कंगना रनौत ने दिखाए 'हिमाचली ठाठ', 45 हजार का देसी कोट पहन पहुंचीं संसद; दो महिलाओं ने 60 दिनों में किया तैयार
मंडी सांसद कंगना रनौत संसद में हस्तनिर्मित हिमाचली ऊनी कोट पहनकर पहुंचीं। यह कोट कुल्लवी व्हिम्स संस्था की दो महिला कारीगरों ने दो महीने में तैयार किय ...और पढ़ें

कैप्शन: संसद में कुछ इस अंदाज में नजर आईं सांसद कंगना रनौत (सोसळ मीडिया फोटो)

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अभिषेक शर्मा, पतलीकूहल। हस्तकला के लिए वीरवार को ऐतिहासिक क्षण आया जब मंडी की सांसद कंगना रनौत हस्तनिर्मित शुद्ध ऊनी हिमाचली कोट पहनकर संसद में पहुंची।
देसी ऊन से तैयार कोट कुल्लू की महिला कारीगरों ने पारंपरिक विधि (हथकरघा) से काता और बुना है, जो हिमाचल की समृद्ध वस्त्र परंपरा को आधुनिक शैली में दर्शता है।
पूरी तरह प्राकृतिक रंगों और हस्त प्रक्रियाओं से निर्मित यह वस्त्र हिमालय की गर्माहट, उल्लास और परतदार रंगों को समेटे हुए है। कोट हिमाचल की संस्कृति, भूगोल और लोगों की आत्मा को दर्शाता है जहां परंपरा और स्थान एक-दूसरे में बुने हुए हैं।
कुल्लवी व्हिम्स संस्था की दो महिला कारीगरों ने यह कोट बनाया था। संस्था के संस्थापक भृगु राज आचार्य और निशा सुब्रमण्यम ने बताया कि इस कोट को बनाने में लगभग दो माह लगे हैं।
कीमत 16 हजार रुपये
यह परिधान संसद जैसे राष्ट्रीय मंच पर पहना जाना महिला कारीगरों के लिए विशेष सम्मान है। सासंद कंगना रनौत ने 2025 में कुल्लवी व्हिम्स संस्था के स्टूडियो में आकर चार कोट और एक पठंचू खरीदा था। एक कोट की कीमत 16 हजार से शुरू होकर 45 हजार रुपये तक है। कंगना के कोट को दो महिला कारीगरों ने तैयार किया है। इस परिधान में शुद्ध उन का इस्तेमाल व वेजिटेबल कलर का उपयोग किया गया है।
2014 में शुरू हुई थी यह संस्था
भृगुराज ने बताया कि कुल्लवी व्हिम्स संस्था 2014 में शुरू की गई। शुरुआती दौर में संस्था में छह महिला कारीगर थी, परंतु आज 400 महिला कारीगर संस्था से जुड़ी हैं। इन हस्तनिर्मित परिधानों की मांग अमेरिका, यूके, जापान और आस्ट्रेलिया में भी है। उनके मुताबिक कुल्लवी व्हिम्स संस्था हिमाचल में स्वदेशी ऊन परंपराओं के पुनरुद्धार और महिलाओं के लिए सम्मानजनक रोजगार सृजन पर कार्यरत है।