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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 11, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

आपदा जोखिम को कम करने के लिए काम करेंगे हिमाचल-फ्रांस, सरकार ने साइन किया 886.26 करोड़ की परियोजना

Updated: Sat, 11 Jan 2025 02:21 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश में आपदाओं से होने वाले जोखिमों को कम करने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। हिमाचल की सुक्खू सरकार और फ्रेंच डेवलपमेंट एजेंसी (French ...और पढ़ें

हिमाचल और फ्रेंच डेवल्पमेंट एजेंसी के साथ सहमति पत्र पर हस्ताक्षर के दौरान मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना व अन्य
हिमाचल और फ्रेंच डेवल्पमेंट एजेंसी के साथ सहमति पत्र पर हस्ताक्षर के दौरान मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना व अन्य

HighLights

  1. हिमालय आपदा जोखिम न्यूनीकरण केंद्र किया जाएगा स्थापित
  2. 886 करोड़ की परियोजना के सहमति पत्र पर किए हस्ताक्षर

राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल सरकार हिमायली क्षेत्र में आपदाओं के जोखिम को कम करने और बचाव पर फ्रेंच डेवलपमेंट एजेंसी (एएफडी) के साथ काम करेगी। हिमाचल सरकार ने एएफडी के साथ 886.26 करोड़ रुपये की परियोजना के सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए।

इसके तहत हिमालय आपदा जोखिम न्यूनीकरण केंद्र की स्थापना होगी। यह केंद्र ग्लेशियर पिघलने से बाढ़ के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने, निगरानी, भूस्खलन और कृषि-बागवानी के संबंध में सही जानकारी देगा। जंगलों की आग को नियंत्रित करने और उसे लगने से रोकने के लिए भी वैज्ञानिक रणनीति लागू होगी।

इन खतरों से निपटने के लिए तैयार होगा आधारभूत ढांचा

इस परियोजना के तहत प्राकृतिक खतरों के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली विकसित करने, बाढ़ पूर्वानुमान क्षमताओं को बढ़ाने, विभागों को आपदा से निपटने को तैयार करने, प्रशिक्षण और हेलीपैड के अलावा अन्य आवश्यक आधारभूत ढांचा को तैयार किया जाएगा।

सहमति पत्र मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना की उपस्थिति में हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त सचिव और परियोजना निदेशक पीएमयू निशांत ठाकुर और एएफडी की ओर से इंडिया कैमिले सीवरेक के उप-निदेशक ने हस्ताक्षर किए। अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) ओंकार चंद शर्मा, रेजिलियंस डीआरआर सेक्टर पोर्टफोलियो मैनेजर अंशुला मेनन भी उपस्थित रहे।

तीन मुख्य क्षेत्रों पर केंद्रित है ये परियोजना

मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने बताया कि एचपी-डीआरआरपी राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की प्रमुख पहलों में से एक है जिसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदा के प्रति राज्य की संवेदनशीलता को कम करना है।

अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व ओंकार चंद शर्मा ने बताया कि इस परियोजना के तहत विभिन्न विभागों को मजबूत किया जाएगा, ताकि आपदा के विभिन्न चरणों में कुशलता और प्रभावी ढंग से काम करने के लिए तैयार हो सकें। यह परियोजना तीन मुख्य क्षेत्रों पर केंद्रित है।

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परियोजना के तहत ये होंगे कार्य

  • समावेशी लचीलापन रणनीतियों और आईटी-आधारित समाधानों को बढ़ावा देना।
  • विभागों को सुदृढ़ करना, जिसमें आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, जिला आपदा प्रबंधन व आपातकालीन संचालन केंद्रों की क्षमताओं को बढ़ाना।
  • जलवायु परिवर्तन संवेदनशीलता आकलन (सीसीवीए), सूचना, शिक्षा और संचार (आइईसी) सामग्री का विकास।
  • यह जंगल की आग शमन, विशेष राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) इकाइयों, अग्नि स्टेशनों और हेलीपैड की स्थापना में सुधार करेगा।
  • आपदा प्रतिक्रिया प्रशिक्षण कार्यक्रमों के व्यापक आयोजन पर भी देगा जोर।
  • बायोइंजीनियरिंग नर्सरी की स्थापना, जलवायु-लचीले बुनियादी ढांचे को बढ़ावा दिया जाएगा।
  • प्रौद्योगिकी प्रदर्शन इकाइयों (टीडीयू) के माध्यम से नवीन तकनीकों को शामिल किया जाएगा।

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