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नींद की झपकी आते ही स्टीयरिंग में होगी वाइब्रेशन, जागो की आवाज भी आएगी; IIT मंडी के शोधार्थियों ने तैयार किया सेफ डैश

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Tue, 02 Jun 2026 12:10 PM (IST)Updated: Tue, 02 Jun 2026 12:45 PM (IST)

आईआईटी मंडी के शोधार्थियों ने 'सेफ डैश' नामक एक रियल-टाइम ड्राइवर ड्रोसिनैस डिटेक्शन सिस्टम विकसित किया है। यह प्रणाली ड्राइवर ...और पढ़ें

आईआईटी मंडी के शोधार्थियों की ओर से तैयार किया गया सेफ डैश।

आईआईटी मंडी के शोधार्थियों की ओर से तैयार किया गया सेफ डैश।

HighLights

  1. आईआईटी मंडी ने बनाया 'सेफ डैश' सिस्टम।

  2. ड्राइवर की नींद का रियल-टाइम पता लगाता है।

  3. स्टीयरिंग कंपन और आवाज से करता है अलर्ट।

हंसराज सैनी, मंडी। अकसर समाचारों में सुनने को मिलता है कि ड्राइवर को नींद आने के कारण बस या ट्रक अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। मानवीय भूल और थकान के कारण होने वाले इन घातक सड़क हादसों को रोकने के लिए आइआइटी मंडी के स्कूल आफ कंप्यूटिंग एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के शोधार्थियों ने एक अनूठा समाधान खोज निकाला है।

शोधार्थियों की टीम ने सेफ डैश नामक एक रियल-टाइम ड्राइवर ड्रोसिनैस (नींद) डिटेक्शन सिस्टम तैयार किया है, जो ड्राइवर के पलक झपकते ही सक्रिय हो जाता है।

तकनीक का बेजोड़ संगम

आमतौर पर माना जाता है कि ऐसी उच्च तकनीक केवल मर्सिडीज या बीएमडब्ल्यू जैसी करोड़ों रुपये की कारों में ही संभव है। लेकिन आइआइटी मंडी के शोधार्थियों ने इसे साधारण ट्रकों और बसों के लिए भी किफायती बना दिया है। सेफ डैश महज एक कैमरा नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) और एज कंप्यूटिंग का एक सशक्त मॉडल है।

IIT Mandi Scholar

आईआईटी मंडी के शोधार्धियों की टीम। 

कैसे काम करता है सेफ डैश

वाहन के डैशबोर्ड पर स्थापित होने वाला यह सिस्टम मुख्य रूप से तीन घटकों पर काम करता है। इसमें लगा एक स्टैंडर्ड वेबकैम निरंतर ड्राइवर के चेहरे को स्कैन करता है। सिस्टम का दिमाग कहा जाने वाला एनवीडिया जेटसन नैनो प्रोसेसर बिना इंटरनेट के ही वाहन के भीतर डेटा को प्रोसेस करता है। मीडिया पाइप तकनीक के जरिए यह सिस्टम ड्राइवर के चेहरे पर 468 विशिष्ट बिंदुओं को ट्रैक करता है, जिससे सिर के झुकाव और आंखों की पुतलियों की हरकतों का सटीक अंदाजा लग जाता है।

सुरक्षा की त्रिस्तरीय घेराबंदी

इस तकनीक की सबसे बड़ी खूबी इसका थ्री-स्टेज अलर्ट तंत्र है। जैसे ही सिस्टम को आभास होता है कि ड्राइवर की एकाग्रता भंग हो रही है या वह तंद्रा की स्थिति में है, यह तीन चरणों में चेतावनी जारी करता है। सबसे पहले डैशबोर्ड की स्क्रीन पर लाल रंग की चेतावनी चमकेगी, जो ड्राइवर को सचेत करेगी। यदि ड्राइवर की स्थिति नहीं सुधरती, तो सिस्टम वेकअप का तेज स्वर में वायस कमांड देता है। स्पर्श संदेश यह अंतिम और सबसे प्रभावी चरण है। स्टीयरिंग व्हील में लगे वाइब्रेशन मोटर्स जोरदार कंपन पैदा करते हैं, जिससे गहरी नींद में सो रहा ड्राइवर भी तुरंत होश में आ जाता है।

मैनेजमेंट के पास होगा पल-पल का हिसाब

शोधार्थियों ने केवल वाहन के भीतर ही नहीं, बल्कि बाहर बैठे ट्रांसपोर्ट मालिकों के लिए भी समाधान दिया है। सेफ डैश के माध्यम से प्रबंधक कहीं से भी ड्राइवर की थकान का विश्लेषण कर सकते हैं। पिछले 24 घंटों में ड्राइवर कितनी बार थका हुआ पाया गया। यदि ड्राइवर बार-बार लापरवाही बरतता है, तो सिस्टम स्वतः मैनेजमेंट को ईमेल अलर्ट भेज देता है। सिस्टम में रेडिस तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो डेटा को तेजी से प्रोसेस कर ग्राफ और चार्ट के रूप में प्रदर्शित करती है।

किफायती और भविष्य की राह

शोधार्थी नवदीप सिंह, श्रियांश गुप्ता, वंश गोयल,तनिष्क गुप्ता, रोहन अग्रवाल, नवेद्या गोयल, ओजस मोरे और हिमांशी का कहना है कि सेफ डैश को एक मजबूत ब्लैक एक्रिलिक केस में सुरक्षित किया है, जो पहाड़ों के पथरीले रास्तों पर भी सुरक्षित रहता है। वर्तमान में टीम इसे इंफ्रारेड (आइआर) कैमरों से लैस करने पर काम कर रही है ताकि रात के घने अंधेरे और बिना लाइट के भी यह उतनी ही सटीकता से जान बचा सके। शोधार्थियों ने इस तकनीक के पेटेंट के लिए आवेदन किया है।

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