18 दिन बाद भी नहीं लौटी 'जूली', NGO ने नसबंदी के लिए उठाया था; अब गली-गली ढूंढ रही टीमें
सिरसा में भाजपा नेत्री की पालतू डागी 'जूली' नसबंदी के लिए ले जाने के 18 दिन बाद भी लापता है। ...और पढ़ें
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18 दिन से लापता है भाजपा नेत्री की पालतू डागी 'जूली'।
HighLights
भाजपा नेत्री की पालतू डागी जूली 18 दिन से लापता
नसबंदी के लिए NGO ने 13 अगस्त को उठाया था
नगर परिषद में शिकायत, FIR की चेतावनी दी
जागरण संवाददाता, सिरसा। हरियाणा के सिरसा से 13 अगस्त को वरिष्ठ भाजपा नेत्री एक डागी को नसबंदी के लिए घर के बाहर से उठाया गया। उनसे कहा गया कि दो दिन बाद वापस मिल जाएगी। दो दिन बीते तो परिवार ने इंतजार किया, लेकिन जूली नहीं आई। 17 अगस्त की तारीख भी गुजर गई। अब 18 दिन बाद कहानी ऐसी जगह पहुंच गई है कि जिस एजेंसी ने जूली को नसबंदी के लिए पकड़ा था, उसकी दो से तीन टीमें उसी जूली को गली-गली खोज रही हैं।
ये तो आ जान ही गए हैं कि जूली कोई आवारा कुत्ता नहीं, बल्कि वरिष्ठ भाजपा नेत्री की पालतू डागी है। वह तीन वर्ष से रॉकी और ऑस्कर के साथ रह रही थी।
परिवार का कहना है कि तीनों साथ खाते थे। जूली के गायब होने के बाद रॉकी और ऑस्कर ने भी खाना-पीना छोड़ दिया है। अब भाजपा नेत्री ने नगर परिषद चेयरमैन को शिकायत देकर सोमवार तक जूली नहीं मिलने पर एफआइआर कराने की चेतावनी दी है।
दो दिन बाद लौटने का दिया था भरोसा
भाजपा नेत्री के अनुसार 13 अगस्त को एजेंसी के कर्मचारी एयरफोर्स रोड स्थित घर के बाहर से जूली को पकड़कर ले गए। पूछने पर बताया कि नसबंदी कर दो दिन में वापस छोड़ देंगे।
जूली को ले जाते समय उन्होंने वीडियो भी बना ली। दो दिन बाद जब वह नहीं लौटी तो वह रिश्तेदारों के साथ नटार स्थित शेल्टर होम पहुंचीं। वहां जूली नहीं मिली। स्टाफ ने अंदर जाने की अनुमति नहीं दी और 17 अगस्त को घर पहुंचाने की बात कही। लेकिन 17 अगस्त को भी जूली नहीं आई।
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शेल्टर होम से नगर परिषद तक पहुंचा मामला
जूली के नहीं लौटने पर भाजपा नेत्री और रिश्तेदारों ने नसबंदी करने वाले डा. मुकेश से संपर्क किया। वहां भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो नगर परिषद चेयरमैन शांति स्वरूप को शिकायत दी गई।
भाजपा नेत्री का कहना है कि जूली पिछले तीन साल से उनके रिश्तेदार के राकी और आस्कर के साथ रहती थी और अब वह स्ट्रीट डाग नहीं थी। उन्होंने आशंका जताई कि नसबंदी के दौरान जूली के साथ कोई अनहोनी हो सकती है।
एजेंसी का दावा, छोड़ दिया था जूली को
एजेंसी के सुपरवाइजर सोनू भाटी का कहना है कि 17 अगस्त को टेंडर खत्म होने के बाद जूली की नसबंदी कर उसे अन्य डागी के साथ एयरफोर्स रोड पर छोड़ दिया गया था। शिकायतकर्ता को आसपास के सीसीटीवी खंगालने के लिए कहा गया है। एजेंसी की दो से तीन टीमें भी जूली की तलाश में लगी हैं। सोमवार तक नहीं मिली तो पर्चे छपवाकर लातश कराने की बात कही गई है।
5600 कुत्तों की नसबंदी का दावा
नगर परिषद ने करीब एक वर्ष पहले कुत्तों की नसबंदी के लिए एजेंसी को टेंडर दिया था। नटार स्थित शेल्टर होम में नसबंदी होती है। एजेंसी का दावा है कि शहर में अब तक 5600 कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है। जूली के मामले में नसबंदी के बाद उसकी पहचान और उसे वापस छोड़ने की प्रक्रिया सवालों के घेरे में है।
