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    हर चौथा युवा साइलेंट डायबिटीज और हाई बीपी की चपेट में, बढ़ रहा हार्ट अटैक का खतरा

    Updated: Fri, 17 Jul 2026 03:43 PM (IST)

    चंबा के डॉ. पंकज गुप्ता ने बताया कि खराब जीवनशैली के कारण हर चौथा युवा साइलेंट डायबिटीज और हाई बीपी की चपेट में है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ रहा ह ...और पढ़ें

    युवाओं में बढ़ रहा साइलेंट डायबिटीज और हाई बीपी का खतरा।

    युवाओं में बढ़ रहा साइलेंट डायबिटीज और हाई बीपी का खतरा।

    HighLights

    1. हर चौथा युवा साइलेंट डायबिटीज और हाई बीपी से ग्रस्त

    2. खराब दिनचर्या, तनाव से युवाओं में हार्ट अटैक का खतरा

    3. संतुलित आहार, व्यायाम, जांच से बीमारियों पर नियंत्रण संभव

    जागरण संवाददाता, चंबा। डायबिटीज और उच्च रक्तचाप अब केवल बढ़ती उम्र की बीमारी नहीं रह गई है। खराब दिनचर्या, असंतुलित खानपान, बढ़ते तनाव और शारीरिक निष्क्रियता के कारण बड़ी संख्या में युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। यह जानकारी पंडित जवाहर लाल नेहरू राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय चंबा के प्राचार्य एवं मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. पंकज गुप्ता ने दैनिक जागरण के हेलो डॉक्टर कार्यक्रम में दी।

    उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में आने वाला हर चौथा युवा साइलेंट हाई ब्लड प्रेशर और मधुमेह से प्रभावित मिल रहा है, जबकि अधिकांश को अपनी बीमारी का पता ही नहीं होता। डायबिटीज और अनियंत्रित रक्तचाप के कारण 25 से 40 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं में हार्ट अटैक के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले दो-तीन वर्षों में कम उम्र में हार्ट अटैक से होने वाली मौतों के पीछे भी मुख्य कारण अनियंत्रित लाइफस्टाइल डिजीज है।

    हार्ट अटैक अचानक नहीं आता, बल्कि वर्षों तक स्वास्थ्य की अनदेखी का परिणाम होता है। आज की युवा पीढ़ी मोबाइल और डिजिटल जीवनशैली में इतनी व्यस्त है कि नियमित स्वास्थ्य जांच और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देती है। डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर केवल हृदय ही नहीं, बल्कि किडनी, लिवर और आंखों को भी गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं।

    इससे बचने के लिए संतुलित एवं पौष्टिक आहार, नियमित व्यायाम, तनाव से दूरी और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी है। कार्यक्रम के दौरान सुल्तानपुर निवासी 42 वर्षीय हरि सिंह ने बताया कि उन्हें वर्ष 2013 से मधुमेह है तथा तीन वर्ष पहले हार्ट अटैक आने पर एंजियोप्लास्टी करानी पड़ी थी।

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    वर्तमान में शुगर और बीपी की दवा लेने के बावजूद दोनों नियंत्रित नहीं हैं। इस पर डॉ. पंकज गुप्ता ने सलाह दी कि सभी जरूरी रक्त जांच करवाकर विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लें। आवश्यकता होने पर दवाओं की मात्रा में बदलाव चिकित्सकीय सलाह से ही किया जाए। साथ ही प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट पैदल चलें तथा चीनी, मैदा और तली-भुनी वस्तुओं से परहेज करें।

    सवाल: मुझे डायबिटीज और हाई बीपी दोनों हैं। क्या इससे दिल की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है? रमेश कुमार, चंबा
    जवाब: हां, डायबिटीज और हाई बीपी दोनों हार्ट अटैक का खतरा बढ़ाते हैं। शुगर, रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखें, नियमित दवा लें और रोज कम से कम 45 मिनट पैदल चलें।

    सवाल: मेरा बीपी दवा लेने के बाद भी कभी-कभी बढ़ जाता है। क्या करूं? संजीव शर्मा, सलूणी
    जवाब: बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बंद न करें। यदि बीपी नियंत्रित नहीं हो रहा है तो डॉक्टर से मिलकर दवा की समीक्षा कराएं। नमक कम खाएं और तनाव से बचें।

    सवाल: बीपी और डायबिटीज होने पर सबसे जरूरी सावधानी क्या है?:मोहित ठाकुर, भरमौर
    जवाब: नियमित जांच कराएं, दवा समय पर लें, संतुलित आहार अपनाएं, रोज व्यायाम करें और धूम्रपान व शराब से दूरी रखें। दोनों बीमारियां नियंत्रित रहें तो जोखिम काफी कम हो जाता है।

    सवाल: डायबिटीज के शुरुआती लक्षण कैसे पहचानें? :पूजा देवी, चुवाड़ी
    जवाब: बार-बार प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, थकान, धुंधला दिखना, घाव देर से भरना और हाथ-पैरों में झुनझुनी इसके प्रमुख शुरुआती लक्षण हैं। ऐसे संकेत मिलें तो तुरंत जांच कराएं।

    सवाल: हाई बीपी के सामान्य लक्षण क्या होते हैं? :राजेश कुमार, तीसा
    जवाब: तेज सिरदर्द, चक्कर आना, सांस फूलना, सीने में दर्द, धुंधला दिखना और अत्यधिक थकान हाई बीपी के संकेत हो सकते हैं। समय पर जांच और उपचार जरूरी है।

    सवाल: बच्चों में दिल की बीमारी का पता कब लगवाना चाहिए?:सीमा देवी, मैहला
    जवाब: यदि परिवार में दिल की बीमारी का इतिहास है या बच्चे को जल्दी थकान, सांस फूलने या बेहोशी की शिकायत हो तो तुरंत हृदय रोग विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। शुरुआती पहचान से बेहतर इलाज संभव होता है।

    इन बातों का रखें ध्यान

    • सीने में भारीपन, सांस फूलना या तेज धड़कन को नजरअंदाज न करें।
    • बार-बार अपच, थकान या बेचैनी होने पर डॉक्टर से मिलें।
    • शुरुआती जांच के लिए समय पर ईसीजी कराएं।
    • समय पर इलाज से एंजियोप्लास्टी की जरूरत टल सकती है।

    ऐसे पहचानें दिल की बीमारी

    • रक्तचाप, शुगर, कोलेस्ट्रॉल और वजन की नियमित जांच कराएं।
    • जोखिम वाले मरीज समय-समय पर ईसीजी, ईको और टीएमटी कराएं।
    • डॉक्टर की सलाह पर एचबीए1सी, लिपिड प्रोफाइल व अन्य जांच कराएं।
    • परिवार में इतिहास हो तो 20 वर्ष की उम्र से स्क्रीनिंग शुरू करें।

    ऐसे रखें दिल को स्वस्थ

    • ताजे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और मिलेट्स खाएं।
    • रोज 45 मिनट व्यायाम या पैदल चलें, सूर्य नमस्कार करें।
    • वजन नियंत्रित रखें और मोटापे से बचें।
    • तनाव कम करें, परिवार के साथ समय बिताएं।

    हार्ट अटैक के प्रमुख लक्षण

    • सीने में दर्द, दबाव, जकड़न या भारीपन महसूस होना।
    • दर्द बांह, पीठ, गर्दन, जबड़े या पेट तक फैलना।
    • सांस लेने में तकलीफ, अधिक पसीना या चक्कर आना।
    • मतली, अत्यधिक थकान या अचानक कमजोरी महसूस होना।

    अन्य जिलों से भी आई फोन कॉलचंबा मुख्यालय से जुलाखड़ी की रेखा गुप्ता,चंबा शहर के अरूण कुमार, पवन, पुखरी से रेखा कुमारी, सलूणी से राज कुमार, साहो से इंदू कुमारी, पुखरी से दिव्या कुमारी, टिकरी से ब्यास देव, पुखरी से नर सिंह, चंबा के सुराड़ा मोहल्ला से भूपेंद्र जसरोटिया, तेलका से राज कुमार, पांगी से टेक चंद, सुंडला से सुमित कुमार, भरमौर से राम कुमार, होली से विजय कुमार व उत्तम सिंह ने डॉ. पंकज गुप्ता को अपनी समस्याएं बताई।

    इनके अलावा प्रदेश के अन्य जिलों से भी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के निदान के लिए फोन कॉल आई। हमीरपुर से सुनील , कुल्लू से राजन, हमीरपुर से रेखा और मनाली से संजय कुमार सहित अन्य लोगों ने डॉक्टर से सलाह ली।