केंद्रीय बजट और 16वें वित्तायोग की सिफारिशों से हिमाचल को क्या उम्मीदें, क्या मिलेगा राजस्व घाटा अनुदान?
हिमाचल प्रदेश को केंद्रीय बजट 2026-27 और 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों से बड़ी उम्मीदें हैं। राज्य गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहा है, जहां वेतन और पेंश ...और पढ़ें

केंद्रीय बजट से हिमाचल प्रदेश को बहुत सी उम्मीदें हैं।
HighLights
केंद्रीय बजट, 16वें वित्त आयोग से हिमाचल को बड़ी उम्मीदें।
राज्य वित्तीय संकट में, ₹10,000 करोड़ वार्षिक अनुदान की मांग।
वेतन-पेंशन पर 42% बजट खर्च, विकास के लिए धन कम।
राज्य ब्यूरो, शिमला। वित्तीय संकट से गुजर रहे हिमाचल के लिए रविवार का दिन अहम है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगी। केंद्रीय बजट और 16वें वित्तायोग की सिफारिशों से हिमाचल को उम्मीद है। बजट से पहले मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू सहित वित्त विभाग की टीम राज्य की खराब वित्तीय हालत का लेखाजोखा केंद्रीय मंत्री के समक्ष रख चुकी है।
पिछले तीन साल से लगातार प्राकृतिक आपदाओं के गहरे जख्म दिखाने के साथ 16वें वित्तायोग की टीम से मिले सुझाव पर हिमाचल सरकार द्वारा अमल का ब्यौरा भी रखा जा चुका है।
रविवार का दिन हिमाचल के लिए इसलिए भी खास है कि बजट के साथ ही 16वें वित्तायोग की सिफारिशों की रिपोर्ट संसद में रखी जानी है। अगले पांच साल हिमाचल को कितना राजस्व घाटा अनुदान प्राप्त होना है, इसका पता चलेगा। प्रदेश सरकार की ओर से वित्तायोग से एक लाख करोड़ से अधिक का राजस्व घाटा अनुदान आबंटित किए जाने की मांग की गई थी। ऐसे में केंद्रीय बजट और 16वें वित्तायोग की सिफारिशों से राज्य का रोड मैप निर्धारित होगा।
यह है लेखा-जोखा
वित्त विभाग की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2026-27 में सरकारी कर्मियों के वेतन पर ही वार्षिक 20639 करोड़ रुपये खर्च होंगे। वित्त वर्ष 2027-28 में यह खर्च 22502 करोड़, वर्ष 2028-29 में 24145 करोड़ और वर्ष 2029-30 में 26261 करोड़ रुपये होगा। 16वें वित्तायोग के कार्यकाल के अंतिम वर्ष 2030-31 में हिमाचल में सरकारी कर्मियों के वेतन का खर्च 28354 करोड़ रुपये वार्षिक हो जाएगा। पांच साल में कुल आंकड़ा 121901 करोड़ रुपये बनता है। यानी वर्ष 2026-27 में सरकारी कर्मियों के वेतन पर सरकार को हर माह 1719 करोड़ से अधिक खर्च करने होंगे। ये 2031-32 में बढ़कर 2362 करोड़ रुपये मासिक हो जाएगा।
प्रतिवर्ष 10 हजार करोड़ के राजस्व घाटा अनुदान की मांग
सरकार द्वारा केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और 16वें वित्तायोग के अध्यक्ष डा. अरविंद पनगढिया से की गई पांच मुलाकातों में हिमाचल सरकार की ओर से हर साल राजस्व घाटा अनुदान के तहत 10 हजार करोड़ दिए जाने का आग्रह किया जा चुका है।
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केवल वेतन व पेंशन पर ही बजट का 42 प्रतिशत हिस्सा खर्च हो रहा है। बजट में सौ रुपये का मानक रखा जाए तो कर्ज के ब्याज की रकम चुकाने के लिए महीने में 11 रुपये खर्च हो रहे हैं। कुल चार मदों में 62 रुपये खर्च हो रहा है। इस प्रकार विकास के लिए राज्य के खजाने में खास पैसा नहीं बच रहा है। हिमाचल का तर्क रहा है कि ऐसी स्थितियों को देखते हुए राज्य को अच्छी ग्रांट मिल जाए तो काफी सहायता होगी।
-सुखविन्द्र सिंह सुक्खू, मुख्यमंत्री।
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