हिमाचल विधानसभा चुनाव के लिए तीसरे मोर्चे की तैयारी, भाजपा व कांग्रेस के 28 पूर्व विधायक जुटे कुल्लू में
हिमाचल प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले तीसरे मोर्चे की सुगबुगाहट तेज हो गई है। कुल्लू में हुई एक बैठक में भाजपा और कांग्रेस से असंतुष्ट 48 राजन ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए तीसरे मोर्चा की तैयारी चल रही है।
HighLights
2027 चुनाव से पहले हिमाचल में तीसरे मोर्चे की तैयारी.
कुल्लू में 48 नेता, 28 पूर्व विधायक बैठक में जुटे.
भाजपा-कांग्रेस असंतुष्ट नेता नए राजनीतिक विकल्प की तलाश में.
संवाद सहयोगी, कुल्लू। हिमाचल प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले तीसरे मोर्चे की सुगबुगाहट तेज हो गई है। भाजपा और कांग्रेस में मुख्यधारा से दूर अनुभव करने वाले 48 राजनीतिक लोग कुल्लू में जुटे। विधानसभा चुनाव में अभी करीब डेढ़ वर्ष शेष है, किंतु प्रयास यह है कि अभी से नए मोर्चे के अंकुर फूटें। हाल ही में कुल्लू की ठंडी वादियों में हुई महत्वपूर्ण बैठक ने प्रदेश की राजनीति का तापमान बदलने का प्रयास किया है।
नाम गुप्त रखने का आग्रह करते हुए एक पूर्व मंत्री कहते हैं, ' बैठक में करीब 48 नेताओं ने भाग लिया, जिनमें 28 पूर्व विधायक भी शामिल हैं। बैठक में कुल्लू से चार नेता शामिल थे।
यहां से चुनाव लड़ने के इच्छुक भी तैयार
तीसरे मोर्चे का संगठन बने, इसलिए तय किया है कि पहले प्रदेशभर का भ्रमण किया जाए। जिलों के रूप में सिरमौर, सोलन, शिमला से अभी कोई बड़ी सफलता नहीं मिली है किंतु क्षेत्रवार कुल्लू, मंडी, रामपुर, सोलन, शिमला, बंजार, बिलासपुर से चुनाव लड़ने के चेहरे भी तैयार कर लिए हैं। प्रयास यह भी है कि एक दो माह में नए दल का पंजीकरण भी करवाया जाए।'
पूर्व मंत्री व सांसदों के नाम भी
बैठक में शामिल नेताओं का दावा है कि कुछ सरकारी अधिकारी भी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर संगठन का भाग बनेंगे। बैठक में कुछ पूर्व मंत्रियों व सांसदों के नाम भी सामने आए हैं, जिसके बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
नए विकल्प की तलाश
बताया जा रहा है कि बैठक में शामिल कई नेता लंबे समय से कांग्रेस और भाजपा की नीतियों से असंतुष्ट चल रहे हैं। ऐसे में वे एक ऐसे मंच की तलाश में हैं जो प्रदेश की राजनीति में नया विकल्प बन सके। इससे पूर्व कई विधानसभा चुनावों से पूर्व मित्र मंडल, हिम लोकमोर्चा आदि का गठन हो चुका है। दलों में हिमाचल विकास कांग्रेस ने भाजपा को समर्थन देकर पहली ऐसी गैर कांग्रेस सरकार बनाई थी, जो प्रो. प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व में पांच वर्ष चली थी। देखना होगा कि उक्त नेताओं के प्रयास क्या रंग लाते हैं।