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'परिवार मजदूर, जमीन भी नहीं...', सरकारी मदद के लिए सिरसा में ग्रामीणों ने रोकी बलिदानी सुखचैन सिंह की अंतिम यात्रा

Published: Sun, 06 Sep 2026 05:30 AM (IST)Updated: Sun, 06 Sep 2026 04:16 PM (IST)

बलिदानी सुखचैन सिंह की अंतिम यात्रा को सिरसा के कुत्ताबढ़ गांव में ग्रामीणों ने 40 मिनट तक रोक दिया, परिवार के लिए सरकारी मदद की मांग की।

सरकारी मदद के लिए ग्रामीणों ने रोकी बलिदानी सुखचैन की अंतिम यात्रा। फोटो जागरण

सरकारी मदद के लिए ग्रामीणों ने रोकी बलिदानी सुखचैन की अंतिम यात्रा। फोटो जागरण

HighLights

  1. बलिदानी सुखचैन सिंह की अंतिम यात्रा ग्रामीणों ने रोकी।

  2. परिवार के लिए सरकारी सहायता और नौकरी की मांग की।

  3. एसपी के आश्वासन पर राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार हुआ।

जागरण संवाददाता, सिरसा। जिले के गांव कुत्ताबढ़ के बलिदानी सुखचैन सिंह की पार्थिव देह शुक्रवार रात को सिरसा एयरफोर्स स्टेशन पहुंची। सुबह श्रद्धांजलि के बाद अंतिम यात्रा गांव कुत्ताबढ़ के लिए रवाना हो गई। जैसे ही अंतिम यात्रा गांव की सीमा में पहुंची तो कुछ ग्रामीणों ने रोक लिया।

बाद में कर्नल के फोन करने पर एसपी ने फोन पर ही समझाया, तब कहीं ग्रामीण बलिदानी के अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए।

बता दें कि 27 सितंबर 2015 को सेना में भर्ती हुए 30 वर्षीय सुखचैन सिंह 59 इंजीनियरिंग रेजिमेंट में जम्मू-कश्मीर के राजौरी में तैनात थे। बलिदानी की वजह ड्यूटी के दौरान करंट लगना बताई जा रही है। हालांकि अधिकारिक तौर पर अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई। जम्मू कश्मीर में खराब मौसम के कारण उनका पार्थिव शरीर देर रात सिरसा लाया गया।

कोई प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचे घर

आज अंतिम यात्रा को रोककर सरपंच बेअंत सिंह और अन्य ग्रामीणों ने मांग रखी कि परिवार दिहाड़ीदार मजदूर है, कोई जमीन नहीं है। हमारा भाई बलिदानी हो गया। परिवार के लिए राज्य सरकार को आज ही घोषणा करनी चाहिए।

अंतिम यात्रा के साथ आए सेना के अधिकारियों ने कहा कि यह मांग का उचित समय नहीं है। हमें अपना काम करने दीजिए। दाह संस्कार का समय निकल रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि तीन दिन से कोई प्रशासनिक अधिकारी बलिदानी के घर नहीं आया।

कर्नल सुमरा ने कहा कि परिवार पार्थिव देह का इंतजार कर रहा है। वो हमारा भी भाई है, सारे देश का भाई है, इसलिए आप लोग रास्ता दें।

पंजाब के सीएम घर जाते हैं

ग्रामीणों ने कहा कि हमें सेना से कोई नाराजगी नहीं है। सरकार का कोई नुमाइंदा नहीं आया, जबकि पंजाब सरकार में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान हर बलिदानी के घर जाकर उनके दुख में शरीक होते हैं। तब सैन्य अधिकारियों ने कहा कि ऐसे कभी भी बलिदानी की अंतिम यात्रा कोई नहीं रोकता। इसलिए चलते चलते बात करते हैं।

बलिदानी पत्नी को जिला सैनिक बोर्ड से नौकरी मिलेगी

तब तहसीलदार शुभम शर्मा भी आए और उन्होंने भी समझाया। कर्नल सुमरा ने एसपी सिरसा दीपक सहारण से हैंड फ्री करके फोन किया। एसपी ने ग्रामीणों को समझाया कि यह तरीका सही नहीं है। बलिदानी का सम्मान होना चाहिए। मैं इसे ठीक नहीं मानता।

कर्नल सुमरा ने फोन को हैंड फ्री करते हुए कहा कि मुझे भी जब रास्ते में पता चला तो मुझे भी गलत महसूस हुआ। गांव के कुछ लोग शुरली छोड़ गए। ये तरीका गलत है। ये गांव की तौहीन है।

बलिदानी पत्नी को जिला सैनिक बोर्ड से नौकरी मिलेगी। यह उसका अधिकारी है। परिवार के अन्य सदस्यों को नौकरी देना राज्य सरकार का अधिकार है। इसके बाद गांव के मौजिज लोगों ने समझाया और फिर बलिदानी की अंतिम यात्रा घर पहुंची।

पार्थिव शरीर को देखकर मां, भाई, बहन और पत्नी बिलख बिलख कर रोने लगे। सभी बार बार बेसुध हो रहे थे। बलिदानी सुखचैन की पत्नी निर्मल कौर ने उनकी पार्थिव देह को सलामी देते हुए बोले सो निहाल सत श्री अकाल का नारा लगाया। बेटे आकाश ने उनकी चिता को अग्नि दी। राजकीय सम्मान के साथ बलिदानी का अंतिम संस्कार किया गया।