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    कमजोर इंटरनल बॉडी क्लॉक से डिमेंशिया होने का खतरा, सबसे ज्यादा इस उम्र के लोगों पर असर का जोखिम

    Updated: Wed, 07 Jan 2026 07:01 AM (IST)

    किसी व्यक्ति को आंतरिक शरीर घड़ी (इंटरनल बॉडी क्लॉक) डिमेंशिया के खतरे को प्रभावित कर सकती है, जिसमें कमजोर सर्केडियनरिदम, जो गड़बड़ी और अनियमितता से ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. दोपहर के बाद सर्केडियन रिदम का चरम पर पहुंचना डिमेंशिया के 45 प्रतिशत ज्यादा जोखिम से जुड़ा था

    2. शोधकर्ताओं ने औसत 79 साल उम्र वालों 2,100 से ज्यादा बुजुर्गों के डाटा का विश्लेषण किया

    पीटीआई, नई दिल्ली। किसी व्यक्ति को आंतरिक शरीर घड़ी (इंटरनल बाडी बलाक) डिमेंशिया के खतरे को प्रभावित कर सकती है, जिसमें कमजोर सर्केडियन रिदम, जो गड़बड़ी और अनियमितता से पहचानी जाती है, इस स्थिति के विकसित होने की उच्च संभावना से जुड़ी है। एक अध्ययन से यह जानकारी सामने आई है। दिन में बाद जैसे दोपहर के बाद सर्केडियन रिदम का चरम पर पहुंचना डिमेंशिया के 45 प्रतिशत ज्यादा जोखिम से जुड़ा था।

    कैसे होता है डिमेंशियाः

    टेक्सास साउथवेस्टर्न मेडिकल सेंटर से अध्ययन की लेखिका वेंडी बांग ने कहा, सर्केडियन रिदम में गड़बड़ी शरीर की प्रक्रियाओं जैसे सूजन को बदल सकता है और नींद में दिक्कत हो सकती है, जिससे डिमेंशिया से जुड़े एमीलाइड पट्टिकाओं की वृद्धि हो सकती है या मस्तिष्क से एमीलाइड की निकासी की कम कर सकता है। एमीलाइड प‌ट्टी मस्तिष्क में प्रोटीन का एक गुच्छा है, जो आमतौर पर अल्जाइमर रोग के मरीजों में देखा जाता है और सेल डेथ का कारण बनकर डिमेंशिया में योगदन करता है।

    बुजर्गों का डाटा का विश्लेषण किया

    शोधकर्ताओं ने 2,100 से ज्यादा बुजुर्गों के डाटा का विश्लेषण किया, जिनकी औसत उम्र 79 साल थी। अध्ययन शुरू होने पर उन्हें डिमेंशिया नहीं था। प्रतिभागियों ने औसतन 12 दिनों तक आराम और गतिविधि को मापने के लिए छाती पर मानिटर पहना। यह अध्ययन जर्नल न्यूरोलाजी में प्रकाशित हुआ। प्रतिभागियों का तीन वर्षों तक पालन किया और इस दौरान 176 लोगों का डिमेंशिया का निदान किया गया।

    नियमित समय का पालन करने का निर्देश

    शोधकर्ताओं ने कहा कि एक मजबूत सर्केडियन रिदम में शरीर की घड़ी 24 घंटे के दिन के साथ अच्छी तरह से मेल खाती है। शरीर के कामों के लिए स्पष्ट संकेत भेजती है। लोग सोने और गतिविधि के लिए नियमित समय का पालन करते हैं, भले ही कार्यक्रम या मौसम में परिवर्तन हो।

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    कमजोर सर्केडियन रिदम वाले लोग, जो प्रकाश और कार्यक्रम परिवर्तनों से अधिक प्रभावित होते हैं, मौसम या कार्यक्रम परिवर्तनों के साथ नींद और गतिविधि के समय को बदलने की अधिक संभावना रखते हैं।

    उम्र के साथ सर्केडियन स्टिम में बदलाव

    अध्ययन में पाया गया कि जिन प्रतिभागियों का सर्केडियन रिदम कम और कमजोर था, उनका डिमेंशिया का खतरा उच्च और मजबूत रिदम वाले लोगों की तुलना में लगभग 2.5 गुना अधिक था।

    वांग ने कहा, सर्केडियन रिदम में बदलाव उम्र के साथ होते हैं और सुबूत बताते हैं कि सर्केडियन रिदम में गड़बड़ी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों जैसे डिमेंशिया के लिए एक रिस्क फैक्टर हो सकता है।

    वांग ने कहा, अध्ययन में इन आराम गतिविधियों की रिदम को मापा गया और पाया गया कि जिन लोगों की रिदम कमजोर व टूटी-फूटी थी और जिन लोगों की गतिविधि का स्तर दिन में बाद में चरम पर पहुंचती था, उनमें डिमेशिया का खतरा ज्यादा था।

    बॉडी क्लॉक और माहौत का संकेत

    शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों ने दोपहर में शरीर की घड़ी की गतिविधि का चरम पर 2:15 बजे या बाद में अनुभव किया, उनकी तुलना में जो 1:11 बजे से 2:14 बजे के बीच थे, उन्हें डिमेंशिया का 45 प्रतिशत अधिक जोखिम था।

    दिन के पहले भाग में चरम पर पहुंचने वाले सात प्रतिशत लोगों को डिमेशिया हुआ, जबकि उच्च व मजबूत सर्केडियन रिदम बाले 10 प्रतिशत लोगों को डिमेंशिया हुआ। गतिविधि का चरम पर होने का मतलब है कि बॉडी क्लाक जैसे कि देर के घंटे और अंधेरा के बीच अंतर हो सकता है।