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    हिमाचल: 5 लोगों की मुहिम में जुड़ गए 500 और बना डाला 100 फीट लंबा पुल, दस साल से ताक रहे थे सरकार की राह

    By Sanjay Kumar Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Sat, 18 Jul 2026 04:45 PM (IST)

    हिमाचल के कुल्लू में भलाण-एक पंचायत के ग्रामीणों ने 10 साल के इंतजार के बाद खुद ही मनिहार खड्ड पर 100 फीट लंबा लकड़ी का पुल बना डाला। 5 लोगों की पहल प ...और पढ़ें

    भलाण-एक पंचायत में पुल का निर्माण करते लोग। जागरण

    भलाण-एक पंचायत में पुल का निर्माण करते लोग। जागरण

    HighLights

    1. कुल्लू ग्रामीणों ने 10 साल इंतजार के बाद खुद बनाया पुल।

    2. पांच लोगों की मुहिम में 500 ग्रामीण एकजुट हुए।

    3. मनिहार खड्ड पर 100 फीट लंबा लकड़ी का पुल निर्मित।

    संवाद सहयोगी, कुल्लू। हिमाचल प्रदेश में जिला कुल्लू की पंचायत भलाण-एक के ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन का 10 साल इंतजार करने के बाद थक हारकर खुद ही पुल बना डाला। 5 लोगों की मुहिम में 500 ग्रामीण जुट गए और मनिहार खड्ड पर 100 फीट लंबा लकड़ी का पुल बना दिया। बरसात के मौसम में खड्ड का जलस्तर बढ़ने से संपर्क कट जाता था और भुंतर व कुल्लू पहुंचने में दिक्कत का सामना करना पड़ता था।

    वर्ष 2016 में मनिहार खड्ड पर बना पुल बरसात की बाढ़ में बह गया था। हालांकि खड्ड पर पक्का पुल बनाने के लिए ग्रामीणों ने सरकार व प्रशासन को कई मर्तबा अवगत करवाया, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई।

    प्रधान ने 5 लोगों के साथ लिया संकल्प और जुटते गए लोग

    इस वर्ष नई पंचायत का गठन होने के बाद प्रधान विनोद शर्मा सहित पांच लोगों ने पुल के निर्माण को लेकर योजना तैयार की और स्वयं पुल को बनाने का निर्णय लिया। शुरुआत में पांच लोगों ने एकत्रित होकर पुल का कार्य शुरू किया। लेकिन धीरे-धीरे पुल के निर्माण को लेकर ग्रामीणों की भीड़ जुटने लगी और यह संख्या पांच से पांच सौ तक पहुंच गई।

    एक महीने में बना दिया पुल

    ग्रामीणों ने श्रमदान कर एक महीने में लकड़ी का पुल तैयार कर दिया। खड्ड पर पुल न होने के कारण भलाण एक, भलाण दो, ज्येष्ठा, गड़सा, पारली की पांच हजार से अधिक की जनता को दिक्कत पेश आती थी। अब पुल आवागमन के लिए तैयार होने पर हजारों की आबादी ने राहत की सांस ली है।

    करना पड़ता था कई किलोमीटर अतिरिक्त सफर

    पंचायत भलाण-एक के प्रधान विनोद शर्मा ने बताया कि दस वर्ष पहले खड्ड पर बना पुल बाढ़ में बह गया था। जिस कारण लोगों को कई किलोमीटर का अधिक सफर कर गंतव्य तक पहुंचने के लिए मजबूर थे। सबसे ज्यादा मुश्किलें स्कूली छात्रों, बुजुर्गों और मरीजों को पेश आती थी। बरसात के दिनों में जान जोखिम में डालकर खड्ड पार करनी पड़ती थी।

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    कितना आया खर्च

    प्रधान ने बताया पुल निर्माण के लिए साढ़े तीन लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च हुई है और पांच सौ से अधिक ग्रामीणों की दिहाड़ी लगी है। पंचायत प्रतिनिधियों ने भी आर्थिक सहयोग कर ग्रामीणों की हिम्मत को बढ़ाया है। जिससे वर्षों पुरानी समस्या का समाधान हुआ है।

    उन्होंने सरकार व प्रशासन से आग्रह किया है कि यहां पर पक्के पुल का निर्माण किया जाए, ताकि लोगों को मुश्किलों का सामना न करना पड़ सके।

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