'पहली के निधन के बाद दूसरी पत्नी को फैमिली पेंशन का हक', हिमाचल हाई कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला
हिमाचल हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि पहली पत्नी के निधन के बाद दूसरी पत्नी को ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला परिसर। जागरण आर्काइव
HighLights
पहली पत्नी के निधन के बाद दूसरी पत्नी को फैमिली पेंशन।
हाई कोर्ट ने सामाजिक न्याय के सिद्धांत को प्राथमिकता दी।
राज्य सरकार की फैमिली पेंशन संबंधी अपील खारिज हुई।
विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल हाई कोर्ट ने फैमिली पेंशन से जुड़े मामले में राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया है। अदालत ने व्यवस्था दी है कि भले ही दूसरी शादी हिंदू विवाह अधिनियम के तहत कानूनी रूप से मान्य न हो, लेकिन लंबे सहवास, सामाजिक न्याय और आर्थिक सशक्तीकरण के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए पहली पत्नी के निधन के बाद दूसरी पत्नी को सर्विस रिकार्ड में दर्ज कर फैमिली पेंशन का लाभ दिया जा सकता है।
यह मामला याचिकाकर्ता महेश राम से जुड़ा है, जो 2003 में सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हुए थे और पेंशन प्राप्त कर रहे थे। महेश की पहली पत्नी कमलेश देवी का निधन 20 अप्रैल 2020 को हो गया था। दोनों की कोई संतान नहीं थी।
पहली पत्नी की बहन से की थी दूसरी शादी
निसंतान होने के कारण महेश ने पहली पत्नी की जीवित रहते ही उनकी बहन ज्वाला देवी से दूसरी शादी कर ली थी। पहली पत्नी कमलेश की मृत्यु के बाद महेश ने पेंशन पेमेंट ऑर्डर (पीपीओ) और सर्विस रिकार्ड में दूसरी पत्नी ज्वाला देवी का नाम दर्ज करने का अनुरोध किया।
सरकार ने खारिज कर दी थी अपील
राज्य सरकार और संबंधित विभाग ने इस अनुरोध को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 5 और सीसीएस (पेंशन) नियम, 1972 के तहत पहली पत्नी के जीवित रहते की गई दूसरी शादी कानूनी रूप से अमान्य है, इसलिए दूसरी पत्नी फैमिली पेंशन की हकदार नहीं हो सकती।
सिंगल जज ने सुनाया पक्ष में फैसला
सिंगल जज और राज्य सरकार की अपील इस अस्वीकृति के खिलाफ महेश राम ने सिविल रिट याचिका दायर की। सिंगल जज ने 17 सितंबर 2025 को याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि कमलेश की मृत्यु के बाद सर्विस रिकॉर्ड में दूसरी पत्नी ज्वाला देवी का नाम दर्ज किया जाए।
सरकार ने खंडपीठ के समक्ष अपील की दायर
इस फैसले से असंतुष्ट प्रदेश सरकार ने खंडपीठ के समक्ष अपील दायर की। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया एवं न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने सरकार की अपील को खारिज करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में अदालतों को केवल रूढ़िवादी दृष्टिकोण अपनाने के बजाय सामाजिक संदर्भ निर्णय की नीति अपनानी चाहिए।
बेसहारा महिला को सहारा देना कानून का उद्देश्य
कानून का उद्देश्य किसी महिला को बेसहारा या भूखा मरने से बचाना है। पहली पत्नी के निधन के बाद परिस्थिति कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यद्यपि पहली पत्नी के जीवित रहते दूसरी पत्नी पेंशन की हकदार नहीं होती, परंतु पहली पत्नी के निधन के पश्चात और लंबे समय तक साथ रहने के आधार पर दूसरी पत्नी को वित्तीय संरक्षण से वंचित नहीं किया जा सकता।
