हिमाचल में जानलेवा बना नशा: तीन साल में ओवरडोज से 66 लोगों ने गंवाई जान, चिट्टा तस्करी का आंकड़ा चौंका रहा
हिमाचल प्रदेश में पिछले तीन सालों (2023-जनवरी 2026) में नशे की ओवरडोज से 66 लोगों की मौत हुई है। इस अवधि में 6246 नशा संबंधित मामले दर्ज हुए, जिनमें स ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश में चिट्टे की ओवरडोज से तीन साल में 66 लोगों की जान गई। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
पिछले तीन साल में 66 लोगों की ओवरडोज से मौत।
6246 नशा संबंधित मामले दर्ज, 5298 आरोपितों को जमानत।
सरकार ने नशा रोकने को NDPS एक्ट कार्रवाई तेज की।
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश में नशा जानलेवा बन गया है। हिमाचल में पिछले तीन सालों में नशे की ओवरडोज से 66 लोगों की मौत हुई है। विधायक जीत राम कटवाल व प्रकाश राणा के प्रश्न के लिखित उत्तर में राज्य सरकार ने सदन में यह जानकारी दी। यह आंकड़ा वर्ष 2023 से 31 जनवरी 2026 तक का है।
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में 8, वर्ष 2024 में 31 और वर्ष 2025 में 27 मौतें दर्ज की गई हैं। इस अवधि में नशे से संबंधित 6246 मामले दर्ज किए गए। इनमें से 5684 मामलों में चालान न्यायालय भेजे गए, जबकि 108 मामलों में सजा और 139 मामलों में आरोपित बरी हुए हैं।
कोर्ट में मामले लंबित
वर्तमान में 5437 मामले न्यायालय में लंबित हैं। 486 मामले अन्वेषणधीन है। 19 मामले में रद रिपोर्ट व 57 मामलों में अनट्रेस है।
टोल-फ्री नंबर 112 जारी किया
राज्य सरकार ने बताया कि नशे के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई तेज की है। तस्करों की संपत्तियां जब्त की जा रही हैं और पुलिस थानों में अलग निगरानी रजिस्टर बनाए गए हैं। नशा रोकथाम के लिए सरकार ने टोल-फ्री नंबर 112, “नशामुक्त हिमाचल” मोबाइल ऐप, विशेष सर्च अभियान, और केमिस्ट दुकानों की जांच जैसे कदम उठाए हैं। वहीं, पुनर्वास के लिए प्रदेश में नशा मुक्ति केंद्र और “दिशा केंद्र” भी संचालित किए जा रहे हैं।
चिट्टे में 5 ग्राम से कम मात्रा पर मिलती है जमानत
राज्य सरकार ने बताया कि नियमों के तहत चिट्टे के 5 ग्राम तक के मामले में उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार बीएनएस धारा 35 (3) के प्रविधान के अनुसार आरोपितों को जमानत दी जाती है। मध्यवर्ती मात्रा जो 5 ग्राम से अधिक व 250 ग्राम से कम है और वाणिज्यिक मात्रा जो 250 ग्राम व इससे अधिक है में विशेष परिस्थिति में जमानत दी जाती है। चिट्टा जैसे नशे के मामलों में वृद्धि चिंता का विषय है, लेकिन कानूनी प्रविधानों के तहत सख्ती से कार्रवाई की जा रही है। पिछले तीन वर्षों में 5298 आरोपितों को जमानत भी मिली है।