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कांगड़ा और चंबा के 98 गांवों को सड़क से जोड़ने की तैयारी, PWD डीपीआर बनाने में जुटा; पूरी करनी होंगी 3 शर्तें

By Rajinder Dogra Edited By: Rajesh Sharma
Published: Thu, 03 Sep 2026 06:42 AM (IST)

हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग कांगड़ा और चंबा जिलों के 98 गांवों को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क ...और पढ़ें

कांगड़ा और चंबा के 98 गांव सड़क सुविधा से जुड़ेंगे। प्रतीकात्मक फोटो

कांगड़ा और चंबा के 98 गांव सड़क सुविधा से जुड़ेंगे। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. कांगड़ा-चंबा के 98 गांवों को सड़क से जोड़ा जाएगा।

  2. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना फेस टू के तहत कार्य।

  3. लोक निर्माण विभाग ने डीपीआर बनाने का काम शुरू किया।

संवाद सहयोगी, धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग ने कांगड़ा जोन के तहत आते कांगड़ा और चंबा जिले के 98 गांवों को भाग्य रेखा से जोड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना चार फेस टू के तहत दोनों ही जिलों के 98 गांवों को चिह्नित कर लिया गया, जिनकी आबादी 250 से ज्यादा की है, जहां भविष्य में सड़क निर्माण किया जाएगा। 

इसके लिए विभाग की ओर संबंधित वृत्तों के तहत आते मंडलों में डीपीआर बनाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। डीपीआर बनने के बाद इसे स्टेट टेक्नीकल एजेंसी को भेजी जाएगा। स्टेट टेक्नीकल एजेंसी से मंजूरी मिलने के बाद इसे प्रदेश सरकार और फिर केंद्र सरकार की स्वीकृति को भेजा जाएगा। 

चंबा व कांगड़ा के कितने गांव

केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद अन्य छोटी-बड़ी औपचारिकताओं को पूरा किया जाएगा। जिसके उपरोक्त गांवों को सड़क से जोड़ने का कार्य शुरू होगा। कांगड़ा व चंबा जिलों के 98 गांवों में से 77 गांव चंबा जिले जबकि कांगड़ा जिले के 21 गांव शामिल हैं।  

ये शर्तें पूरी होनी चाहिएं

जिन गांवों में सड़कें बननी हैं, उनमें प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना चार के फेस टू के मानक पूरे होने के साथ, जहां वन भूमि है, वहां एफसीए क्लीयरेंस होनी चाहिए और जहां निजी भूमि हैं वह जमीन विभाग के नाम हो, उन गांवों में सड़क निकालने का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा।

क्या कहना है मुख्य अभियंता का

लोक निर्माण विभाग के कांगड़ा जोन के मुख्य अभियंता विकास सूद के मुताबिक 98 गांवों को सड़क से जोड़ने के लिए डीपीआर बनाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। फिलहाल डीपीआर बनने के बाद स्टेट टैक्नीकल एजेंसी को भेजी जाएगी। एजेंसी के निरीक्षण के बाद प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार को स्वीकृति के मामले भेजे जाएंगे।

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