Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    हिमाचल पंचायत चुनाव में राज परिवार की एंट्री, BJP ने क्योंथल रियासत के युवा चेहरे को बनाया प्रत्याशी; नए समीकरण की शुरुआत

    By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Sat, 09 May 2026 12:20 PM (IST)

    हिमाचल पंचायत चुनाव में क्योंथल राजपरिवार की दूसरी पीढ़ी ने राजनीति में प्रवेश किया है। भाजपा ने कुशल सेन को जिला परिषद प्रत्याशी बनाया है, जिसे शिमला ...और पढ़ें

    HighLights

    1. क्योंथल राजपरिवार की दूसरी पीढ़ी की राजनीति में एंट्री।

    2. भाजपा ने कुशल सेन को जिला परिषद प्रत्याशी बनाया।

    3. शिमला ग्रामीण में नए राजनीतिक समीकरणों की शुरुआत।

    रोहित शर्मा, शिमला। हिमाचल प्रदेश पंचायत चुनाव की सरगर्मी तेज है। शिमला जिला की पंचायतीराज संस्थाओं की राजनीति में नया चेहरा सामने आने से चुनावी माहौल गर्मा गया है। रामपुर, जुब्बल और कोटी रियासतों के बाद क्योंथल राजपरिवार की दूसरी पीढ़ी ने भी सक्रिय राजनीति में औपचारिक एंट्री मार दी है। भाजपा ने क्योंथल रियासत से जुड़े युवा चेहरे कुशल सेन को जिला परिषद चुनाव में अधिकृत प्रत्याशी बनाकर साफ संकेत दिया है कि पार्टी अब शिमला ग्रामीण और कुसुम्पटी क्षेत्र में नए राजनीतिक समीकरण तैयार करेगी।

    भविष्य की बड़ी राजनीति की शुरुआत

    कुशल सेन की उम्मीदवारी को केवल पंचायत चुनाव तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भविष्य की बड़ी राजनीति की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। उनकी माता ज्योति सेन भाजपा टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ चुकी हैं और लंबे समय से पार्टी संगठन में सक्रिय भूमिका निभाती आ रही है। भाजपा समर्थक इसे युवा नेतृत्व की शुरुआत बता रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे राजपरिवार आधारित राजनीति का विस्तार मान रहा है।

    राजनीति में राजपरिवारों का प्रभाव

    जिला की राजनीति में राजपरिवारों का प्रभाव पहले से रहा है। रामपुर रियासत से पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का परिवार दशकों तक प्रदेश की राजनीति का केंद्र बना रहा। वर्तमान में उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह व बेटे विक्रमादित्य सिंह भी प्रदेश की राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं। विक्रमादित्य प्रदेश सरकार में मंत्री हैं। कोटी रियासत से जुड़े अनिरुद्ध सिंह भी मंत्री हैं।

    विधानसभा चुनाव के लिए तैयारी

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा पंचायत चुनाव के जरिए विधानसभा चुनाव के लिए जमीन तैयार कर रही है। कुसुम्पटी क्षेत्र में मजबूत सामाजिक पकड़ और प्रभावशाली चेहरा तलाश रही पार्टी ने राजपरिवार के युवा चेहरे पर दांव खेला है। अब इसे शिमला की भविष्य की राजनीति का ट्रायल भी माना जा रहा है।

    खबरें और भी

    क्योंथल रियासत से 12 गांव लेकर बसाया था शिमला

    क्योंथल रियासत की स्थापना 13वीं शताब्दी में कोट कहलूर (बिलासपुर) के गिर सेन ने की थी। वह चंद्रवंशी राजपूत वंश से संबंधित थे। शुरुआत में क्योंथल की राजधानी जुन्गा थी, ये आज भी ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है। 18वीं शताब्दी की शुरुआत में आधुनिक शिमला शहर का अधिकांश हिस्सा क्योंथल रियासत के तहत ही था। 1803-1815 तक नेपाल के गोरखाओं ने क्योंथल पर कब्जा कर लिया। 1815 में गोरखा युद्ध के बाद अंग्रेजों ने क्योंथल को गोरखाओं से मुक्त कराया और उनके राज्य को उन्हें वापस कर दिया। अंग्रेजों ने शिमला में एक हिल स्टेशन बनाने के लिए क्योंथल के तत्कालीन राणा संसार सेन से 12 गांव (जिनमें आज का मुख्य शिमला शामिल है) बदले में ले लिए। राजा संसार सेन (1831-1862), राजा बलबीर सेन (1882-1901) और राजा विजय सेन (1901-1916) ने शासन किया। 15 अप्रैल, 1948 को क्योंथल रियासत का भारत के नवगठित हिमाचल प्रदेश में विलय कर दिया गया।

    यह भी पढ़ें: हिमाचल पंचायत चुनाव: भाजपा ने कांग्रेस नेता की पत्नी को बनाया जिला परिषद वार्ड से प्रत्याशी, बदले समीकरण