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ड्रोन बनेगा आंखें और रोबोट कदम, IIT मंडी के शोधार्थियों ने तैयार किया भविष्य का रक्षक; आपदा में कम होगा जोखिम

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Mon, 03 Aug 2026 03:21 PM (IST)

आईआईटी मंडी के शोधार्थियों ने एक ड्रोन और चार पैरों वाले रोबोट का संयोजन विकसित किया है, जो आपदाग्रस्त या खतरनाक इलाकों में बिना इंसानी जोखिम के सटीक जानकारी जुटाएगा।

आईआईटीम मंडी के प्रोफेसर डा. अमित शुक्ला व इनके द्वारा तैयार किया गया मॉडल।

आईआईटीम मंडी के प्रोफेसर डा. अमित शुक्ला व इनके द्वारा तैयार किया गया मॉडल।

HighLights

  1. ड्रोन और रोबोट की जुगलबंदी से आपदा में जोखिम कम।

  2. ड्रोन आंखें बनकर रोबोट को दुर्गम रास्तों पर निर्देशित करेगा।

  3. एमपीपीएफ एल्गोरिदम से रोबोटिक जोड़ी सुरक्षित रास्ता चुनेगी।

हंसराज सैनी, मंडी। भूकंप या भूस्खलन की विनाशकारी आपदा हो, गहरी खदानें या किसी केमिकल प्लांट में जहरीली गैस का रिसाव, ऐसे जोखिम भरे हालात में इंसान को भेजे बिना अंदर की सटीक जानकारी पाना हमेशा चुनौती रहा है। लेकिन अब आइआइटी मंडी के शोधार्थियों ने इस चुनौती को मात देते हुए रोबोटिक्स की दुनिया में इतिहास रच दिया है। संस्थान के शोधार्थियों ने एक ड्रोन और चार पैरों वाले (क्वाड्रापेडल) रोबोट की ऐसी जुगलबंदी तैयार की है जो किसी भी दुर्गम, ऊबड़-खाबड़ और खतरनाक रास्ते को मिनटों में पार कर सकती है। ऐसे मामलों में ड्रोन आंखें, जबकि रोबोट कदम बनेंगे।

आपदा में कम होगा जोखिम

खतरनाक खदानों और आपदा वाली जगह जान जोखिम में डाले बिना निगरानी हो सकेगी। मौत का खौफ नहीं होगा और न भटकने का डर सताएगा। जमीन पर चलने वाले रोबोट्स के साथ सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि उनके देखने की क्षमता सीमित होती है। सामने कोई ऊंची दीवार, बड़ा पत्थर या खाई आते ही वे भ्रमित हो जाते हैं। 

ड्रोन, रोबोट की आंखें बनकर काम करेगा

आइआइटी मंडी की इस तकनीक में ड्रोन, रोबोट की आंखें बनकर काम करता है। ड्रोन में लगे हाईटेक आरजीबी-डी कैमरे और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हवा से ही पूरे इलाके का 3डी मैप तैयार कर लेते हैं। वह रास्ते में बिखरे पत्थरों, सीढ़ियों, दलदल या रेत की पहचान कर जमीन पर चल रहे रोबोट को तुरंत रियल-टाइम निर्देश भेजता है। निर्देश मिलते ही रोबोट बिना रुके अपनी चाल और रास्ता खुद बदल लेता है।

शोधार्थियों ने कैसे किया विकसित

इस खोज का असली हीरो शोधार्थियों द्वारा विकसित किया गया मोबाइल प्रोब पोटेंशियल फील्ड (एमपीपीएफ) एल्गोरिदम है। आमतौर पर आटोमैटिक रोबोट्स मुश्किल रास्तों में जाकर किसी मोड़ या भूलभुलैया जैसी जगह पर अटक जाते हैं। 

शोधार्थियों ने मूविंग सरफेस चार्ज माडल का इस्तेमाल कर इस समस्या का स्थायी हल निकाल लिया है। अब यह रोबोटिक जोड़ी महज 0.025 सेकंड (एक सेकंड का 40वां हिस्सा) में अपना सुरक्षित रास्ता चुन लेती है। लैब टेस्ट के दौरान इसने सीढ़ियों, पथरीले रास्तों और रेत को बिना किसी झटके के बेहद आसानी से पार किया। 

इस टीम की सफलता

आइआइटी मंडी के सेंटर फार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स के प्रो. अमित शुक्ला के नेतृत्व में शोधार्थी दर्शन कुमार प्रजापति, अंकित मेहरा, पुष्कर कुमार, आशीष राणा और एसके सूर्याप्रकाश की टीम ने यह कामयाबी हासिल की है। यह शोध प्रतिष्ठित इंटरनेशनल जर्नल आइईईई एक्सेस में प्रकाशित हुआ है। टीम ने पेटेंट के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है।

खदानों, आयल रिफाइनरी, कंस्ट्रक्शन साइट्स और न्यूक्लियर प्लांट में इंसानी जान जोखिम में डाले बिना 24 घंटे निगरानी करना बहुत चुनौतीपूर्ण है। ड्रोन और रोबोट की यह जोड़ी आपदा प्रबंधन और औद्योगिक सुरक्षा में गेम चेंजर साबित होगी।
-प्रो. डा. अमित शुक्ला, आइआइटी मंडी।

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