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    हिमाचल में पंचायतों का कार्यकाल समाप्त प्रशासकीय समितियों को जिम्मा, 55 पंचायतें बाहर; क्या रहेगी वित्तीय व्यवस्था?

    By Yadvinder Sharma Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Sat, 31 Jan 2026 07:14 PM (IST)

    Himachal Panchayat Chunav, हिमाचल प्रदेश में 31 जनवरी को पंचायती राज प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त हो गया है। आपदा के कारण चुनाव न होने से अब प्रशास ...और पढ़ें

    हिमाचल प्रदेश में पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो गया है। प्रतीकात्मक फोटो

    हिमाचल प्रदेश में पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो गया है। प्रतीकात्मक फोटो

    HighLights

    1. पंचायती राज प्रतिनिधियों का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त हुआ।

    2. आपदा के कारण चुनाव न होने से प्रशासकीय समितियां गठित।

    3. समितियां ग्रामीण विकास और प्रशासनिक निरंतरता सुनिश्चित करेंगी।

    राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त होने के साथ प्रशासकीय समितियों को जिम्मेदारी सौंप दी है। पंचायत प्रधान से लेकर जिला परिषद अध्यक्ष व करीब 30 हजार प्रतिनिधियों की सारी शक्तियां समाप्त हो गई हैं।

    पंचायतों में बीडीओ की अध्यक्षता में जबकि पंचायत समितियों और जिला परिषदों में उनके मुख्य कार्यकारी अधिकारियों की अध्यक्षता में प्रशासकीय समितियों को जिम्मा सौंपा गया है। 

    इन पंचायतों में अप्रैल में खत्म होगा कार्यकाल

    हालांकि प्रदेश के कुल 12 जिला परिषदों में से लाहुल स्पीति जिला परिषद के प्रतिनिधियों, प्रदेश की वर्तमान में 3577 पंचायतों में से 55 पंचायतों के प्रतिनिधियों जिनमें केलंग की 32, पांगी की 19 और कुल्लू की चार पंचायतों के प्रतिनिधियों का कार्यकाल अप्रैल में समाप्त होगा। 
    ऐसे में अब प्रदेश में सभी पंचायतों, शहरी निकायों के चुनाव एक साथ अप्रैल में होंगे। 

    अधिसूचना में आपदा का हवाला

    प्रशासकीय समितियों को कार्यभार सौंपे जाने के संबंध में प्रदेश पंचायती राज विभाग की तरफ से अधिसूचना जारी कर दी गई है। जिसमें स्पष्ट किया गया गया है कि आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत लागू परिस्थितियों के कारण प्रदेश में पंचायत चुनाव नहीं करवाए जा सके।

    समितियां देखेंगी कार्य

    इस कारण राज्य सरकार ने पंचायत राज अधिनियम, 1994 के प्रावधानों के तहत ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों के संचालन के लिए प्रशासकीय समितियों के गठन का निर्णय लिया है। सरकार ने अस्थायी रूप से प्रशासनिक समितियों का गठन किया है, जो अगली चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक पंचायतों के सभी अधिकारों और कार्यों का निर्वहन करेंगी। यह व्यवस्था प्रदेश में ग्रामीण विकास, प्रशासनिक निरंतरता और केंद्र वित्त आयोग से मिलने वाली अनुदान राशि के सुचारू उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए की गई है।

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    पंचायत के लिए समिति

    • अध्यक्ष : खंड विकास अधिकारी (बीडीओ)
    • सदस्य सचिव : पंचायत सचिव

    पंचायत समिति के लिए समिति

    • अध्यक्ष: मुख्य कार्यकारी अधिकारी  पंचायत समिति
    • सदस्य: सामाजिक शिक्षा एवं ब्लाक योजना अधिकारी (एसईबीपीओ)
    • सदस्य सचिव: पंचायत निरीक्षक या उपनिरीक्षक
      रिक्त पद की स्थिति में बीडीओ द्वारा अधिकारी नामित किया जाएगा

    जिला परिषद के लिए समिति

    • अध्यक्ष: मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद
    • सदस्य: जिला विकास अधिकारी
    • सदस्य सचिव  जिला पंचायत अधिकारी

    ये रहेगी वित्तीय व्यवस्था

    केंद्रीय वित्त आयोग की अनुदान राशि के भुगतान के लिए सदस्य सचिव तैयार करेगा, जबकि अध्यक्ष चेकर की भूमिका निभाएंगे और जारी करेंगे। प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज सदस्य सचिव यानि सचिव पंचायती राज जारी करेंगे।

    इसलिए की गई तैनाती

    अधिकारियों का कहना है कि यह अंतरिम व्यवस्था पंचायत स्तर पर विकास कार्यों और प्रशासनिक गतिविधियों को बाधित होने से बचाने के लिए की गई है। चुनाव प्रक्रिया पूरी होते ही पंचायतों का संचालन दोबारा से निर्वाचित प्रतिनिधियों को सौंप दिया जाएगा।

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