गुरुग्राम एनकाउंटर: काम और कांवड़ की कहकर निकले थे घर से, मुठभेड़ में ढेर हुए रोहतक के तीन युवक; परिजनों ने उठाए सवाल
रोहतक के भालौठ गांव के तीन युवक गुरुग्राम में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए, जिससे उनके परिवार सदमे में हैं। ...और पढ़ें

HighLights
रोहतक के तीन युवक गुरुग्राम मुठभेड़ में मारे गए
परिवारों ने युवकों के गुरुग्राम पहुंचने पर सवाल उठाए
एक युवक पर आपराधिक मामले दर्ज थे, अन्य निर्दोष
जागरण संवाददाता, रोहतक। जिले के गांव भालौठ के तीन परिवार शुक्रवार सुबह तक समझ रहे थे कि उनके बेटे किसी काम से घर से बाहर गए हैं। 17 वर्षीय आर्यन जेवलिन थ्रो का खिलाड़ी था और बाइक ठीक कराने की बात कहकर निकला था। 18 वर्षीय अंकित दिहाड़ी मजदूरी करता था और स्वजन से हरिद्वार से कांवड़ लाने की बात कहकर गया था।
22 वर्षीय नितिन गांव में बाइक मैकेनिक का काम करता था। शुक्रवार सुबह पुलिस गांव पहुंची तो परिवारों को पहली बार गुरुग्राम में हुए एनकाउंटर की जानकारी मिली। शाम को तीनों के शव गांव पहुंचे तो पूरे गांव में यही चर्चा रही कि अलग-अलग पृष्ठभूमि वाले ये तीनों युवक एक साथ गुरुग्राम कैसे पहुंचे।
जेवलिन में भविष्य देख रहा था आर्यन
आर्यन 12वीं कक्षा का छात्र था और पिछले दो वर्षों से जेवलिन थ्रो का अभ्यास कर रहा था। स्वजन के अनुसार, वह 55 से 60 मीटर तक भाला फेंक रहा था। कुछ दिन पहले बाइक खराब होने पर उसकी मुलाकात नितिन से हुई थी।
परिवार का कहना है कि दोनों की पहचान पांच-छह दिन पुरानी थी। आर्यन के पास मोबाइल भी नहीं था। घर नहीं लौटने पर स्वजन लगातार नितिन के मोबाइल पर संपर्क करते रहे, लेकिन फोन बंद मिला।
अंकित के पिता अनिल ने बताया कि उनका बेटा ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं था और दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का हाथ बंटाता था। दो दिन पहले उसने हरिद्वार से कांवड़ लाने की बात कही थी। परिवार को यह जानकारी नहीं थी कि वह गुरुग्राम पहुंच गया है। वहीं नितिन के स्वजन का कहना है कि वह भी दो दिन से घर नहीं लौटा था और उसकी तलाश की जा रही थी।
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पुलिस रिकॉर्ड और परिवारों के दावे अलग-अलग
रोहतक पुलिस के अनुसार नितिन के खिलाफ हत्या के प्रयास और अवैध हथियार रखने के दो मामले दर्ज हैं। वहीं आर्यन और अंकित के विरुद्ध कोई आपराधिक मामला सामने नहीं आया। पुलिस का कहना है कि आर्यन करीब 10 से 15 दिन पहले ही नितिन के संपर्क में आया था। दूसरी ओर आर्यन के पिता प्रदीप फोगाट का कहना है कि यदि उनका बेटा किसी के बहकावे में आया था तो ऐसे गिरोह चलाने वालों तक पुलिस को पहुंचना चाहिए।