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पंजाब और चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की घटना के बाद हिमाचल पुलिस अलर्ट, 17 विवि का ऑडिट होगा; DGP ने दिए निर्देश

By Chaitanya Thakur Edited By: Rajesh Sharma
Published: Mon, 12 Oct 2026 04:44 PM (IST)

पंजाब और चंडीगढ़ की घटनाओं से सबक लेते हुए हिमाचल सरकार राज्य के विश्वविद्यालयों में छात्रों की सुरक्षा बढ़ा रही ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश के डीजीपी अशोक तिवारी। जागरण आर्काइव

हिमाचल प्रदेश के डीजीपी अशोक तिवारी। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. विश्वविद्यालय परिसरों की सुरक्षा बढ़ाने पर जोर दिया गया।

  2. नशे की रोकथाम हेतु एंटी-चिट्टा अभियान में भागीदारी।

  3. आपातकालीन सेवाओं 112 और 'ट्रैक मी' के प्रति जागरूकता।

जागरण संवाददाता, शिमला। पंजाब और चंडीगढ़ की यूनिवर्सिटी में हाल ही में हुई घटनाओं से सबक लेते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की पहल की है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर सोमवार को पुलिस मुख्यालय शिमला में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की अध्यक्षता में प्रदेश के 17 निजी विश्वविद्यालयों के कुलपति और वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई। इसमें विश्वविद्यालय परिसरों की सुरक्षा, छात्रावासों की निगरानी, नशे की रोकथाम और आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक का उद्देश्य पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच नियमित समन्वय स्थापित कर विद्यार्थियों की समस्याओं का समय पर समाधान करना तथा किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करना रहा। बैठक में पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा शिमला, सोलन, मंडी, बद्दी, कांगड़ा और ऊना के पुलिस अधीक्षक भी शामिल हुए।

पुलिस के साथ संयुक्त सुरक्षा ऑडिट होगा

बैठक में विश्वविद्यालय परिसरों के प्रवेश और निकास द्वारों पर निगरानी बढ़ाने, आगंतुकों का सत्यापन करने तथा छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया गया। निजी सुरक्षा कर्मियों का पुलिस सत्यापन और नियमित प्रशिक्षण सुनिश्चित करने की बात भी कही गई। विश्वविद्यालय परिसरों का पुलिस के साथ संयुक्त सुरक्षा ऑडिट किया जाएगा। आपात परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई के लिए स्पष्ट कार्यप्रणाली विकसित करने पर भी चर्चा हुई।

एंटी-चिट्टा जन आंदोलन में बढ़ाई जाएगी भागीदारी

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में चल रहे एंटी-चिट्टा जन आंदोलन में विश्वविद्यालयों और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाई जाएगी। परिसरों और आसपास के क्षेत्रों में नशे की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस तथा विश्वविद्यालय प्रशासन मिलकर काम करेंगे। पुलिस महानिदेशक ने विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने और अभियान को जन आंदोलन का रूप देने में विश्वविद्यालयों से सहयोग मांगा।

अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं पर नजर

किसी घटना के बाद इंटरनेट मीडिया पर अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं के प्रसार को रोकने के लिए पुलिस के साइबर अपराध और मीडिया प्रकोष्ठ के साथ समन्वय किया जाएगा। प्रत्येक विश्वविद्यालय एक अधिकृत प्रवक्ता नामित करेगा, ताकि घटनाओं से संबंधित सही जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जा सके। साथ ही, प्रत्येक विश्वविद्यालय में एक नोडल सुरक्षा अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो संबंधित जिला पुलिस अधीक्षक के संपर्क में रहेगा।

112 और ‘ट्रैक मी’ सुविधा के प्रति करेंगे जागरूक

डीजीपी ने बताया कि हिमाचल प्रदेश पुलिस की आपातकालीन सेवा 112 राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान पर है। उन्होंने विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं, को इस सेवा और महिलाओं की सुरक्षा के लिए उपलब्ध ‘ट्रैक मी’ सुविधा की जानकारी देने का आग्रह किया। विश्वविद्यालयों से साइबर सुरक्षा जागरूकता, यातायात स्वयंसेवक योजना और पुलिस के आधिकारिक इंटरनेट मीडिया माध्यमों से जुड़ने की अपील भी की गई।

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