हिमाचल में नकली दवाओं के रैकेट पर हाई कोर्ट सख्त, विजिलेंस ने जांच में जताई असमर्थता तो सरकार को थमाया नोटिस
हिमाचल हाई कोर्ट ने नकली दवाओं के उत्पादन, फर्जी पहचानपत्र के इस्तेमाल और करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी के मामले में राज्य सरकार व अन्य को नोटिस जारी किया है।

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का परिसर। जागरण आर्काइव
HighLights
हाई कोर्ट ने नकली दवा, जीएसटी चोरी मामले में नोटिस दिया।
आरोप है कि फर्जी पहचानपत्र से नकली दवाएं बनाई गईं।
विजिलेंस ने जांच के लिए जनशक्ति की कमी बताई।
विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य में नकली दवाओं के उत्पादन, नकली पहचानपत्र के इस्तेमाल और करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी से जुड़े मामले में प्रदेश सरकार व अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया व न्यायाधीश चिराग भानु सिंह की खंडपीठ ने अनमोल सिंह राणा की ओर से दायर जनहित याचिका पर यह आदेश दिया।
कंपनी के निदेशकों पर आरोप है कि उन्होंने 275 किलोग्राम नकली दवा 'एक्सपोलटेब' का बिक्री रिकॉर्ड छुपाया और बिना लाइसेंस भारी मात्रा में फर्जी दवाएं बनाईं। यह ड्रग्स एंड कास्मेटिक्स एक्ट 1940 का उल्लंघन है।
दवा विभाग ने जुलाई 2023 में इनका थोक दवा लाइसेंस रद कर दिया था। हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत याचिकाएं रद होने के बाद नालागढ़ की अदालत ने जनवरी 2024 में इन्हें भगोड़ा घोषित किया था।
जून 2026 में दायर एक प्रतिनिधित्व के अनुसार, इस पूरे खेल में 27 से 28 टन फार्मास्युटिकल सामग्री (रा मटिरियल) की अवैध सप्लाई, धोखाधड़ी व बड़े पैमाने पर जीएसटी चोरी की बात सामने आई है। इसमें अवैध तरीके से कमाए गए काले धन की जांच जरूरी है।
विजिलेंस ने जताई थी असमर्थता
राज्य स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो ने एक जुलाई 2026 को पत्र लिखकर इस मामले की जांच में अपनी लाचारी व्यक्त की थी। विजिलेंस का कहना है कि उनके पास जनशक्ति (मैनपावर), संसाधनों और राजस्व विभाग के कामकाज के डोमेन ज्ञान की कमी है, जिससे वे इतनी जटिल वित्तीय हेराफेरी की जांच नहीं कर सकते।
जवाब दाखिल करने के निर्देश
अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए जल्द जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अन्य आरोपितों को भी नोटिस जारी कर अगली सुनवाई सात अक्टूबर 2026 के लिए तय की है।
