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    CAG Report: हिमाचल प्रदेश में आपदा राहत कोष के उपयोग में बड़ी गड़बड़ी, वन विभाग में भी अनियमितताएं आई सामने

    By Anil Thakur Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Mon, 30 Mar 2026 07:09 PM (IST)

    हिमाचल प्रदेश में राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) के उपयोग में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। कैग रिपोर्ट ...और पढ़ें

    मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा में कैग रिपोर्ट रखी।

    मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा में कैग रिपोर्ट रखी।

    राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश में राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) के उपयोग को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। वर्ष 2019-20 से 2022-23 की अवधि की अनुपालन लेखापरीक्षा में खुलासा हुआ है कि निधियों का उपयोग तय दिशा निर्देशों के अनुसार नहीं किया गया।

    रिपोर्ट के अनुसार आपदा राहत जैसी संवेदनशील व्यवस्था में वित्तीय प्रबंधन और निगरानी की गंभीर कमी रही, जिससे राहत कार्यों में देरी और संसाधनों का दुरुपयोग हुआ।

    मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने सोमवार को विधानसभा में यह रिपोर्ट रखी। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2019-20 में एसडीआरएफ के दुरुपयोग के कारण केंद्र सरकार ने 258.30 करोड़ में से 61.07 करोड़ की राशि रोक दी। इसके बावजूद 2019 से 2023 के दौरान भी गड़बड़ियों का सिलसिला जारी रहा। 

    सहायता मिलने में हुई देरी, केंद्र ने की कटौती

    लेखापरीक्षा में पाया गया कि 2020-22 के दौरान एसडीआरएफ में भारी राशि (745.91 करोड़ और 752.79 करोड़) लंबित रही, जिसके कारण एनडीआरएफ से स्वीकृत 254.73 करोड़ जारी नहीं हो पाए। इससे राहत सहायता मिलने में 1 से 2 साल तक की देरी हुई। इसके अलावा, गलत अनुमानित शेष राशि के आधार पर केंद्र ने 61.02 करोड़ की और कटौती कर दी।

    तय निवेश साधनों में लगाने के बजाय बचत खातों में रख दी राशि

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 122.27 करोड़ की राशि को तय निवेश साधनों में लगाने के बजाय बचत खातों में रखा गया, जिससे ब्याज का नुकसान हुआ। इस नुकसान की भरपाई राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से नहीं की। नमूना जांच में जिलों में 69 से 92 प्रतिशत तक निधि उपयोग पाया गया, जबकि खंड स्तर पर यह केवल 34 से 43 प्रतिशत रहा।

    मानकों से अधिक खर्च की राशि

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कई मामलों में तय मानकों से अधिक राशि खर्च की गई और 11.76 करोड़ की लागत से ऐसे कार्य किए गए जो आपदा राहत के दायरे में नहीं आते। राहत वितरण में भी देरी देखने को मिली। 90 मामलों में उपायुक्तों द्वारा सहायता स्वीकृत करने में 11 से 33 महीने तक का समय लगा। वहीं, राज्य और जिला आपदा प्रबंधन योजनाओं को नियमित रूप से अपडेट नहीं किया गया और कई जिलों में आपदा प्रबंधन दल तक गठित नहीं किए गए। 

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    स्टाफ की कमी

    रिपोर्ट के अनुसार राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल में भी स्टाफ की भारी कमी पाई गई। स्वीकृत 326 पदों में से केवल 193 पद भरे हुए हैं और इनमें तकनीकी कर्मियों का अभाव है। प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भी लक्ष्य पूरे नहीं हो पाए और करोड़ों रुपये की राशि अप्रयुक्त रही।

    प्रशिक्षण के लिए 6 करोड़ से खरीदे उपकरण, उपयोग हुआ ही नहीं 

    रिपोर्ट ने खरीद पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इसके तहत 6.07 करोड़ की राशि प्रशिक्षण और उपकरण खरीद के लिए जारी की गई, लेकिन इसका उपयोग नहीं किया गया। वहीं, 9,449 स्वीकृत कार्यों को प्रबंधन सूचना प्रणाली पोर्टल पर अपडेट नहीं किया गया, जिससे निगरानी प्रभावित हुई।

    वन विभाग में हुई अनियमितताएं

    वन विभाग में भी अनियमितताएं लेखापरीक्षा में वन विभाग से जुड़ी गड़बड़ियां भी सामने आई हैं। चंबा सर्कल में वन भूमि के वर्गीकरण और मूल्य निर्धारण में विसंगतियां पाई गईं, जिससे 21.33 करोड़ की संभावित कम वसूली का मामला सामने आया है।

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