हिमाचल की मछली को अलग ब्रांड के नाम से बेचने की तैयारी, ट्राउट से होगी शुरुआत; हिमालयन फिश नाम का सुझाव
हिमाचल प्रदेश अपनी मछलियों को वैश्विक बाजार में 'हिमालयन फिश' जैसे ब्रांड नाम से बेचने की तैयारी कर रहा है, जिसकी शुरुआत ट्राउट मछली से होगी।

हिमाचल प्रदेश की मछली को नया ब्रांड नाम दिया जाएगा। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
हिमाचल की मछली को वैश्विक ब्रांड नाम देने की तैयारी।
शुरुआत ट्राउट मछली से होगी, 'हिमालयन फिश' नाम प्रस्तावित।
मछुआरों को उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा, निर्यात बढ़ेगा।
मुनीष गारिया, बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश के ठंडे व स्वच्छ पानी में पलने वाली मछली अब दुनियाभर के बाजारों में अपनी खास पहचान बनाने जा रही है। प्रदेश सरकार का मत्स्य विभाग हिमाचल की मछली को एक अलग ब्रांड नेम देने की तैयारी में जुट गया है। इस पूरी योजना की शुरुआत ट्राउट फिश से होगी, जिसके बाद चरणबद्ध तरीके से अन्य प्रजातियों को भी इस ब्रांडिंग के दायरे में लाया जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य राज्य के मत्स्य उत्पादन को विदेशों में एक प्रीमियम ब्रांड के रूप में निर्यात करना है।
इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए मत्स्य विभाग ने स्थानीय मत्स्य सोसायटी व हितधारकों के साथ संवाद प्रक्रिया शुरू कर दी है। शुरुआती दौर के मंथन में 'हिमालयन फिश' नाम प्रमुखता से सामने आया है, हालांकि अंतिम नाम पर मुहर लगाने के लिए अभी अन्य सुझाव भी लिए जा रहे हैं। ब्रांड का नाम तय होते ही राज्य सरकार द्वारा केंद्रीय मत्स्य मंत्रालय को आधिकारिक मंजूरी व निर्यात की औपचारिकताओं के लिए पत्र भेजा जाएगा।
20,005 टन मछली उत्पादन
प्रदेश में मत्स्य पालन न केवल अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहा है, बल्कि रोजगार का भी बड़ा माध्यम है। पिछले वर्ष प्रदेश में कुल 20,005 टन मछली का उत्पादन दर्ज किया गया था, जिसमें केवल ट्राउट फिश का योगदान करीब छह हजार टन रहा।
इन बांधों में सबसे ज्यादा उत्पादन
हिमाचल प्रदेश में सबसे अधिक मछली उत्पादन गोबिंद सागर झील, पौंग बांध, कोल बांध, चमेरा और रणजीत सागर बांध में होता है। प्रदेश में लगभग 42 हजार लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से मत्स्य व्यवसाय में पंजीकृत हैं, जिनमें से 10 हजार से अधिक सक्रिय मछुआरे नियमित रूप से मछली पकड़ने के कार्य से अपनी आजीविका चला रहे हैं।
ट्राउट उत्पादन के प्रमुख केंद्र
हिमाचल की नदियों और खड्डों का ठंडा पानी रेनबो और ब्राउन ट्राउट के उत्पादन के लिए आदर्श माना जाता है। जिला कुल्लू की पतलीकूहल, तीर्थन घाटी, सैंज और पार्वती नदी क्षेत्र, मंडी की बरोट घाटी, उहल नदी और लंबाडग खड्ड, चंबा के होली, भरमौर और भंदल क्षेत्र, किन्नौर की सांग्ला घाटी में बास्पा नदी के तट पर स्थित सरकारी व निजी फार्म हैं। इसके अलावा शिमला के रोहड़ू और चिड़गांव में भी ट्राउट मछली पाई जाती है।
प्रदेश की मछली को एक ब्रांड के लिए काम किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अलग ब्रांड नेम मिलने से जहां हिमाचल की मछली को नए खरीदार मिलेंगे, वहीं मछुआरों को भी उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।
-ओमकांत ठाकुर, निदेशक मत्स्य विभाग हिमाचल प्रदेश।
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