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    चीनी दमन के विरोध में 640 KM की शांति पदयात्रा पर निकला तिब्बती एक्टिविस्ट, पहाड़ी रास्तों से पहुंचेगा लेह

    By Jaswant Thakur Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Tue, 28 Jul 2026 02:51 PM (IST)

    तिब्बती कार्यकर्ता कलसंग थारचिन चीन के दमनकारी कानूनों के विरोध में 640 किमी की शांति पदयात्रा पर मनाली पहुंचे, जहां से वे लेह के लिए रवाना हुए। ...और पढ़ें

    मनाली में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा के नीचे एकत्र हुए तिब्बती समुदाय के लोग। जागरण

    मनाली में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा के नीचे एकत्र हुए तिब्बती समुदाय के लोग। जागरण

    HighLights

    1. कलसंग थारचिन ने 640 किमी शांति पदयात्रा शुरू की।

    2. यह यात्रा चीन के दमनकारी कानूनों के विरोध में है।

    3. तिब्बती संस्कृति, भाषा और मानवाधिकारों की रक्षा लक्ष्य।

    जागरण संवाददाता, मनाली। तिब्बती कार्यकर्ता कलसंग थारचिन सोमवार शाम को मनाली पहुंचे। मनाली पहुंचने पर तिब्बत समुदाय के लोगों ने उनका स्वागत किया। मनाली में रात्रि विश्राम के बाद कलसंग मंगलवार सुबह मनाली से लेह रवाना हुए। वह धर्मशाला से 15 जुलाई को लेह लद्दाख के लिए रवाना हुए थे। कलसंग लगभग 640 किलोमीटर की लंबी शांति पदयात्रा कर रहे हैं। 

    चीन के दमनकारी कानून के विरोध में यात्रा

    लेह जाने से पहले उन्होंने मनाली में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यह यात्रा चीन के दमनकारी एथनिक यूनिटी लॉ के विरोध और तिब्बती भाषा, संस्कृति व पहचान की रक्षा, मानवाधिकारों के संरक्षण का संदेश के साथ-साथ शहीद लोब्गा रंगजेन को श्रद्धांजलि देने के लिए निकाली गई है। 

    तिब्बत की सांस्कृतिक पहचान को बचाना लक्ष्य

    उन्होंने कहा कि वह अटल टनल रोहतांग होकर केलंग, जिसपा, दारचा, बारालाचा, सरचू और उपशी सहित विभिन्न स्थानों से होकर लेह पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य तिब्बत की सांस्कृतिक पहचान, भाषा और धर्म पर मंडराते खतरे के प्रति जागरूकता फैलाना है।

    यूएन के सामने आत्मदाह करने वाले रंगजेन को नमन

    साथ ही न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के सामने आत्मदाह करने वाले कार्यकर्ता पावो लोब्गा रंगजेन के बलिदान को नमन करना है। इससे पहले मनाली पहुंचने पर भारत-तिब्बत मैत्री संघ, कुल्लू-मनाली के पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया।

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