हिमाचल में इलाज के नाम पर लूट: 10 की सिरिंज के वसूले जा रहे 25 से 30 रुपये, दवाओं के भी मनमाने दाम
हिमाचल प्रदेश में मरीजों से इलाज के नाम पर लूट हो रही है, जहां निजी अस्पताल और दवा दुकानें दवाओं ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश में इलाज के नाम पर लूट हो रही है। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
निजी अस्पताल, दवा दुकानें दवाओं पर मनमानी कीमत वसूल रहे।
सिरिंज, ग्लव्स, पैकेज के नाम पर मरीजों से अधिक वसूली।
सरकारी बीमा योजना बंद होने से मरीजों पर आर्थिक बोझ।
जागरण संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश में इलाज के नाम पर लूट के मामले देखने को मिल रहे हैं। शिमला जिले में निजी अस्पतालों व दवा दुकानों में मरीज से दवा की कीमत उसकी लागत से कई गुना अधिक वसूली जा रही है। कहीं पैकेज के नाम पर तो कहीं मरीज की जरूरत को देखकर मर्जी से वसूली की जा रही है। निजी अस्पतालों व इनके आसपास काफी संख्या में दवा की दुकानें हैं। कहीं सिरिंज के पांच से 10 के बजाय 25 से 30 रुपये वसूले जा रहे हैं।
ग्लब्स के भी मनमाने दाम
कुछ स्थानों पर ग्लब्स व कैथेटर के अधिक दाम वसूले जा रहे हैं। शिमला शहर, ठियोग, रामपुर, सुन्नी, रोहड़ू व कुमारसैन सहित कई स्थानों पर मरीजों से दवा व उपकरण की लागत कई गुना अधिक वसूली जा रही है।
जरूरी दवाएं व चिकित्सा उपकरण बाहर से खरीदने पड़ रहे
सरकार की बीमा योजना के तहत बड़े इलाज की सुविधा बंद होने से सरकारी अस्पतालों में गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। अस्पतालों में उपचार व जांच की सुविधा होने के बावजूद इलाज में इस्तेमाल होने वाली कई जरूरी दवाएं व चिकित्सा उपकरण मरीजों को बाहर से खरीदने पड़ रहे हैं।
हृदय रोगियों को एंजियोप्लास्टी के लिए करीब 50 हजार से डेढ़ लाख रुपये तक का स्टेंट, सीटी स्कैन के लिए जरूरी कंट्रास्ट व हड्डियों के ऑपरेशन के लिए प्लेट व अन्य इंप्लांट बाजार से खरीदने पड़ रहे हैं।
कीमोथैरेपी की दवाएं भी बाहर से खरीदनी पड़ रहीं
कैंसर मरीजों को कीमोथैरेपी की कुछ जरूरी दवाओं के लिए भी बाहर का रुख करना पड़ रहा है। ऐसे में बीमा योजना के तहत इलाज की उम्मीद लेकर सरकारी अस्पताल पहुंच रहे मरीजों व तीमारदारों पर उपचार के दौरान आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
शिमला के विभिन्न उपमंडलों में हालात बद्तर
- शिमला शहर : 10 से 20 रुपये में मिल रही सिरिंज
डाक्टर की सलाह पर शिमला शहर की दवा की दुकानों में सिरिंज की बिक्री की जा रही है। इसकी कीमत 10 से 20 रुपये तक वसूली जा रही है। निजी क्लीनिकों व निजी अस्पतालों में ग्लब्स के दाम लागत से अधिक लिए जा रहे हैं। अस्पताल स्वयं इसकी कीमत तय करते हैं। - ठियोग : मरीजों पर पैकेज की मार
ठियोग में मरीजों पर पैकेज की मार पड़ रही है। यहां मरीजों से हर बीमारी के इलाज के लिए पैकेज तय किया जाता है। इसमें मरीज किस पैकेज में किस दवा या उपकरण का क्या दाम है, इसकी जानकारी तक नहीं ले पाते हैं। इसका लाभ उठाकर लोगों की जेब पर डाका डाला जा रहा है। - रामपुर, रोहड़ू व सुन्नी : पट्टी व रूई के दाम थोक मूल्य से अधिक
रामपुर, रोहड़ू व सुन्नी में मरीजों को ज्यादा खर्च के भार से राहत नहीं है। यहां भी पैकेज, पट्टी के रोल व रूई के दाम थोक मूल्य से अधिक वसूलकर मरीज के मर्ज को और बढ़ाया जा रहा है।
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