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मनरेगा में 600 को मजदूरी, काम पर सिर्फ 200 श्रमिक; 1.25 करोड़ की गड़बड़ी; HC ने रोहतक DC से मांगी रिपोर्ट

Published: Wed, 16 Sep 2026 01:44 PM (IST)

रोहतक के समचाना गांव में मनरेगा मजदूरी भुगतान में 1.25 करोड़ रुपये की कथित अनियमितता सामने आई है, जिसमें 600 ...और पढ़ें

रोहतक में मनरेगा स्केम (फाइल फोटो)

रोहतक में मनरेगा स्केम (फाइल फोटो)

HighLights

  1. समचाना गांव में मनरेगा मजदूरी में 1.25 करोड़ की गड़बड़ी

  2. 600 के बजाय 200 श्रमिकों को ही मिला काम, आरोप

  3. मेट प्रवीण कुमार के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज

जागरण संवाददाता, रोहतक। मनरेगा मजदूरी के नाम पर सरकारी राशि के भुगतान को लेकर समचाना गांव हुई जांच में बैंक खातों के लेनदेन पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है पंजाब एवं हरियाणा हाइकोर्ट की ओन से मामले में डीसी रोहतक से मामले की स्टेटस रिपोर्ट भी मांगी है।

इसके बाद सांपला एसडीएम की ओर स की गई जांच में मिली अनियमितता के आधार पर एफआइआर दज्ज् करवा दी गई है। अब मनरेगा क आधिकारिक नया नाम प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार एव आजीविका मिशन (पीएम-विकसित भारत) है।

जांच में ऐसे कई लाभार्थियों के खाते सामने आए, जिन्होंने बयान और शपथ पत्र देकर कहा कि उन्होंने मनरेगा में काम नहीं किया इसके बावजूद उनके खातों में मनरेगा की मजदूरी के नाम पर राशि जमा हुई।

जांच के दौरान इन खात की बैंक प्रविष‌टियों में एक औन अहम बात सामने आई। कई खातों में आनलाइन तरीके से राशि आने के बाद रकम एक ही मोबाइल औन यूपीआइ नंबर पर भेजी गई। जांच रिपोर्ट के अनुसार यह नंबर मनरेगा

मेट प्रवीन कुमार से जुड़ा हुआ पाया गया। मामले की शुरुआत 20 मार्च 2023 को ललित और 25 अन्य की शिकायत से हुई थी। शिकायत में मनरेगा में करीब 1.25 करोड़ रुपये की कथित गड़बड़ी का आरोप लगाया गया था। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि करीब 600 लोगों को काम करने वाला दिखाया गया, जवकि करीब 200 लोग ही नियमित रूप से काम करते थे।

तीन साल बाद दर्ज हुई एफआइआर

मामले में मनरेगा लोकपाल ने नवंबर 2023 में बीडीपीओ और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की थी। जांच के बाद डीआरडीए की ओर से पुलिस कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया। इसके बाद सांपला थाना पुलिस ने एफआइआर दर्ज की। मेट प्रवीन के खिलाफ धोखाधड़ी समेत कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

पोर्टल के रिकॉर्ड और बयानों में भी अंतर

जांच के दौरान लाभार्थियों के बयानों की तुलना मनरेगा की वेबसाइट पर उपलब्ध जाब कार्ड और कार्य रिकार्ड से की गई। रिपोर्ट के अनुसार कुछ मामलों में अधिकारियों की ओर से दिए गए जवाब पूरे आनलाइन रिकार्ड से मेल नहीं खाते। एक लाभार्थी ने भुगतान नहीं होने की बात कही, जबकि आनलाइन रिकॉर्ड में वर्ष 2019-20 में 40 दिन काम और 11,360 रुपये भुगतान दर्ज मिला।

जिले के गांव समचाना में मनरेगा की जांच के दौरान अनियमितता सामने आई थी। किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे में जीरो टोलरेस की नीति का पालन करते हुए आरोपितों के खिलाफ तत्काल एफआइआर करवा दी गई है। आगे भी जांच करवाई जाएगी। जो भी दोषी होगा उसे बख्शा नहीं जाएगा। -नरेंद्र कुमार, एडीसी कम सीईओ जिला परिषद, रोहतक।