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RDG की भरपाई के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री से मिले CM सुक्खू; बोले- सभी राज्यों के लिए एक समान मापदंड अनुचित

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Mon, 02 Mar 2026 02:14 PM (IST)Updated: Mon, 02 Mar 2026 02:46 PM (IST)

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की। उन्होंने वित्त वर्ष 2026-27 ...और पढ़ें

दिल्ली में केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात के दौरान सीएम सुखविन्द्र सिंह सुक्खू।

दिल्ली में केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात के दौरान सीएम सुखविन्द्र सिंह सुक्खू।

HighLights

  1. CM सुक्खू ने केंद्रीय वित्त मंत्री से की मुलाकात।

  2. राजस्व घाटा भरपाई हेतु विशेष सहायता की मांग।

  3. पहाड़ी राज्यों के लिए समान मापदंड अनुचित।

राज्य ब्यूरो, शिमला। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने सोमवार को नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भेंट कर वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजस्व घाटे की भरपाई के लिए विशेष केंद्रीय सहायता पैकेज प्रदान करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री को अवगत कराया कि राजस्व घाटा अनुदान (RDG) को बंद किए जाने से राज्य की वित्तीय स्थिति पर दूरगामी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि जिन राज्यों का आरडीजी बंद किया गया है, उनकी तुलना हिमाचल प्रदेश से नहीं की जा सकती। उन्होंने बताया कि राज्य के लिए आरडीजी का योगदान लगभग 12.7 प्रतिशत था, जो नागालैंड के बाद दूसरा सबसे अधिक है। बड़े राज्य इस अनुदान की समाप्ति को सहन कर सकते हैं, लेकिन हिमाचल प्रदेश जैसी पहाड़ी अर्थव्यवस्था के लिए यह संभव नहीं है।

राज्यों को एक ही मापदंड पर आंकना सही नहीं

उन्होंने कहा कि सभी राज्यों को एक ही मापदंड पर आंकना न तो स्वस्थ परंपरा है और न ही पारदर्शी। मुख्यमंत्री ने आरडीजी की समाप्ति को ‘सहकारी संघवाद की भावना को कमजोर करने वाला’ कदम बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 275(1) उन राज्यों को अनुदान का प्रावधान करता है, जो अपने राजस्व प्राप्तियों और व्यय के बीच अंतर को स्वयं पूरा नहीं कर सकते। उन्होंने यह भी कहा कि यह पहली बार है जब वित्त आयोग ने छोटे पहाड़ी राज्यों की विकासात्मक आवश्यकताओं की पूरी तरह अनदेखी की है।

खर्च में कटौती को कई कदम उठाए

मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले दो-तीन वर्षों में राज्य सरकार ने व्यय में कटौती के लिए कई कदम उठाए हैं। कोई भी ऑफ-बजट उधारी नहीं ली गई है तथा विभिन्न उपकरों के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 600 करोड़ रुपये जुटाए गए हैं।

जीएसटी के बाद राजस्व हानि

उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू होने के कारण राज्य को राजस्व हानि हुई है। कर दरों में जहां संभव था वृद्धि की गई तथा सब्सिडी का युक्तिकरण भी किया गया, लेकिन इसके बावजूद राजस्व घाटे की भरपाई संभव नहीं हो पा रही है।

अकलन व सुधारों के लिए समिति गठित करने का अनुरोध

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री से पहाड़ी राज्यों की अर्थव्यवस्था का समुचित आकलन करने तथा आवश्यक सुधारात्मक उपाय सुझाने के लिए एक समिति गठित करने का अनुरोध किया।
केंद्रीय वित्त मंत्री ने राज्य की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया।
मुख्यमंत्री के साथ उनके प्रधान सलाहकार राम सुभाग सिंह और प्रधान सचिव (वित्त) देवेश कुमार भी उपस्थित रहे।

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