रोहतक डी-पार्क अग्निकांड: 5 मिनट की दूरी और आखिरी कॉल... पैसे लेने आए थे शोरूम, अंगूठी-चेन से हुई सौरभ की पहचान
रोहतक के डी-पार्क मार्केट में लगी भीषण आग ने तीन परिवारों की खुशियां छीन लीं। सौरभ, अमन और कपिल की ...और पढ़ें
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रोहतक डी-पार्क अग्निकांड: आग में जलकर सबकुछ खाक। फोटो जागरण
HighLights
रोहतक डी-पार्क आग में तीन लोगों की मौत।
सौरभ, अमन और कपिल के परिवारों में गहरा दुख।
जहरीले धुएं से दम घुटने के बाद आग की चपेट में आए।
जागरण संवाददाता, रोहतक। मंगलवार की दोपहर रोहतक के डी-पार्क मार्केट के लिए एक ऐसा गहरा जख्म दे गई, जिसकी टीस शायद समय भी कभी कम न कर पाए। वह भीषण आग सिर्फ दुकानों और करोड़ों के सामान को स्वाहा नहीं कर गई, बल्कि तीन हंसते-खेलते परिवारों की खुशियां, उम्मीदें और उनके संसार को भी मलबे के ढेर में बदल गई।
हादसा कितना खौफनाक था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 22 घंटे बीत जाने के बाद भी बुधवार दोपहर तक उन जली हुई दीवारों से धुआं रिस रहा था। बुधवार सुबह से ही पीजीआइएमएस के शव गृह के बाहर भारी गमगीन माहौल था।
जैसे ही तीन डाक्टरों के पैनल द्वारा तीन से चार घंटे की लंबी प्रक्रिया के बाद पोस्टमार्टम संपन्न हुआ, वहां मौजूद परिजनों का सब्र टूट गया। अपनों को आखिरी बार देखने की उम्मीद में पथराई आंखें जब शवों के सामने आईं, तो पूरा माहौल अत्यंत शोककुल हो गया।
आग इतनी तीव्र थी कि अपनों को पहचानने के लिए उनके चेहरों का अक्स तक बाकी नहीं था; पहचान के लिए सिर्फ उनकी निजी चीजें ही बची थीं। डाक्टरों ने वैज्ञानिक साक्ष्य पुख्ता करने के लिए डीएनए, ब्लड और कपड़ों के नमूने सुरक्षित रखे हैं। शुरुआती जांच के मुताबिक, पहले जहरीले धुएं से तीनों का दम घुटा, वे बेहोश हुए और फिर आग ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया।
सौरभ: सिर्फ 5 मिनट की वो दूरी, जो उम्र भर का गम दे गई
इस हादसे में जान गंवाने वाला सबसे कम उम्र का युवक 19 वर्षीय सौरभ उर्फ रोहित था। रोहतक बूट हाउस के संचालक सोमनाथ खुराना का यह बेटा दिल्ली रोड स्थित अपने मोडिश शोरूम पर रहता था। मंगलवार को वह महज 5 मिनट के लिए डी-पार्क शोरूम से कुछ पैसे लेने आया था।
चश्मदीदों के मुताबिक, आग भड़कते ही सौरभ भागा नहीं, बल्कि उसने साहस दिखाते हुए फायर सिलिंडर उठाकर आग बुझाने की कोशिश की। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था; चंद लम्हों में आग ने ऐसा विकराल रूप लिया कि उसे बाहर निकलने का रास्ता ही नहीं मिला।
पोस्टमार्टम में डाक्टरों को उसके शरीर पर चोट के निशान मिले, जिससे अंदेशा है कि आग के दौरान कोई भारी वस्तु उस पर गिर गई थी। वह पेट के बल गिरा हुआ था, जिससे उसका पिछला हिस्सा पूरी तरह खाक हो चुका था। पोस्टमार्टम हाउस के बाहर जब पुलिस ने उसकी पहचान के तौर पर हाथ में पहना चांदी का कड़ा स्वजनों को सौंपा, तो माता-पिता का दुख देखा नहीं जा रहा था।
अमन: तीन दिन पहले ही गूंजी थी बेटी के जन्मदिन की किलकारी
बाबरा मोहल्ला निवासी 38 वर्षीय अमन यादव की दास्तान जिसने भी सुनी, उसकी आंखें भर आईं। वह पिछले डेढ़ साल से इस शोरूम में काम कर रहा था। इस हादसे से महज तीन दिन पहले ही अमन ने अपनी तीन साल की मासूम बेटी नव्या का जन्मदिन मनाया था। घर में अभी गुब्बारे और खुशियों की महक बाकी थी, कि परिवार का मुखिया हमेशा के लिए बिछड़ गया।
अमन अपने पीछे पत्नी, एक बेटा, एक बेटी और बूढ़े माता-पिता को छोड़ गया है। उसके चाचा विकास यादव ने बताया कि वह सुबह हंसते हुए काम पर निकला था। रात को जब शव गृह में उसकी जुराबों और पजामे से उसकी शिनाख्त हुई, तो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। अपनों के अवशेष देख चाचा इस कदर आहत हुए कि वहीं बेसुध हो गए, जिन्हें लोगों ने संभाला।
कपिल: बेटे की आखिरी काल पर सिर्फ सन्नाटा सुनाई दिया
करीब 50 वर्षीय कपिल कुमार पिछले 22 साल से इस शोरूम में अपनी निष्ठा से काम कर रहे थे। दो बेटियों की शादी के बाद, वे ही अपने परिवार का एकमात्र आर्थिक सहारा थे। उनके बेटे अंकित (बीए प्रथम वर्ष के छात्र) ने रोते हुए वह खौफनाक मंजर बयां किया। अंकित ने मंगलवार दोपहर 2 बजकर 43 मिनट पर पिता को फोन किया था।
फोन रिसीव तो हुआ, लेकिन दूसरी तरफ कोई आवाज नहीं थी... बस एक गहरा सन्नाटा था। कुछ सेकंड बाद काल कटी और फिर फोन हमेशा के लिए स्विच आफ हो गया। बाद में जब कपिल की पहचान उनके परने, अंगूठी, चेन और चांदी के कड़े से हुई, तो अंकित के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। पिता को खोने के बाद अब इस छोटे से परिवार के आगे आजीविका का अंधकार छा गया है।
राख के ढेर में तब्दील हुआ बाजार
बुधवार को भी दमकल विभाग के कर्मचारी जान जोखिम में डालकर जली हुई दुकानों के मलबे में घुसकर सुलगती आग को शांत करते रहे। आसपास की दुकानें खुलीं, लेकिन पूरे बाजार में रौनक गायब थी। जगह-जगह तैनात पुलिस बल बैरिकेडिंग कर लोगों को हटाता रहा, लेकिन जली हुई इमारतों को देखकर हर राहगीर की आंखें नम थीं।
डी-पार्क अग्निकांड में तीनों शवों का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है। इस दुखद हादसे के संबंध में फिलहाल किसी के खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है, पुलिस द्वारा इत्तफाकिया कार्रवाई अमल में लाई गई है।
- महेंद्र सिंह, प्रभारी, सिविल थाना पुलिस, रोहतक।
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