दिव्यांगता को हरा रोहतक की 4 बेटियां राष्ट्रपति भवन में मनाएंगी रक्षाबंधन, चुनौतियों को पीछे छोड़ बनाई पहचान
रोहतक की चार दिव्यांग छात्राएं अपनी शारीरिक और बौद्धिक चुनौतियों को पार कर पढ़ाई, कला और खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं।
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राष्ट्रपति भवन में रक्षाबंधन समारोह में शामिल होंगी रोहतक की चार दिव्यांग छात्राएं।
HighLights
रोहतक की चार दिव्यांग छात्राएं राष्ट्रपति भवन जाएंगी
उन्होंने पढ़ाई, कला और खेलों में अपनी प्रतिभा दिखाई
छात्राओं ने राष्ट्रपति के लिए स्वयं राखी बनाई है
जागरण संवाददाता, रोहतक। दिव्यांगता जीवन की राह में चुनौतियां जरूर बढ़ाती है, लेकिन हौसला मजबूत हो तो मंजिल तक पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता। रोहतक जिले की चार दिव्यांग छात्राएं भी अपनी शारीरिक और बौद्धिक चुनौतियों को पीछे छोड़ पढ़ाई के साथ कला और खेलों में अपनी प्रतिभा दिखा रही है।
इनमें पीएम श्री स्कूल सांपला की चंचल, राजकीय स्कूल इस्माइला की प्राची, राजकीय स्कूल हसनगढ़ की अंशिका और राजकीय स्कूल हसनगढ़ की मिशु शामिल है। इन छात्राओं के साथ एमए पीएम श्री स्कूल सांपला की विशेष शिक्षिका प्रोमिला राठी भी नई दिल्ली जाएंगी।
बता दें कि शिक्षा मंत्रालय के अनुसार राष्ट्रपति हर वर्ष रक्षा बंधन के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में लगभग 500 से 600 विद्यार्थियों से मुलाकात करते है। इसमें इस बार प्रदेश से रोहतक की चार दिव्यांग छात्राओं को अवसर मिला है।
खास बात यह है कि चारों छात्राओं ने खुद अपने हाथों से राष्ट्रपति के लिए राखी बनाई है। वहीं सभी छात्राएं और शिक्षक पारंपरिक परिधान में राष्ट्रपति भवन पहुंचेगे। डीपीसी सुमन हुड्डा ने कहा कि जिले से चार छात्राओं का चयन राष्ट्रपति भवन में होने वाले रक्षा बंधन समारोह के लिए किया गया है।
कला के जरिए प्राची ने बनाई पहचान
गांव इस्माइला की रहने वाली प्राची बचपन से ही 100 प्रतिशत शारीरिक दिव्यांगता से प्रभावित है। उसे चलने-फिरने में काफी परेशानी होती है और वह अकसर व्हीलचेयर के सहारे एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाती है। इसके बावजूद प्राची ने कभी हार नहीं मानी। वह पढ़ाई के साथ ऑनलाइन होने वाली विभिन्न गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर भाग लेती है।
प्राची को कला और आर्ट एंड क्राफ्ट का खास शौक है। उसकी बनाई कला को इंटरनेशनल स्तर के एबिलिटीज एक्सपो में प्रदर्शित किया जा चुका है। इसके अलावा भारत मंडपम में आयोजित द हाट ऑफ आर्ट कला प्रदर्शनी में भी उसकी बनाई कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया। प्राची के पिता संदीप लकवे के कारण बेड रेस्ट पर हैं, जबकि मां अन्नू गृहिणी हैं।
दौड़ में नेशनल स्तर पर हासिल कर चुकी पहला स्थान
गांव हसनगढ़ की रहने वाली अंशिका पढ़ाई के साथ खेलों में भी अपनी प्रतिभा दिखा रही है। अंशिका बचपन से 75 प्रतिशत बौद्धिक दिव्यांगता से प्रभावित है। इसके कारण उसे सीखने, समझने और नई चीजों को याद करने में अन्य बच्चों की तुलना में अधिक समय और सहायता की जरूरत होती है।
उसे डाउन सिंड्रोम भी है। अंशिका ने अपनी दिव्यांगता को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। वह स्पेशल गेम्स की नेशनल स्तर की दौड़ में पहला स्थान हासिल कर चुकी है। खेलों के साथ वह अपनी पढ़ाई भी जारी रखे हुए है। उसके पिता संदीप निजी नौकरी करते है, जबकि मां रीना गृहिणी है।
दायां हाथ-पैर काम नहीं करता, फिर भी पढ़ाई में आगे
गांव हसनगढ़ की मीशू पढ़ाई में काफी अच्छी है। उसे 45 प्रतिशत शारीरिक दिव्यांगता है। उसका दायां हाथ और पैर काम नहीं करता, जिसके कारण उसे चलने-फिरने और कई शारीरिक गतिविधियों में परेशानी होती है। इसके बावजूद वह नियमित रूप से स्कूल जाती है और अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान देती है। मीशू को आर्ट एंड क्राफ्ट करना भी पसंद है। पिता संदीप बिजनेस करते हैं।
एक हाथ काम नहीं करता, फिर भी पढ़ाई जारी
गांव कुलताना की चंचल 60 प्रतिशत बहु-दिव्यांगता से प्रभावित है। वह एक से अधिक तरह की दिव्यांगता से जुड़ी परेशानियों का सामना कर रही है। चंचल का दायां हाथ काम नहीं करता। इसके बावजूद उसने अपनी पढ़ाई को प्रभावित नहीं होने दिया। चंचल हाल में कक्षा 12वीं की छात्रा है और पढ़ाई में अच्छी है। पिता अशोक बार्बर का काम करते हैं, जबकि मां सुदेश गृहिणी हैं।
