'ऐसी विनाशकारी आपदाओं का रुकना जरूरी...', नेपाल बाढ़ पर दलाई लामा ने जताया दुख
दलाई लामा ने नेपाल के रसुवा और तिब्बत के क्यिरोंग में आई विनाशकारी बाढ़ से हुए जान-माल के नुकसान पर गहरा दुख व्यक्त किया है।

पाल में विनाशकारी बाढ़ पर दलाई लामा ने जताया दुख (फाइल फोटो)
HighLights
दलाई लामा ने नेपाल-तिब्बत बाढ़ पर गहरा दुख व्यक्त किया
उन्होंने जलवायु परिवर्तन को आपदा का संभावित कारण बताया
नेपाल में 469 मौतें, भारत ने मानवीय सहायता की पेशकश की
जागरण संवाददाता, धर्मशाला। नेपाल के रसुवा इलाके और तिब्बत के क्यिरोंग में आई विनाशकारी बाढ़ में लोगों की मौत और भारी नुकसान पर दलाई लामा ने दुख व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए शोक-संतप्त परिवारों और आपदा से प्रभावित सभी लोगों के प्रति संवेदना एवं सहानुभूति जताई।
दलाई लामा ने कहा कि इन क्षेत्रों में पहले भी प्राकृतिक आपदाएं आती रही हैं, ऐसे में यह किसी गहरी वजह की ओर संकेत करता है। उन्होंने कहा कि इसके पीछे जलवायु परिवर्तन अथवा अन्य कारक हो सकते हैं।
उन्होंने उम्मीद जताई कि जहां भी संभव हो, ऐसे प्रभावी कदम उठाए जाएंगे, जिससे भविष्य में इस तरह की विनाशकारी आपदाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। उन्होंने अपने संदेश का समापन प्रभावित लोगों के प्रति प्रार्थना के साथ किया।
अब तक 469 की मौत
नेपाल में बाढ़ से अब तक 469 लोगों की मौत हो चुकी है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नेपाल के प्रति एकजुटता दिखाई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेनद्र शाह से बात की।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत हर संभव मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है। इसके अलावा, विदेश मंत्रालय (MEA) ने नेपाल में त्रिशूली-I प्रोजेक्ट में काम कर रहे उन 63 भारतीय नागरिकों के नाम जारी किए जिन्हें बचा लिया गया है। विदश मंत्रालय ने बताया कि 288 भारतीय नागरिकों से अभी भी संपर्क नहीं हो पाया है।
विदेशी बचाव कार्यों में तालमेल बिठाने के लिए, नेपाल के विदेश मंत्रालय (MoFA) ने गुरुवार को एक इमरजेंसी कंट्रोल रूम (ECR) बनाया। इसका मकसद रसुवा जिले में भयानक भोटेकोशी अचानक बाढ़ से प्रभावित विदेशी नागरिकों के लिए सहायता का समन्वय करना है।
मंत्रालय ने एक नोटिस में कहा कि ECR बाढ़ की घटना से प्रभावित, लापता या किसी तरह से इससे जुड़े विदेशी नागरिकों के लिए खोज और बचाव, जानकारी की पुष्टि और कांसुलर सहायता के लिए मुख्य समन्वय संस्था के तौर पर काम करेगा।
