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'जनता का 30 से 40 प्रतिशत पैसा गलत हाथों में', कंगना रनौत ने सिस्टम पर उठाए सवाल; सख्त नियमों की जरूरत

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Sat, 05 Sep 2026 02:14 PM (IST)Updated: Sat, 05 Sep 2026 03:11 PM (IST)

मंडी में दिशा बैठक के दौरान सांसद कंगना रनौत ने विकास कार्यों में देरी और फर्जीवाड़े पर अधिकारियों को जमकर ...और पढ़ें

मंडी में दिशा की बैठक की अध्यक्षता करतीं सांसद कंगना रनौत। जागरण

मंडी में दिशा की बैठक की अध्यक्षता करतीं सांसद कंगना रनौत। जागरण

HighLights

  1. कंगना ने विकास कार्यों में देरी, फर्जीवाड़े पर अधिकारियों को लताड़ा।

  2. जनता का 30-40% पैसा गलत हाथों में फंसा बताया।

  3. सख्त नियम बनाने, काम न करने पर वसूली के निर्देश।

जागरण संवाददाता, मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला मुख्यालय स्थित उपायुक्त कार्यालय सभागार में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में सांसद कंगना रनौत का कड़ा रुख देखने को मिला। सांसद निधि (एमपीलैड) के तहत आवंटित धन के बावजूद विकास कार्यों में हो रही देरी और फर्जीवाड़े पर उन्होंने अधिकारियों को जमकर लताड़ लगाई। 

कंगना ने दो टूक शब्दों में कहा कि जनता के पैसे पर कुंडली मारकर बैठने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और ऐसे तत्वों को हमेशा के लिए ब्लैकलिस्ट किया जाए। कंगना रनौत ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि लगभग 30 से 40 प्रतिशत पैसा गलत लोगों के पास फंसा हुआ है। 

लोग बिना एनओसी और जमीन के औपचारिकता पूरी किए भाईचारे के आधार पर 5-10 दस्तखत कराकर राशि ले जाते हैं और वर्षों तक कोई काम नहीं करते। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि इसके लिए सख्त नियम व कानूनी प्रक्रिया तय की जाए। 

तय समय सीमा में काम न करने पर हो कार्रवाई

कंगना ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति समयसीमा के भीतर काम शुरू नहीं करता, तो उससे राशि वापस वसूली जाए और उस पर जुर्माना लगाया जाए ताकि जरूरतमंदों का हक न मारा जाए।

खोखले दावों और 'जुमलों' से काम नहीं चलेगा

कंगना ने अधिकारियों द्वारा दी जा रही प्रगति रिपोर्ट पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि दिशा की बैठकों में केवल खोखले दावे और 'जुमले' पेश किए जा रहे हैं। जब स्वतंत्र एजेंसियों से जांच कराई जाती है, तो धरातल पर काम 50 प्रतिशत भी पूरा नहीं मिलता। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि जिन एजेंसियों या व्यक्तियों का कार्य 20, 40 या 50 प्रतिशत तक ही हुआ है, उनकी विस्तृत सूची और कार्ययोजना (प्रूफ प्लान) तत्काल प्रस्तुत की जाए।

समीक्षा नहीं, धरातल पर काम की रिपोर्ट चाहिए

उन्होंने स्पष्ट किया कि अब समीक्षा का समय बीत चुका है, धरातल पर ठोस परिणाम और काम पूरा होने की रिपोर्ट चाहिए। बैठक में जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

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