गुमनाम दानवीर की अनोखी मिसाल, यमुनानगर के गंदापुरा में 30 दिनों में बदली सरकारी स्कूल की तकदीर
यमुनानगर के गंदापुरा गांव में एक गुमनाम दानवीर ने मात्र 30 दिनों में राजकीय माध्यमिक स्कूल की सूरत बदल दी।
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यमुनानगर के गंदापुरा में 30 दिनों में बदली सरकारी स्कूल की तकदीर (फोटो: जागरण)
HighLights
गुमनाम दानवीर ने 30 दिन में स्कूल कायापलट की।
30 ड्यूल डेस्क, झूले, 50 बच्चों को वर्दी-बस्ते दिए।
स्कूल भवन की मरम्मत और रंगाई भी करवाई गई।
राहुल शर्मा, यमुनानगर। मदद ऐसी कि नाम पूछो तो चुप्पी...पर काम देखो तो पूरा स्कूल बोल उठे। ऐसा सरस्वतीनगर खंड के गंदापुरा गांव में हो रहा है। गांव के गुमनाम दानवीर ने महज 30 दिन में राजकीय माध्यमिक स्कूल की सूरत बदल दी।
जुलाई में स्कूल के हालात देख गांव के व्यक्ति ने मदद का हाथ बढ़ाया और एक के बाद एक स्कूल की जरूरत पूरी करता चला गया। स्कूल की जुलाई व अगस्त की तस्वीरें बदलाव की कहानी खुद बयां कर रही हैं।
जुलाई में स्कूल पहुंचे व्यक्ति ने सबसे पहले स्कूल इंचार्ज से बात की। स्कूल की स्थिति व बच्चों की जरूरतें देख सहयोग की इच्छा जताई। आग्रह किया कि उसका नाम सार्वजनिक न किया जाए। एक हफ्ते में व्यक्ति ने स्कूल में 30 ड्यूल डेस्क रखवा दिए।
बच्चों के बैठने की व्यवस्था सुधरी तो ध्यान स्कूल के मैदान पर गया, जहां चार दिन में नए झूले लगवा दिए। कुछ बच्चों को मैली या बिना वर्दी में स्कूल आते देख अगले हफ्ते में सभी 50 छात्र-छात्राओं को वर्दी, जूते-जुराबें व स्कूल बैग दे दिए।
इससे उन बच्चों को राहत मिली, जो आर्थिक तंगी में यह सामान नहीं ले पा रहे थे। मदद का सिलसिला यहीं नहीं रुका, स्कूल की दीवारों पर सीलन, मैली व दाररें देख व्यक्ति ने पूरे भवन में मरम्मत कार्य सहित पेंट भी करावा दिया।
स्कूल की जरूरतें पूरी, अन्यों के लिए प्रेरणा
डिप्टी डीईओ केएस संधावा ने कहा कि राजकीय स्कूलों के लिए समाज के लोगों का इस तरह आगे आना सराहनीय है। गंदापुरा के व्यक्ति ने बिना किसी प्रचार की इच्छा के बच्चों व स्कूल की जरूरतें पूरी की। ऐसी पहल से स्कूल का वातावरण बेहतर होने के साथ अन्य लोगों को भी सरकारी स्कूलों की मदद के लिए प्रेरणा मिलती है।
