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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 11, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

हिमाचल में टूरिज्म से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर, प्रकृति से छेड़छाड़ किए बिना कुल्लू की 5 साइटें होंगी विकसित

Updated: Wed, 11 Dec 2024 03:09 PM (IST)

Himachal Pradesh News हिमाचल प्रदेश सरकार इको टूरिज्म (Kullo Eco Tourism) को बढ़ावा दे रही है। कुल्लू के अनछुए पर्यटन स्थलों को अब ईको टूरिज्म (Himach ...और पढ़ें

प्रकृति से छेड़छाड़ किए बिना कुल्लू की 5 जगह होंगी विकसित
प्रकृति से छेड़छाड़ किए बिना कुल्लू की 5 जगह होंगी विकसित

HighLights

  1. हिमाचल प्रदेश के कुल्लू की पांच ईको टूरिज्म साइटों को मिली मंजूरी
  2. कुल्लू में मिल रहा इक्को पर्यटक को बढ़ावा, हो रहा बेहतर कार्य
  3. वन संपदा का संरक्षण करते हुए रोजगार के नए अवसर होंगे सृजित

दविंद्र ठाकुर, कुल्लू। हिमाचल प्रदेश सरकार इको टूरिज्म को बढ़ावा दे रही है। कुल्लू के अनछुए पर्यटन स्थलों को अब ईको टूरिज्म के तहत विकसित किया जाएगा। इससे वन संपदा का संरक्षण करते हुए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

हिमाचल की प्राकृतिक सुंदरता से कोई छेड़छाड़ ना हो और सैलानी भी यहां की प्राकृतिक सुंदरता का नजारा ले सकें। इस दिशा में अब कार्य होगा। इसके लिए चयनित कंपनियों को एक हेक्टेयर भूमि प्रदान की जाएगी। इसे 10 साल के लिए कंपनी का दिया जाएगा।

इसके बाद यहां पर प्रकृति से छेड़छाड़ किए बिना ही इन साइट में कार्य करना होगा। ईको टूरिज्म सोसायटी की ओर से कुल्लू जिला की पांच साइट का चयन हुआ है। इसमें काइसधार, कसोल, बिंद्रावानी, सोलंगनाला और सूमारोपा शामिल है।

युवाओं को मिलेगा रोजगार

इन नई साइट्स में पीपी मोड पर कार्य होगा। इनके विकसित होने से स्थानीय युवाओं को भी रोजगार के अवसर भी प्रदान होंगे। प्राकृतिक सौंदर्य से छेड़छाड़ किए बिना ही सैलानी भी यहां की प्राकृतिक सुंदरता को महसूस कर सके। ऐसे में अब जल्द ही इन सभी साइटों को विकसित करने का कार्य शुरू होगा।

संबंधित फर्म को इन सभी सीटों को खुद ही विकसित करना होगा। पीपीपी मोड के तहत काम करने वाली कंपनी को साइट पर आधारभूत संरचना खुद फॉरेस्ट-लॉ का पालन करते हुए तैयार करना होगा।

ऐसे में वन और जैव विविधता को नुकसान न पहुंचाने का भी उन्हें ख्याल रखना होगा। पूर्व में हिमाचल में वन संपदा को नुकसान पहुंचाने और बिना वन संरक्षण अधिनियम (एफसीए) की अनुमति के 11 इको-टूरिज्म साइट का आपरेशन केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय बंद कर चुका है।

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हर साल लाखों सैलानी निहारते हैं वादियां

सर्दियों में बर्फ का दीदार करने या गर्मियों में निचले क्षेत्रों की भीषण गर्मी से निजात पाने के लिए हर वर्ष लाखों सैलानी कुल्लू-मनाली का रुख करते हैं। आजकल हिमपात को देखने के लिए अब कुल्लू मनाली में पर्यटक रूख करने लगे हैं। लगातार यहां पर पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है। पर्यटन गतिविधि बढ़ने से यहां की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।

जिला की इको साइट के चयन होने के बाद इन पर जल्द कार्य होगा। भूमि का चयन कर लिया गया है इसमें एक हेक्टेयर वन भूमि को 10 सालों तक कंपनी को दिया जाएगा। इसमें प्रकृति से छेड़छाड़ किए बिना ही कार्य करना होगा।

- संदीप शर्मा अरण्यपाल वन वृत कुल्लू।

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