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नेपाल त्रासदी के बाद केंद्र ने हिमाचल के लिए जारी की गाइडलाइन, जलविद्युत और फोरलेन टनल की सुरक्षा पर फीडबैक मांगा

By Parkash Bhardwaj Edited By: Rajesh Sharma
Published: Sat, 29 Aug 2026 06:29 PM (IST)

नेपाल त्रासदी के बाद केंद्र सरकार हिमालयी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की सुरक्षा को लेकर सतर्क हो गई है। ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश में फोरलेन पर किया गया टनल निर्मण। जागरण आर्काइव

हिमाचल प्रदेश में फोरलेन पर किया गया टनल निर्मण। जागरण आर्काइव

राज्य ब्यूरो, शिमला। नेपाल में आई प्राकृतिक त्रासदी से सबक लेते हुए केंद्र सरकार हिमालयी क्षेत्रों में चल रही बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क हो गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने हिमाचल प्रदेश सहित अन्य हिमालयी व उत्तर-पूर्वी राज्यों में जल विद्युत परियोजनाओं और सड़क परिवहन के लिए बनाई जा रही सुरंगों की सुरक्षा व्यवस्था पर सख्त रुख अपनाया है।

पीएमओ ने राज्यों से पूछा है कि सुरंग निर्माण के लिए की जा रही खोदाई के दौरान सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के क्या एहतियाती उपाय किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय के सलाहकार तरुण कपूर की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय वर्चुअल बैठक में संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में चल रहे टनल निर्माण कार्यों की समीक्षा की गई।

बैठक में हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त मुख्य सचिव आरडी नजीम और प्रधान सचिव देवेश कुमार शिमला से शामिल हुए। बैठक में मुख्य रूप से नेपाल में टनल और बांध क्षेत्रों में हुए नुकसान के दृष्टिगत भविष्य की रणनीतियों और निर्माण के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर विस्तृत फीडबैक लिया गया।

हिमाचल के नदी बेसिन और फोरलेन टनल पर फोकस

हिमाचल प्रदेश में सतलुज, ब्यास और रावी बेसिन पर करीब एक दर्जन छोटे-बड़े बांध व जल विद्युत परियोजनाएं हैं, जहां पानी को सुरंगों के जरिये पहुंचाया गया है या निर्माणाधीन प्रोजेक्टों में पहुंचाया जाना है।

फोरलेन पर टनल निर्माण

इसके अलावा राज्य में परिवहन कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने के लिए बड़े पैमाने पर टनल नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। चंडीगढ़-शिमला और कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर कई सुरंगों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, जबकि कुछ हिस्सों में काम प्रगति पर है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा मटौर-शिमला और पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है।

खोदाई के समय पुख्ता सुरक्षा प्रोटोकाल के निर्देश

पीएमओ ने निर्देश दिए हैं कि पहाड़ों के नाजुक भूगर्भीय ढांचे को देखते हुए खोदाई के दौरान जियोलाजिकल सर्वे, आधुनिक सपोर्ट सिस्टम, जल रिसाव प्रबंधन और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसे एहतियाती उपायों का कड़ाई से पालन किया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी अप्रिय प्राकृतिक या ढांचागत आपदा से पूरी तरह बचा जा सके।

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