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19 लाख की मशीन से होगी ड्रग टेस्टिंग, बिलासपुर में DC राहुल खुद पर करेंगे पहल; कर्मचारियों का भी होगा टेस्ट

By Shubham Rahi Edited By: Rajesh Sharma
Published: Thu, 15 Oct 2026 06:46 AM (IST)Updated: Thu, 15 Oct 2026 11:15 AM (IST)

बिलासपुर प्रशासन नशे के खिलाफ अभियान को नई दिशा दे रहा है, जहां 19 लाख रुपये की सो-टाक्सा मोबाइल ड्रग टेस्टिंग मशीन का उपयोग शुरू हो रहा है।

ड्रग टेस्टिंग मशीन और बिलासपुर के उपायुक्त राहुल कुमार।

ड्रग टेस्टिंग मशीन और बिलासपुर के उपायुक्त राहुल कुमार।

HighLights

  1. 19 लाख की सो-टाक्सा मोबाइल ड्रग टेस्टिंग मशीन का उपयोग।

  2. उपायुक्त राहुल कुमार स्वयं सबसे पहले करवाएंगे ड्रग टेस्ट।

  3. प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों की भी होगी जांच।

शुभम राही, बिलासपुर। नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस की कार्रवाई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि सरकारी तंत्र को भी इस अभियान में जिम्मेदारी निभानी होगी। इसी सोच के साथ हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिला प्रशासन नशे के विरुद्ध जारी मुहिम को नई दिशा देने की तैयारी में है। करीब 19 लाख रुपये से पुलिस प्रशासन को उपलब्ध करवाई गई प्रदेश की पहली सो-टाक्सा मोबाइल ड्रग टेस्टिंग मशीन का प्रयोग शुरू होने जा रहा है।

खास बात यह है कि इस मशीन के इस्तेमाल की शुरुआत उपायुक्त कार्यालय से होगी और उपायुक्त राहुल कुमार स्वयं सबसे पहले अपना ड्रग टेस्ट करवाएंगे। इसके बाद एसडीएम, एडीसी व उपायुक्त कार्यालय के अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों की जांच की जाएगी।

मौके पर जांच की सुविधा

जिला प्रशासन की ओर से खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट के माध्यम से मोबाइल ड्रग टेस्टिंग सिस्टम पुलिस प्रशासन को उपलब्ध करवाया गया है। मशीन का उद्देश्य नशे से जुड़े मामलों में मौके पर ही जांच की सुविधा उपलब्ध करवाना है। जिला प्रशासन अपने कार्यालय से ही नशे के विरुद्ध जागरूकता और जिम्मेदारी का संदेश देने की तैयारी में है। 

वहीं, इस पहल का प्रमुख पहलू यह भी है कि नशे की पहचान के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल केवल पुलिस की जांच तक सीमित न रहकर प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा में आएगा। 

6 श्रेणियों के मादक पदार्थों की पहचान करने में सक्षम

सो-टाक्सा मोबाइल ड्रग टेस्टिंग सिस्टम छह प्रमुख श्रेणियों के मादक पदार्थों की पहचान करने में सक्षम है। इनमें एम्फेटामाइन, मेथाम्फेटामाइन, बेंजोडायजेपाइन, कैनाबिस यानी टीएचसी, कोकीन और ओपिएट्स शामिल हैं। चिट्टे के मामलों में इस्तेमाल होने वाले पदार्थ की प्रकृति की जांच के लिहाज से यह महत्वपूर्ण है। वहीं, मोबाइल ड्रग टेस्टिंग सिस्टम का प्रमुख लाभ यह है कि इससे निर्धारित सैंपल व परीक्षण प्रक्रिया के आधार पर मौके पर ही प्रारंभिक जांच की जा सकती है। इससे जांच करने वाली एजेंसियों को संदिग्ध पदार्थों के संबंध में शुरुआती जानकारी प्राप्त करने में मदद मिलती है।

प्रशासनिक नेतृत्व के जरिए जाएगा संदेश

उपायुक्त के स्वयं सबसे पहले परीक्षण करवाने की पहल को इस अभियान का प्रमुख पहलू माना जा रहा है। आमतौर पर नशे के विरुद्ध कार्रवाई की जिम्मेदारी पुलिस व संबंधित एजेंसियों पर रहती है, लेकिन इस बार जिला प्रशासन का प्रमुख कार्यालय भी इस मुहिम के केंद्र में रहेगा। जिला प्रशासन की इस पहल के जरिए यह संदेश देने का प्रयास है कि नशे के खिलाफ लड़ाई में सरकारी संस्थानों की भूमिका भी अहम है।

प्रदेश की पहली सो-टाक्सा मोबाइल ड्रग टेस्टिंग मशीन का प्रयोग शुरू होने जा रहा है। इस मशीन से सबसे पहला प्रयोग उपायुक्त कार्यालय और अपने आप से करवाना है। इसके बाद अन्य प्रशासनिक अधिकारी इस मशीन से अपना टेस्ट करवाएंगे। पुलिस प्रशासन को इस संदर्भ में आदेश जारी कर दिए हैं।
-राहुल कुमार, उपायुक्त, बिलासपुर।

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