हिमाचल प्रदेश में महंगी हो सकती है बिजली, अधिकारियों ने नियामक आयोग के समझ रखा प्रति यूनिट बढ़ोतरी का प्रस्ताव
हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड ने अगले वित्तीय वर्ष के लिए बिजली दरों में वृद्धि का प्रस्ताव विद्युत नियामक आयोग के समक्ष रखा है। बोर्ड ने बिजली खरीद लागत ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश में बिजली की दरें बढ़ सकती हैं। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
बिजली दरों में 10 से 25 पैसे प्रति यूनिट बढ़ोतरी प्रस्तावित।
बिजली बोर्ड को अतिरिक्त राजस्व की आवश्यकता बताई गई।
नई दरें मार्च में तय होकर अप्रैल से होंगी लागू।
जागरण संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश में अगले वित्तीय वर्ष के लिए बिजली दरों को तय करने के लिए कसरत तेज हो गई है। राज्य बिजली बोर्ड की ओर से विद्युत नियामक आयोग के समक्ष शुक्रवार को प्रस्तुति दी गई। बिजली बोर्ड ने पक्ष रखा कि प्रदेश को पूरा साल बिना किसी व्यवधान के बिजली की सप्लाई देने के लिए काफी बिजली खरीदनी पड़ती है।
इसकी खरीद का खर्च अब बढ़ गया है, इसलिए राज्य बिजली बोर्ड को अपने खर्च को पूरा करने के लिए अतिरिक्त राजस्व की जरूरत रहेगी। इस कारण बिजली की दरों में बढ़ोतरी की जानी चाहिए।
25 पैसे प्रति यूनिट दर बढ़ाने का प्रस्ताव
बिजली बोर्ड के खर्च और राजस्व में यदि अंतर को पूरा करना हो तो 25 पैसे प्रति यूनिट अधिकतम बिजली की दर में बढ़ोतरी की जानी चाहिए। हालांकि न्यूनतम बढ़ोतरी 10 पैसे की प्रस्तावित की गई है।
इस दौरान राज्य बिजली बोर्ड, राज्य पावर कारपोरेशन, राज्य ट्रांसमिशन कारपोरेशन के अलावा शिमला के होटल एसोसिएशन सहित अन्य संस्थाओं ने भी अपने पक्ष को आयोग के समक्ष रखा।
मार्च में तय होनी हैं नई दरें
राज्य बिजली बोर्ड ने नियामक आयोग के समक्ष अगले वित्तीय वर्ष के लिए एक याचिका दायर कर रखी है। इस याचिका के मुताबिक नियामक आयोग की ओर से मार्च में नई दरें घोषित की जानी हैं। इन दोनों को अप्रैल से लागू किया जाना प्रस्तावित है।
तीन जगह हुई जनसुनवाई
अभी तक इसमें तीन बार पहले भी शिमला, धर्मशाला और बद्दी में सुनवाई हो चुकी है। अब सभी पक्षों को सुनने के बाद नियामक आयोग जल्द इस पर फैसला सुना सकता है। मार्च के अंत में ही आयोग की ओर से इस पर फैसला सुनाया जाता है। इसे पहली अप्रैल से लागू किया जाता है।
खबरें और भी
इसलिए बढ़ेगा बिजली खरीद का खर्च
हिमाचल में बिजली बोर्ड को सतलुज जल विद्युत निगम से इक्विटी के रूप में 26 प्रतिशत हिस्सेदारी के रूप में निश्शुल्क बिजली मिलती थी। इसे अब राज्य सरकार ने बोर्ड को देने की बजाय बेचने का फैसला लिया है। इससे सरकार को अतिरिक्त राजस्व मिलेगा।