कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर और सुगम होगा सफर, 2 KM लंबी टनल से दौड़ेंगे वाहन; झलोगी सुरंग की अलाइनमेंट बदलेगी
कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर दयोड़ और हणोगी की बाईं तट की सुरंगें अगले तीन माह में यातायात के लिए खुल जाएंगी, जिससे सफर और सुगम होगा।

मनाली फोरलेन पर दो और टनल से सफर शुरू होगा। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
दयोड़ और हणोगी की बाईं तट सुरंगें तीन माह में खुलेंगी।
मंडी से कुल्लू जाने वाले वाहन बाईं सुरंगों का उपयोग करेंगे।
झलोगी सुरंग की अलाइनमेंट में बदलाव कर नया पोर्टल बनेगा।
विशाल वर्मा, पंडोह (मंडी)। कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर सफर करने वाले वाहन चालकों को जल्द बड़ी राहत मिलेगी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने दयोड़ और हणोगी में बनी बायें तट की दोनों सुरंगों को यातायात के लिए खोलने का निर्णय लिया है। इन दोनों सुरंगों को आगामी तीन माह के भीतर पूरी तरह तैयार कर जनता को समर्पित कर दिया जाएगा।
करीब एक माह पहले ही दायें तट की सुरंगों को यातायात के लिए खोला गया था, जहां से फिलहाल दोनों तरफ के वाहन आवाजाही कर रहे हैं। बायें तट की इन सुरंगों के शुरू होने के बाद यातायात व्यवस्था और अधिक सुव्यवस्थित हो जाएगी।
योजना के तहत मंडी से कुल्लू की ओर जाने वाले वाहन बायें तट की सुरंगों से गुजरेंगे, जबकि कुल्लू से मंडी की तरफ आने वाले वाहन दायें तट की सुरंग का उपयोग करेंगे।
2 किलोमीटर और 400 मीटर लंबी सुरंगें
दयोड़ सुरंग की लंबाई करीब दो किलोमीटर है, जबकि हणोगी सुरंग लगभग 400 मीटर लंबी है। इन सुरंगों से यातायात शुरू होने के बाद सफर और सुगम हो जाएगा।
अधिकारियों ने दिया अंतिम रूप
सोमवार को एनएचएआइ के वरिष्ठ अधिकारियों ने निर्माण करने वाली कंपनी और विशेष विशेषज्ञों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक कर इन तैयारियों को अंतिम रूप दिया।
झलोगी टनल की अलाइनमेंट में बदलाव होगा
बैठक के दौरान वर्ष 2025 की भीषण प्राकृतिक आपदा में क्षतिग्रस्त हुई झलोगी सुरंग के भविष्य को लेकर भी गहन विचार-विमर्श किया गया। आपदा के समय पहाड़ दरकने से इस सुरंग का पोर्टल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और अंदरूनी हिस्सों को भी नुकसान पहुंचा था। बार-बार होने वाले भूस्खलन के खतरे को देखते हुए विशेषज्ञों ने इसकी अलाइनमेंट में बदलाव करने की सलाह दी है। इसके तहत अब वर्तमान स्थान से करीब 150 मीटर की दूरी पर थलौट की ओर नया पोर्टल बनाया जाएगा।
विशेषज्ञ दल करेगा निरीक्षण
आपदा के कारण सुरंग के भीतर हुई क्षति का सटीक आकलन करने के लिए विशेषज्ञों का एक विशेष दल जल्द ही सुरंग का अंदर से निरीक्षण करेगा। इन सभी सुधार कार्यों के पूरा होने से फोरलेन पर सफर न केवल सुरक्षित होगा, बल्कि यात्रियों के समय की भी बचत होगी।