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IBPS परीक्षा में प्रॉक्सी बैठाकर पा ली हिमाचल में बैंक की नौकरी, 3 साल बाद पकड़े गए; CBI ने दो कर्मियों पर की FIR

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Wed, 09 Sep 2026 11:39 AM (IST)Updated: Wed, 09 Sep 2026 01:09 PM (IST)

सीबीआई ने हिमाचल प्रदेश ग्रामीण बैंक के दो कर्मचारियों के खिलाफ फर्जी तरीके से नौकरी हासिल करने का मामला दर्ज ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश में फर्जी तरीके से बैैंक में नौकरी पाने का मामला सामने आया है। प्रतीकात्मक फोटो

हिमाचल प्रदेश में फर्जी तरीके से बैैंक में नौकरी पाने का मामला सामने आया है। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. सीबीआई ने हिमाचल ग्रामीण बैंक कर्मचारियों पर FIR दर्ज की।

  2. IBPS परीक्षा में प्रॉक्सी बैठाकर नौकरी हासिल करने का आरोप।

  3. बायोमेट्रिक पुन: सत्यापन में फर्जीवाड़ा उजागर, जांच जारी।

जागरण संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश ग्रामीण बैंक में फर्जी तरीके से नौकरी हासिल करने के आरोप में सीबीआई थाना शिमला में दो कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपित रविंद्र मीणा निवासी गांव व डाकघर टोडूपुरा, तहसील हिंडौन सिटी, जिला करौली, राजस्थान और जितेंद्र कुमार मीणा निवासी गांव व डाकघर सुंदरी, निमड़ी वाली ढाणी, तहसील बामनवास, जिला सवाई माधोपुर, राजस्थान हैं। सीबीआई ने मामले में अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और लोगों को भी आरोपित बनाया है।

एफआईआर के समय रविंद्र मीणा ग्रामीण बैंक की बगस्याड़ शाखा, जिला मंडी और जितेंद्र कुमार मीणा पांगणा शाखा, जिला मंडी में ऑफिस असिस्टेंट (मल्टीपर्पस) थे। 

परीक्षा में अपनी जगह बैठाया था और शख्स

आरोप है कि रविंद्र मीणा ने आइबीपीएस-2023 की भर्ती परीक्षा में कथित तौर पर अपनी जगह अज्ञात व्यक्ति को बैठाया। इसके आधार पर उसे ग्रामीण बैंक में आफिस असिस्टेंट पद के लिए प्रोविजनल चयन मिला और उसने 12 फरवरी 2024 को बैंक में नौकरी ज्वाइन की।

बायोमीट्रिक रिकॉर्ड से पकड़ा मामला

मामले का पता तब चला जब बाद में आइबीपीएस की ओर से करवाए बायोमीट्रिक पुन: सत्यापन में रविंद्र का बायोमीट्रिक रिकार्ड प्रारंभिक व मुख्य परीक्षा और दस्तावेज सत्यापन के दौरान दर्ज बायोमीट्रिक से मेल नहीं खाया। भर्ती रिकॉर्ड में उपलब्ध उसकी फोटो और दस्तावेज भी उसके फोटो व दस्तावेजों से मेल नहीं पाए गए।

एफआइआर के अनुसार दूसरे आरोपित जितेंद्र कुमार ने आइबीपीएस की 2022 की भर्ती परीक्षा में अपनी जगह अज्ञात प्राक्सी/इम्पोस्टर को बैठाया। इसके बाद उसने एक जुलाई 2023 को ग्रामीण बैंक में आफिस असिस्टेंट (मल्टीपर्पस) के पद पर नौकरी ज्वाइन की। 

फर्जी चयन से पाया वेतन व अन्य लाभ

सीबीआइ के मुताबिक फर्जी चयन के आधार पर दोनों ने वेतन और अन्य सेवा लाभ प्राप्त किए। रविंद्र मीणा तीन फरवरी 2026 तक सेवा में रहा। इस दौरान उसे वेतन और अन्य भत्तों के रूप में करीब 11.10 लाख रुपये मिले। उसने बैंक से तीन लाख रुपये का ऋण भी लिया, जिसमें से करीब 2.28 लाख रुपये बकाया बताया है।

जितेंद्र कुमार भी तीन फरवरी 2026 तक बैंक की सेवा में रहा। उसे वेतन व अन्य भत्तों के रूप में करीब 14.46 लाख रुपये मिले। उसके नाम पर पांच लाख और तीन लाख रुपये के दो ऋण भी होने का उल्लेख एफआइआर में है। इन ऋण में करीब 7.45 लाख रुपये बकाया रहने की बात कही है। 

बिलासपुर और सोलन के दो संस्थानों का उल्लेख

एफआइआर में घटना से जुड़े स्थानों में शिवा इंस्टीट्यूट आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलाजी चांदपुर (बिलासपुर) और एलआर इंस्टीट्यूट आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलाजी ओच्छघाट (सोलन) का उल्लेख है। सीबीआई मामले की जांच कर रही है।

हिमाचल में फर्जी प्रमाणपत्र से नौकरी के कुछ मामले

  • प्रदेश के शिमला, मंडी व कांगड़ा जिलों में डाक विभाग में फर्जी दस्तावेजों से नौकरी हासिल करने के कई मामले सामने आए
  • मंडी जिला के गोहर उपमंडल के एक युवक पर फर्जी आइआरडीपी प्रमाणपत्र से नौकरी हासिल करने का आरोप है। विजिलेंस जांच कर रही है।
  • हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) में नियुक्त सहायक प्रोफेसर डा. विजय सिंह पर फर्जी प्रमाणपत्र से नौकरी लेने के आरोप में पुलिस थाना बालूगंज में मामला दर्ज।
  • शिक्षा विभाग में बैचवाइज आधार पर हुई टीजीटी मेडिकल भर्ती 2024 में चार अभ्यर्थी विजिलेंस के संदेह के घेरे में आए। इन्होंने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज बनाकर मेरिट सूची में स्थान हासिल किया था। विजिलेंस जांच कर रही है। 
  • सरकाघाट के व्यक्ति विवेक शर्मा ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का फर्जी सर्टिफिकेट तैयार कर आयुर्वेद विभाग में आयुर्वेदिक डाक्टर की सरकारी नौकरी हासिल कर ली थी।  विजिलेंस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। 
  • हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड लिमिटेड में जूनियर हेल्पर ने सेंट्रल बोर्ड आफ हायर एजुकेशन नामक गैर-मान्यता प्राप्त बोर्ड से जारी 10वीं के प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी प्राप्त कर ली थी। बिजली बोर्ड ने सेवा समाप्त कर दी। 


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