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    'सरकार बचत का बहाना बनाकर बेरोजगारों का शोषण नहीं कर सकती', हिमाचल हाई कोर्ट ने आउटसोर्स भर्ती पर लगाई रोक

    By Chaitanya Thakur Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Tue, 16 Jun 2026 06:21 PM (GMT+05:30)

    हिमाचल हाई कोर्ट ने प्रदेश सरकार और उसके उपक्रमों में आउटसोर्स भर्तियों पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने इसे मनमाना, भेदभावपूर्ण और बेरोजगारों का शोषण बताया ...और पढ़ें

    हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला स्थित परिसर। जागरण आर्काइव

    हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला स्थित परिसर। जागरण आर्काइव

    HighLights

    1. हाई कोर्ट ने आउटसोर्स भर्तियों पर तत्काल रोक लगाई।

    2. सरकार द्वारा धन बचाने के बहाने शोषण पर आपत्ति।

    3. भर्ती नियमों की अनदेखी को मनमाना बताया कोर्ट ने।

    विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने आउटसोर्स भर्तियों पर रोक लगाने के आदेश जारी किए हैं। कोर्ट ने आदेश में स्पष्ट किया है कि प्रदेश सरकार और सरकार से जुड़े उपक्रमों में कोई भी नियुक्ति भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के विपरीत नहीं होगी। पिछली सुनवाई में कोर्ट को बताया गया था कि स्वास्थ्य विभाग में पहले तो लोगों को आउटसोर्स आधार पर नियुक्त किया जाता है और उसके बाद रोगी कल्याण समिति में समाहित कर लिया जाता है।

    इस तरह अधिकारियों द्वारा अज्ञात उद्देश्यों के लिए आउटसोर्स भर्तियों के रूप में एक गुप्त मार्ग खोला गया है। कोर्ट को राज्य सरकार की ओर से बताया गया था कि उसके पास यह पूरी जानकारी नहीं है कि प्रदेश सरकार सहित अन्य उपक्रमों में कितने आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार में स्वास्थ्य सचिव सहित वित्त सचिव को स्पष्टीकरण के लिए कोर्ट में उपस्थित रहने के आदेश दिए थे। 

    आउटसोर्स भर्तियां करना मनमाना और भेदभावपूर्ण

    मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बी सी नेगी की खंडपीठ ने कहा कि आउटसोर्स भर्तियों पर रोक लगाई जानी जरूरी है। सरकार के लिए भर्ती एवं पदोन्नति नियमों को किनारे कर आउटसोर्स भर्तियां करना मनमाना और भेदभावपूर्ण है। सरकार धन की बचत का बहाना बनाकर बेरोजगारों का शोषण नहीं कर सकती। 

    आउटसोर्सिंग से और शोषण हो रहा

    कोर्ट ने कहा कि इस तरह के नीतिगत निर्णय लेने के लिए और बड़ी संख्या में लोगों को आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियोजित करके उनका शोषण किया जा रहा है। रिक्तियां उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें उनके वैधानिक अधिकारों से वंचित किया गया है और भर्ती प्रक्रिया का सहारा नहीं लिया गया है।

    रिक्तियों के बारे में सूचित नहीं किया जा रहा : कोर्ट

    कोर्ट ने कहा कि इस न्यायालय को उन रिक्तियों के प्रतिशत के बारे में सूचित नहीं किया जा रहा है जिनके विरुद्ध ये सभी आउटसोर्सिंग नियुक्तियां की गई हैं। कोर्ट को कुछ डेटा बताया गया जिससे पता चलता है कि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 17,114 व्यक्तियों को आउटसोर्सिंग के आधार पर भर्ती किया गया है। 

    42 संस्थानों में, जिनमें उच्च न्यायालय और हिमाचल प्रदेश न्यायिक अकादमी शामिल हैं, पुलिस महानिदेशक के कार्यालय में 630 व्यक्ति, जल शक्ति विभाग में 542, विद्युत निगम लिमिटेड में 1473, ग्रामीण विकास में 632, कृषि निदेशालय में 803, पालमपुर स्थित कृषि विश्वविद्यालय में 793 और चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय में कुल 2578 व्यक्तियों की नियुक्ति की गई। मामले पर सुनवाई 7 जुलाई को अगली सुनवाई निर्धारित की गई है।

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