हिमाचल में MIS के तहत सेब बिक्री के लिए पोर्टल पर पंजीकरण जरूरी, कौन से दस्तावेज चाहिएं व कहां होगी रजिस्ट्रेशन?
हिमाचल प्रदेश सरकार ने सेब खरीद की मंडी मध्यस्थता योजना (MIS) में पारदर्शिता लाने के लिए बागबानों का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश सरकार ने सेब खरीद के लिए ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया शुरू की है।
HighLights
सेब खरीद की MIS योजना में पंजीकरण अनिवार्य।
पंजीकरण ऐप, लोक मित्र केंद्र से सोमवार से शुरू।
बागबानों को भुगतान सीधे DBT के माध्यम से होगा।
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश ने सरकार मंडी मध्यस्थता योजना (एमआइएस) के तहत बड़ा बदलाव किया है। सेब खरीद की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने बागबानों का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। पंजीकरण की प्रक्रिया सोमवार से शुरू कर दी जाएगी। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने बीते रोज इसके लिए एप लांच की थी। बागवान स्वयं भी इस एप के माध्यम से पंजीकरण करवा सकते हैं।
इसके अलावा लोक मित्र केंद्र, बागबानी विभाग के कार्यालय व पंचायत सचिव के पास यह पंजीकरण करवा सकते हैं। पंजीकरण के लिए जमीन दस्तावेज दिखाना अनिवार्य होगा।
एमआइएस के तहत बीते साल पेश आई कथित गड़बड़ियों के बाद पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सरकार ने यह निर्णय लिया है। जिस बागवान का पंजीकरण होगा, सेब खरीद उसी से की जाएगी। इसके लिए नियम फाइनल कर दिए हैं। 20 जुलाई को होने वाली कैबिनेट मीटिंग में अंतिम फैसला होगा।
यूनिवर्सल कार्टन के बाद खरीद में दूसरा बड़ा बदलाव
राज्य सरकार का सेब खरीद के लिए यह दूसरा बड़ा बदलाव है। दो साल पूर्व राज्य सरकार ने सेब खरीद के लिए यूनिवर्सल कार्टन की व्यवस्था को लागू किया था। उस वक्त भी काफी ज्यादा विरोध हुआ था। सरकार ने यूनिवर्सल कार्टन लागू किया जिससे बागबानों को फायदा मिल रहा है। नई व्यवस्था को लागू करने का मकसद भी योजना में पारदर्शिता लाना है। बागबानों को भुगतान डीबीटी के माध्यम से किया जाएगा।
कलेक्शन सेंटर नहीं, कलस्टर बनाएगा एचपीएमसी
एचपीएमसी एमआइएस के तहत बागबानों से निम्न गुणवत्ता (सी-ग्रेड) का सेब खरीदता है। सी ग्रेड सेब को ओपन मार्केट में खरीददार नहीं मिल पाते। अभी तक सरकार पंचायत स्तर पर तीन से चार कलेक्शन सेंटर बनाती थी बागबान वहां पर अपने सेब को बेच सकते थे। इस बार सरकार ने निर्णय लिया है कि कलेक्शन सेंटरों की संख्या सीमित की जाएगी। सरकार कलस्टर बनाएगी। एक कलस्टर के अधीन तीन से चार पंचायतें आएगी। यहीं पर सेब की खरीद होगी। यानी बागबानों को अपना सेब बेचने के लिए 10 से 15 किमी की दूरी तय करनी पड़ेगी।
विभाग ने 30 बोरी का दिया प्रस्ताव, 100 हो सकती है संख्या
बागबानी विभाग ने एक बागबान से एमआइएस के तहत तीस बोरी सेब खरीदने की सीमा तय करने का प्रस्ताव भेजा है। सरकार इसे बढ़ाकर 100 बोरी प्रति बागबान कर सकती है। पूरी खरीद प्रक्रिया सीसीटीवी की निगरानी में होगी। बीते साल एचपीएमसी ने एमआइएस के तहत 100 मीट्रिक टन से अधिक सेब खरीदा था। खरीद के बाद बड़ी मात्रा में सेब सड़क किनारे खराब हो गया। इस बार इसकी संख्या सीमित की जा रही है।