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'पत्थर हटाने गाड़ी से उतरा और पलक झपकते ही 13 जिंदगियां दफन', लाहुल हादसे में बचे इकलौते शख्स ने बताई आंखों देखी

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Sat, 25 Jul 2026 11:22 AM (IST)Updated: Sat, 25 Jul 2026 12:09 PM (IST)

उदयपुर-किलाड़ मार्ग पर हुए भूस्खलन में 13 लोगों की जान चली गई, जबकि 40 वर्षीय विकर सिंह चमत्कारिक रूप से ...और पढ़ें

लाहुल में सूमो पर गिरा पहाड़ और वाहन में सवार इकलौता शख्स जो सुरक्षित बचा विकर सिंह।

लाहुल में सूमो पर गिरा पहाड़ और वाहन में सवार इकलौता शख्स जो सुरक्षित बचा विकर सिंह।

HighLights

  1. उदयपुर-किलाड़ मार्ग पर भूस्खलन में 13 लोगों की मौत।

  2. विकर सिंह पत्थर हटाने उतरे, चमत्कारिक ढंग से बचे।

  3. हादसे में मासूम बच्चों सहित कई लोगों ने जान गंवाई।

कृष्ण चंद राणा, पांगी (चंबा)। 'मैं पांगी के पहाड़ों में पैदा हुआ और यहीं बड़ा हुआ...पहाड़ गिरते हुए भी देखे हैं। यह नहीं सोचा था कि एक दिन पहाड़ मुझ पर गिरने लगेगा और रास्ते पर गिरे पत्थर मुझे बचा लेंगे। मैं बच गया हूं...यह विश्वास मुझे अब तक नहीं हो रहा है। यह नहीं समझ पा रहा हूं कि मैं अपनी मां, पत्नी और दो बेटियों के लिए बचा हूं या उस डर को आपके साथ साझा करने के लिए...।'

यह कहना है उदयपुर-किलाड़ मार्ग पर हुए हादसे में इकलौते बचे 40 वर्षीय विकर सिंह का। किलाड़ में कपड़ों की छोटी सी दुकान चलाने वाले विकर सिंह की आवाज में देर शाम तक भय था।

कुल्लू से सामान लाने गए थे विकर सिंह

वह बताते हैं, 'कुल्लू तक गया था घर और दुकान का सामान लाने। बार्डर रोड आर्गेनाइजेशन इस मार्ग को बना रही है। कल सड़क के लिए ब्लास्टिंग की जा रही थी तो वाहन लाहुल के तिंदी में ही रोक दिए गए। सुबह चले तो काम जारी था। 

बताई आंखों देखी

मैं सूमो गाड़ी में बैठा था। दूसरी ओर से आने वाले वाहन निकल रहे थे और हमारी ओर वाहन खड़े थे तो मैं बाहर निकला कि देखता हूं चल क्या रहा है। जैसे ही हमारी ओर के वाहन आगे बढ़ने लगे, मैं सड़क पर पड़े पत्थर को हटाने लगा। तब तक सब वाहन में बैठ चुके थे। अचानक जोर की आवाज आई...कुछ लोगों ने कहा कि चट्टान गिरी और सूमो दब गई। उसके बाद मैंने एक ही बार पीछे देखा...वह दृश्य मैं कभी भूल नहीं पाऊंगा।'

मौत को पास से देखकर आया

'मैं किलाड़ की तरफ को दौड़ा...मेरे कदम उठ नहीं पा रहे थे। सांस सूख रही थी। बच्चियों का चेहरा घूम रहा था। अपने साथी यात्रियों का ध्यान आ रहा था। किसी तरह घर पहुंचा। माता भाग देई, पत्नी पुष्पा और 11 एवं 9 वर्ष की बेटियों सविता और अंजलि ने आंसुओं के साथ मेरा स्वागत किया। सच कहूं तो मैं अब भी सामान्य नहीं हूं। मौत को बहुत पास से देख कर आया हूं न।'

13 लोगों को नहीं मिला संभलने का मौका

इस हादसे में मासूम बच्चे सहित 13 लोगों की पहाड़ के नीचे दबकर मौत हो गई। गाड़ी में बैठे लोगों को संभलने का जरा सा मौका भी नहीं मिल पाया। पहाड़ से एकाएक मौत आकर उनपर बरस गई। 

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