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हिमाचल के सरकारी स्कूलों का गणित: बच्चे घटे, खर्च बढ़ गया, प्राइमरी में हर छात्र पर खर्च हो रहे 5219 रुपये महीना

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Sat, 19 Sep 2026 11:13 AM (IST)

हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या लगातार घट रही है, जबकि प्रति विद्यार्थी खर्च बढ़ रहा है। प्राथमिक कक्षाओं में प्रति छात्र मासिक खर्च बढ़ गया है।

हिमाचल के सरकारी स्कूलों में संसाधन ज्यादा हैं और बच्चे कम हो गए हैं। प्रतीकात्मक फोटो

हिमाचल के सरकारी स्कूलों में संसाधन ज्यादा हैं और बच्चे कम हो गए हैं। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या में लगातार गिरावट।

  2. प्राथमिक कक्षाओं में प्रति छात्र मासिक खर्च ₹5219।

  3. घटते नामांकन के बावजूद शिक्षकों के वेतन का खर्च बरकरार।

राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या लगातार घट रही है, लेकिन शिक्षकों के वेतन का खर्च बना हुआ है। स्कूल शिक्षा निदेशालय की ताजा रिपोर्ट के अनुसार प्राथमिक कक्षाओं में एक विद्यार्थी पर औसतन 5219 रुपये प्रतिमाह, जबकि अपर प्राइमरी में 3915 रुपये प्रतिमाह खर्च आ रहा है। घटते नामांकन के बीच प्रति विद्यार्थी बढ़ता वित्तीय भार अब सरकारी स्कूलों के युक्तीकरण, शिक्षक तैनाती और नामांकन बढ़ाने की रणनीति के लिहाज से अहम हो गया है।

यू-डाइस आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021-22 में सरकारी स्कूलों की पहली से पांचवीं कक्षा में 3,04,132 विद्यार्थी पंजीकृत थे। 2025-26 में यह संख्या घटकर 2,18,969 रह गई। यानी पांच साल में 85,163 विद्यार्थी कम हुए। इसी अवधि में प्राथमिक शिक्षकों के वेतन पर 8397.35 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

ऐसे में विद्यार्थियों की संख्या घटने के साथ प्रति विद्यार्थी खर्च का आंकड़ा शिक्षा व्यवस्था में संसाधनों के इस्तेमाल का महत्वपूर्ण संकेतक बन गया है।

अपर प्राइमरी में भी घटा नामांकन

कक्षा छठी से दसवीं तक भी नामांकन में कमी आई है। वर्ष 2021-22 में यहां 3,50,650 विद्यार्थी थे, जो 2025-26 में घटकर 3,19,289 रह गए। इस अवधि में टीजीटी, एलटी, शास्त्री, पीईटी और डीएम के वेतन पर 7948.48 करोड़ रुपये खर्च हुए।  सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 और 2027-28 के लिए प्रति विद्यार्थी व्यय की इन दरों को मंजूरी दी है। अब चुनौती यह है कि घटते नामांकन के बीच उपलब्ध शिक्षकों और संसाधनों का किस तरह प्रभावी इस्तेमाल हो। प्रति विद्यार्थी बढ़ता खर्च स्कूलों की संख्या, शिक्षक तैनाती और कम नामांकन वाले विद्यालयों के युक्तीकरण पर आने वाले समय में फैसलों का आधार बन सकता है।

आरटीई के तहत होगा निजी स्कूलों को भुगतान

शिक्षा के अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में पढ़ने वाले आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के पात्र विद्यार्थियों की फीस प्रतिपूर्ति अब इन्हीं दरों के अनुसार करेगी। पिछले वर्ष की अपेक्षा इसे बढ़ाया गया है। प्राथमिक कक्षाओं के लिए प्रति छात्र मासिक खर्च 5,219 रुपये, उच्च प्राथमिक कक्षाओं के लिए 3,915 रुपये निर्धारित किए गए हैं। नई दरें वित्तीय वर्ष 2026-27 और 2027-28 के लिए लागू रहेंगी। निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटे आरक्षित है। स्कूलों को इस फीस का भुगतान सरकार करती है।

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