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हिमाचल प्रदेश के तीन बांधों में धंसाव और दरारें मिलीं, सुरक्षा में बड़ी चूक; मानसून में सबसे ज्यादा खतरा

By Parkash Bhardwaj Edited By: Rajesh Sharma
Published: Thu, 03 Sep 2026 06:01 PM (IST)Updated: Thu, 03 Sep 2026 06:16 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश के 15 चालू बांधों के निरीक्षण में तीन बांधों में गंभीर सुरक्षा खामियां पाई गई हैं, जिनमें धंसाव, दरारें और अधूरे कार्य शामिल हैं।

हिमाचल प्रदेश के तीन बांधों की सुरक्षा में चूक पाई गई है। प्रतीकात्मक फोटो

हिमाचल प्रदेश के तीन बांधों की सुरक्षा में चूक पाई गई है। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. गिरी जटोन बैराज में धंसाव और संरचनात्मक दरारें मिलीं।

  2. मलाणा-2 में अतिरिक्त स्पिलवे और गेट का काम अधूरा।

  3. मलाणा-1 में मरम्मत जारी, फ्लैश फ्लड से आर्थिक नुकसान।

राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश में बांधों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राज्य बांध सुरक्षा संगठन (एसडीएसओ) की वार्षिक रिपोर्ट ने चिंता बढ़ाने वाली तस्वीर सामने रखी है। प्रदेश के 15 चालू बांधों के प्री-मानसून और पोस्ट-मानसून निरीक्षण में गिरी जटोन बैराज, मलाणा-2 और मलाणा-1 को कैटेगरी-दो में रखा गया है। गिरी जटोन में एक पियर के एक्सपेंशन ज्वाइंट पर धंसाव, निगरानी का इंस्ट्रूमेंट खराब, डाउनस्ट्रीम सुरक्षा कार्यों में कटाव और कई जगह कंक्रीट ब्लाक व कर्टन वाल खिसकने के साथ संरचनात्मक दरारें मिली हैं।

दूसरी ओर मलाणा-2 का अतिरिक्त स्पिलवे और रेडियल गेटों के हाइड्रोलिक होइस्ट का काम अभी पूरा नहीं हुआ है। मलाणा-1 में बैलेंसिंग रिजर्वायर की रिटेनिंग वाल समेत कई हिस्सों की मरम्मत और पुनर्वास कार्य जारी हैं। 

सीएम ने प्रस्तुत की बांध सुरक्षा की वार्षिक रिपोर्ट 

मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने वीरवार को विधानसभा में बांध सुरक्षा की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 प्रस्तुत की। रिपोर्ट के अनुसार एसडीएसओ के अधिकार क्षेत्र में 17 निर्दिष्ट बांध हैं, जिनमें 15 चालू और दो निर्माणाधीन हैं। 15 चालू बांधों के दोनों चरणों के निरीक्षण में तीन कैटेगरी-दो और 11 कैटेगरी-तीन में रहे। अधिकांश बांध संतोषजनक पाए गए, लेकिन तीन बांधों में मिली कमियों के कारण इनके लिए लगातार निगरानी और समयबद्ध सुधारात्मक कार्रवाई जरूरी बताई गई है।

गिरी जटोन में धंसाव से लेकर दरार तक

गिरी जटोन बैराज की स्थिति रिपोर्ट में सबसे अधिक ध्यान खींचती है। निरीक्षण में एक बैराज पियर के एक्सपेंशन ज्वाइंट पर डिफरेंशियल सेटलमेंट यानी असमान धंसाव के साक्ष्य मिले। इसकी निगरानी के लिए लगाया गया इंस्ट्रूमेंट फिलहाल काम नहीं कर रहा है। इसके अलावा डाउनस्ट्रीम प्रोटेक्शन कार्यों में कटाव मिला। कई जगह कंक्रीट ब्लॉक और कर्टन वाल खिसके अथवा अपनी जगह से हटे पाए गए। संरचनात्मक हिस्सों में दरारें भी दर्ज की गई हैं। रिपोर्ट ने इनके उपचार के साथ क्लोज मॉनिटरिंग की जरूरत बताई है। इमरजेंसी वार्निंग सिस्टम के अनुपालन की रिपोर्ट भी लंबित है।

मलाणा-2 में स्पिलवे का काम जुलाई 2027 तक

मलाणा-2 जलविद्युत परियोजना में अतिरिक्त स्पिलवे का निर्माण और डैम के रेडियल गेटों के हाइड्रोलिक होइस्ट को बदलने का काम लंबे समय से लंबित है। रिपोर्ट के अनुसार अतिरिक्त स्पिलवे का पूरा होना बाढ़ के पानी को संभालने की क्षमता और परियोजना की समग्र सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। अतिरिक्त अनगेटेड स्पिलवे का निर्माण जारी है और इसकी अपेक्षित पूर्णता जुलाई 2027 दी गई है। इसी वजह से मलाणा-2 को कैटेगरी-दो में रखा गया है।

मलाणा-1: फ्लैश फ्लड ने खोली सुरक्षा की पोल

मलाणा-1 में भी सुरक्षा और मरम्मत से जुड़े काम जारी हैं। बैलेंसिंग रिजर्वायर की रिटेनिंग वाल की मरम्मत एवं पुनर्वास चल रहा है। क्षतिग्रस्त ब्लाक और डायवर्जन चैनल के पुनर्निर्माण का काम भी जारी है, जिसकी अपेक्षित पूर्णता 31 दिसंबर 2026 दी गई है।इस बांध में एक अगस्त 2025 को फ्लैश फ्लड की घटना भी हुई थी। करीब चार घंटे चली इस घटना के दौरान 100 से 150 क्यूमेक पानी छोड़ा गया। डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में कृषि भूमि प्रभावित हुई। हालांकि कोई जनहानि, पशुधन हानि या विस्थापन नहीं हुआ, लेकिन रिपोर्ट में आर्थिक नुकसान का अनुमान 200 से 400 करोड़ रुपये लगाया गया है। 

घटना के बाद पुनर्स्थापना कार्य जारी है और उपचारात्मक कार्यों पर करीब 200 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी दी गई है।रिपोर्ट के अनुसार घटना का कारण ब्लाक फाउंडेशन के पीछे स्कॉरिंग था। घटना के दौरान स्पिलवे और गेट खुले थे। आपात कार्रवाई योजना (ईएपी) सक्रिय कर डाउनस्ट्रीम आबादी को चेतावनी दी गई थी।

15 में 12 बांधों में बड़ी कमी नहीं

एसडीएसओ के अधिकार क्षेत्र में कुल 17 निर्दिष्ट बांध हैं। इनमें 15 पूर्ण और संचालन में हैं, जबकि दो निर्माणाधीन हैं। निरीक्षण में 12 बांधों में कोई बड़ी कमी दर्ज नहीं की गई। लारजी, बाजोली होली, करचम, बास्पा-II, अल्लाइन, बुधिल, सैंज, सावड़ा कुड्डू, चांजू-I, न्यूगल और कुटेहर समेत 11 बांध कैटेगरी-तीन में रहे। वहीं गिरी जटोन, मलाणा-II और मलाणा-I को कैटेगरी-दो में रखा गया।

इंस्ट्रूमेंटेशन में भी खामी, एक बांध में निगरानी ठप

बांधों की सुरक्षा निगरानी में इंस्ट्रूमेंटेशन अहम भूमिका निभाता है। इससे सीपेज, डिफार्मेशन, अपलिफ्ट प्रेशर और बांध के व्यवहार में बदलाव का समय रहते पता चलता है। रिपोर्ट के अनुसार 11 बांधों में इंस्ट्रूमेंटेशन पूरी तरह स्थापित और कार्यशील है। एक बांध में इंस्ट्रूमेंटेशन स्थापित तो है, लेकिन काम नहीं कर रहा। तीन बांधों में आंशिक इंस्ट्रूमेंटेशन है। हालांकि किसी बांध में यह व्यवस्था पूरी तरह अनुपस्थित नहीं है।

15 में सिर्फ तीन बांधों की व्यापक सुरक्षा जांच पूरी

कॉम्प्रिहेंसिव डैम सेफ्टी इवैल्यूएशन (सीडीएसई) की स्थिति भी पूरी तरह संतोषजनक नहीं है। 15 चालू बांधों में से 11 के लिए इंडिपेंडेंट पैनल ऑफ एक्सपर्ट नियुक्त किए गए हैं। कुल 13 विशेषज्ञ पैनल का उल्लेख है। इसके बावजूद सिर्फ तीन बांधों की सीडीएसई रिपोर्ट पूरी हुई है, छह की रिपोर्ट पर काम चल रहा है और छह बांधों की सीडीएसई अभी शुरू नहीं हुई है।

बांध सुरक्षा संगठन में तकनीकी स्टाफ की कमी

रिपोर्ट में समर्पित तकनीकी स्टाफ की कमी को भी बड़ी चुनौती माना गया है। एसडीएसओ मुख्य रूप से ऊर्जा निदेशालय के अधिकारियों-कर्मचारियों से काम चला रहा है, जिन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारियां दी गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार विशेषज्ञों की कमी का असर निरीक्षण, तकनीकी मूल्यांकन, अनुपालन की निगरानी और आपात तैयारी पर पड़ सकता है।

मानसून में सबसे ज्यादा खतरा

हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियां बांध सुरक्षा के लिहाज से चुनौतीपूर्ण हैं। क्लाउडबर्स्ट, फ्लैश फ्लड, ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड, भूस्खलन, भूकंप और अत्यधिक बारिश जैसी घटनाएं बांधों पर अतिरिक्त दबाव डालती हैं। दुर्गम क्षेत्रों में खराब मौसम के कारण नियमित निरीक्षण और आपात प्रतिक्रिया भी कठिन हो जाती है। इसी कारण एसडीएसओ ने मानसून के दौरान 24 घंटे निगरानी, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और जिला प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय पर जोर दिया है।

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