा, रोहतक। यह कहानी रोहतक की एक तेजाब पीड़िता बहादुर बेटी की कहानी है। वर्ष 2012 में खिलाड़ी बनने का सपना देखने वाली रितु सैनी चंद मिनट बाद आने वाली भयानक घटना की कल्पना तक नहीं की थी। रितु अपने चमनपुरा स्थित घर से प्रेम नगर चौक के निकट तक पहुंची ही थीं कि एक बाइक पर दो युवक पहुंचे और उन्होंने तुरंत तेजाब मुंह पर फेंका।

    रितु धरती पर गिर गईं और तड़पने लगीं। स्वजनों ने पीजीआई में पहुंचाया और वहां उपचार के दौरान दो माह तक तड़पती रहीं। जब पहली शीशे में पहली बार अपना चेहरा देखा तो सपना चकनाचूर होने का आभास होते ही फूट-फूटकर रोने लगीं और रितु मन में सोचा कि मर क्यों नहीं गई। मगर संकल्पों को पूरा करने वाली रितु हार मानने से इन्कार कर दिया।

    घटना को याद कर भावुक हो गईं रितु

    रितु सैनी ने उस दिन की घटना याद की तो भावुक हो गईं और अपने परिवार व स्वयं की संघर्ष की कहानी सुनाई। रितु कहती हैं कि 16-17 वर्ष की उम्र थी। मई 2012 की शाम करीब चार बजे खेलने के लिए बाहर पैदल जा रही थीं, उसी समय घटना घटी। परिवार के लिए यह घटना एक वज्रपात जैसी थी।

    आरोपितों ने पीड़ित परिवार पर दबाव बनाया कि केस वापस ले लो। आर्थिक तंगी के बीच रितु के पिता सीताराम सैनी(अब स्वर्गीय) ने हार नहीं मानी। बेटी रितु भी बहादुरी से डटीं रहीं। फिर तीन आरोपितों को उम्रकैद की सजा हुई, जबकि दो को 10-10 वर्ष की कोर्ट ने सजा सुनाई।

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    छांव का मिला सहारा और नए सिरे जीना सीखा

    रितु कहती हैं कि छपाक फिल्म तक पहुंचने का सफर इतना आसान नहीं था, कई-कई रात नींद नहीं आती थी। समाज के परिवार ने ताने सहे। पांच बहन-भाईयों में सबसे छोटी रितु कहती हैं कि कई बार बुरे ख्याल आए, जब जीने की ललक पैदा हुई तो मन में सकारात्मक विचार ही आए।

    पढ़ाई आगे नहीं कर सकीं, यह मलाल आज भी है। अपने संघर्ष की कहानी बताते हुए कहा कि छांव एनजीओ (नॉन गर्वनमेंट आर्गनाइजेशन) से जुड़ी। यहां तेजाब पीड़िताओं के लिए एक तरह से नई जिंदगी की शुरूआत होती है।

    इतना आसान नहीं था छपाक तक का सफर

    छांव एनजीओ ने दो नोएडा, एक आगरा, एक लखनऊ में कैफे संचालित किए। आगरा और नोएडा के कैफे में रितु ने काम किया और दूसरी तेजाब पीड़िताओं को भी जीने के रास्ते बताए। दूसरी तेजाब पीड़िताओं को उनके जीने के तरीके सिखाने लगीं। दीपिका की सलाह पर कई दूसरी पीड़िताएं भी नए सिरे से जिंदगी जीने लगीं।

    रितु की जीने के जज्बे के चलते अभिनेत्री दीपिका पादुकोण के साथ रितु ने 2018 में छपाक फिल्म में काम किया। बीते वर्ष मार्च में मुंबई निवासी साहिल गुप्ता से शादी हुई तो जिंदगी में नया पड़ाव मिला।

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