चिट्टे के मामलों में संलिप्त आरोपी नहीं लड़ पाएंगे पंचायत चुनाव, हिमाचल सरकार ने उठाया सख्त कदम
हिमाचल सरकार चिट्टे के मामलों में संलिप्त आरोपियों को पंचायत चुनाव लड़ने से रोकने के लिए सख्त कदम उठा रही है। 19 जनवरी को कैबिनेट में इस संबंध में प्र ...और पढ़ें

चिट्टे के मामले में संलिप्त आरोपित नहीं लड़ पाएंगे चुनाव (प्रतीकात्मक फोटो)

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राज्य ब्यूरो, शिमला। चिट्टे के ख़ात्मे को लेकर राज्य सरकार और सख्त हो गई है। चिट्टे के आरोप में संलिप्त आरोपी पंचायत चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास विभाग मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने प्रेसवार्ता में इसकी जानकारी दी। 19 जनवरी को होने वाली केबिनेट में इस प्रस्ताव को लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने चिट्टे के कारोबार से संपत्तियां बनाई है उसे नष्ट किया जाएगा और उसे पर बुलडोजर भी चलाया जाएगा।
प्रदेश सरकार में लोक निर्माण मंत्री अधिकारियों के ख़िलाफ दिए गए बयान के बाद अलग-थलग पड़ गए हैं। विक्रमादित्य सिंह के बयान को पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने दुर्भाग्यपूर्ण क़रार दिया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों से काम करवाने आने चाहिए। कोई भी अधिकारी लीगल कार्य करने से इनकार नहीं करते।
इस तरह अधिकारियों के ख़िलाफ बयान देने से अधिकारियों का मनोबल टूटता है। अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि प्रदेश में ज़्यादातर अधिकारी बाहरी राज्यों से ही हैं और उन्हें ऐसा नहीं लगता कि कोई अधिकारी किसी तरह की परेशानी कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कोई भी अधिकारी लीगल काम को तो नहीं रोकते।
इससे पहले उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री भी लोक निर्माण मंत्री के बयान से पल्ला झाड़ चुके हैं। साथ ही राजस्व मंत्री जगत सिंह ने भी विक्रमादित्य के बयान को ग़लत बता चुके हैं
अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि अधिकारी सरकार के स्तंभ के तौर पर काम करते हैं। वे किस राज्य से संबंध रखते हैं, यह कोई मायने नहीं रखता। अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि साल 2016 के बाद तो प्रदेश में कोई नई IAS अधिकारी भी नहीं आए हैं। UPSC की कठिन परीक्षा पास करने के बाद IAS और IPS अधिकारी मानते हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश से संबंध रखने वाले अधिकारी भी बाहरी राज्यों में काम कर रहे हैं।
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अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि प्रदेश ख़राब वित्तीय हालात से गुज़र रहा है। मुख्यमंत्री किस तरह वित्तीय प्रबंधन कर रहे हैं, यह सभी जानते हैं।अधिकारियों के ख़िलाफ़ इस तरह का बयान देना सही नहीं है। मंत्रियों को अधिकारियों से काम करवाना आना चाहिए।