हिमाचल में स्कूली बच्चे सीखेंगे तनाव मुक्त जीवन की राह, बैग फ्री-डे पर होगी काउंसलिंग; 2 सुसाइड के बाद फैसला
हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अब बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ तनाव मुक्त जीवन जीने के तरीके सिखाए जाएंगे। वार्षिक परीक्षा में दो छात्रों की आत् ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश स्कूली बच्चों की काउंसलिंग होगी। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
स्कूलों में बच्चों को तनाव मुक्त जीवन सिखाया जाएगा।
वार्षिक परीक्षा में दो छात्रों की आत्महत्या के बाद फैसला।
अंतिम शनिवार को 'बैग फ्री डे' पर होगी काउंसलिंग।
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षक बच्चों को किताबी ज्ञान देने के साथ जीवन का महत्व भी सिखाएंगे। स्कूलों में बच्चों की काउंसलिंग की जाएगी। इसमें तनावपूर्ण जीवन जीने के टिप्स उन्हें दिए जाएंगे। बच्चों को यह भी बताया जाएगा कि परीक्षा में फेल होने से जीवन समाप्त नहीं हो जाता। जीवन के हर अनुभव से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की वार्षिक परीक्षा में शिमला व बिलासपुर में दो विद्यार्थियों के आत्महत्या करने का मामले सामने आने के बाद विभाग इस पर काम कर रहा है।
बैग फ्री डे रहेगा अंतिम शनिवार
निदेशक स्कूल शिक्षा विभाग आशीष कोहली ने बताया कि महीने के अंतिम शनिवार को बैग फ्री डे का आयोजन स्कूलों में किया जाता है। बच्चों को जागरूक करने के लिए विभाग कई तरह की गतिविधियां विभाग करवाता है।
बच्चों को दिए जाएंगे तनाव से बाहर निकलने के टिप्स
शिक्षकों को यह भी जिम्मेदारी दी जाएगी कि वह बच्चों को तनाव से बाहर निकलने के बारे में बताए। खेलने, कूदने और पढ़ने और भविष्य संवारने की उम्र में बच्चों के आत्महत्या जैसा कदम उठा रहे हैं। बच्चों में तनाव के बढ़ते मामलों को देखते हुए अब स्कूल उन्हें पढ़ाने के साथ तनाव मुक्त रहने की भी सीख दी जाएगी।
अभिभावकों का भी सहयोग लेगा विभाग
विभाग अभिभावकों का भी सहयोग इसमें लेगा। उन्हें बताया जाएगा कि जरूरी नहीं हर बच्चा पढ़ाई में तेज हो। वह अन्य गतिविधियां, खेल, संगीत, कला में भी अच्छा कर सकता है। इसलिए उन पर ज्यादा दबाव न बनाएं। परीक्षा परिणाम वाले दिन बच्चों पर ज्यादा नजर रखें। अभिभावक इस दिन उनके साथ रहे ताकी उसके मन में कोई नकारात्मक विचार न आए। अभिभावकों को गाइड किया जाएगा कि वे स्वयं भी बच्चों की काउंसलिंग करें। बच्चों में तनाव के कई कारण हैं। पिछले कुछ सालों में पढ़ाई और परीक्षा परिणामों से जुड़े तनावों के साथ ही साइबर बुलिंग यानी इंटरनेट गेम, और अन्य इंटरनेट माध्यमों के जरिए भी बच्चों के तनाव ग्रस्त होने के मामले बढ़े हैं। इन सभी पहलुओं से बच्चों को बचाने पर फोकस किया गया है।