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हिमाचल हाई कोर्ट का केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस, माइक्रोन प्लास्टिक होलोग्राम टेंडर करने पर किया जवाब तलब

By Chaitanya Thakur Edited By: Rajesh Sharma
Published: Thu, 25 Jun 2026 06:43 PM (IST)

हिमाचल हाई कोर्ट ने 75 करोड़ के गैर-संग्रहणीय प्लास्टिक होलोग्राम टेंडर मामले में केंद्र व राज्य सरकार को नोटिस जारी ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला स्थित परिसर। जागरण आर्काइव

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला स्थित परिसर। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने प्लास्टिक होलोग्राम टेंडर पर नोटिस जारी किया।

  2. 75 करोड़ के गैर-संग्रहणीय प्लास्टिक के उपयोग पर सवाल।

  3. 'प्लास्टिक फ्री इंडिया' अभियान के उल्लंघन का आरोप।

विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री के "प्लास्टिक फ्री इंडिया" अभियान, प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 एवं पर्यावरणीय कानूनों के कथित उल्लंघन से जुड़े 75 करोड़ गैर-संग्रहणीय प्लास्टिक होलोग्राम टेंडर मामले में केंद्र एवं राज्य सरकार सहित संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। पर्यावरण संरक्षण एवं भारत के प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट, शिमला ने देहरादून निवासी अधिवक्ता अभिनव थापर द्वारा दायर जनहित याचिका पर संज्ञान लेते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार सहित संबंधित विभागों को नोटिस जारी किया है। 

याचिका में हिमाचल प्रदेश आबकारी विभाग द्वारा लगभग 75 करोड़ गैर-संग्रहणीय एवं गैर-पुनर्चक्रणीय 36 माइक्रोन प्लास्टिक एक्साइज होलोग्राम लेबल की खरीद प्रक्रिया को चुनौती दी गई है।

सिद्धांतों का उल्लंघन कर दिया टेंडर

याचिका में कहा गया है कि यह टेंडर प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय "प्लास्टिक फ्री इंडिया" अभियान तथा सर्वोच्च न्यायालय एवं राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा प्रतिपादित पर्यावरणीय सिद्धांतों का उल्लंघन कर दिया गया है। याचिका के अनुसार भारत सरकार द्वारा गैर-आवश्यक एवं गैर-संग्रहणीय प्लास्टिक को समाप्त करने तथा पर्यावरण-अनुकूल विकल्प अपनाने की राष्ट्रीय नीति के विपरीत हिमालय जैसे अति संवेदनशील क्षेत्र में लगभग 75 करोड़ 36 माइक्रोन मेटालाइज़्ड पॉलिएस्टर प्लास्टिक होलोग्राम खरीदने की प्रक्रिया जारी रखी गई।

300 से 400 वर्ष है इस प्लास्टिक की पर्यावरण में आयु

याचिका में यह भी कहा गया है कि पीईटी एक गैर-जैव अपघटनीय प्लास्टिक है, जिसकी पर्यावरण में आयु लगभग 300 से 400 वर्ष होती है तथा समय के साथ यह माइक्रोप्लास्टिक में बदलकर मिट्टी, नदियों एवं भूजल को स्थायी रूप से प्रदूषित करता है। जिससे प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स एवं "प्लास्टिक फ्री इंडिया" अभियान के उद्देश्यों को सीधी क्षति पहुंचती है। 

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दिए थे निर्देश

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दिनांक 29.12.2025, 28.02.2026 एवं 24.03.2026 को लगातार तीन वैधानिक पत्र जारी कर उक्त 36 माइक्रोन प्लास्टिक होलोग्राम टेंडर को संशोधित/निरस्त करने तथा पर्यावरण-अनुकूल विकल्प अपनाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद मुख्य सचिव एवं अन्य अधिकारियों को बार-बार प्रस्तुतियां देने के बाद भी टेंडर निरस्त नहीं किया गया। 

याचिका में यह तथ्य भी रखा गया है कि हिमाचल प्रदेश में पहले भी इसी प्रकार का 36 माइक्रोन प्लास्टिक होलोग्राम टेंडर निरस्त किया जा चुका है, जबकि देश के अनेक राज्य अब पेपर आधारित अथवा जैव-अवक्रमणीय एक्साइज सुरक्षा लेबल अपनाने की दिशा में आगे बढ़ चुके हैं, जिससे पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों की राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्यता स्पष्ट होती है।

मामले पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता द्वारा बताया गया कि यह मामला केवल एक टेंडर का नहीं है, बल्कि भारत के पर्यावरणीय कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन, हिमालयी पारिस्थितिकी की सुरक्षा तथा माननीय प्रधानमंत्री के 'प्लास्टिक फ्री इंडिया' अभियान के वास्तविक अनुपालन का है। जब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा टेंडर निरस्त करने के स्पष्ट वैधानिक निर्देशों की भी अनदेखी की जाती है, तब पर्यावरण एवं विधि के शासन की रक्षा हेतु न्यायपालिका का हस्तक्षेप आवश्यक हो जाता है। मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है।

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