हिमाचल सरकार का नशा माफिया को जड़ से खत्म करने का प्लान, STF को दी पॉवर; अब काली कमाई होगी जब्त
हिमाचल प्रदेश पुलिस ने मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ अपनी रणनीति बदली है। अब एसटीएफ तस्करों के वित्तीय नेटवर्क ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश पुलिस के डीजी अशोक तिवारी। जागरण आर्काइव
HighLights
एसटीएफ अब तस्करों के वित्तीय नेटवर्क और बेनामी संपत्तियों की जांच करेगी।
मोबाइल, बैंक खाते, यूपीआई लेनदेन और डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल होगी।
अपराध से अर्जित संपत्तियों को फ्रीज, कुर्क और जब्त किया जाएगा।
चैतन्य ठाकुर, शिमला। हिमाचल प्रदेश में चिट्टे और अन्य मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ लड़ाई अब सिर्फ बरामदगी और गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी। प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को जारी आदेश में बड़े एनडीपीएस मामलों में तस्करों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, यूपीआइ लेनदेन, बैंक खाते, डिजिटल वालेट, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन और बेनामी संपत्तियों की गहन जांच अनिवार्य करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य तस्करों के पूरे आर्थिक नेटवर्क और वित्तीय तंत्र को ध्वस्त करना है।
पुलिस मुख्यालय के अनुसार मादक पदार्थों की तस्करी एक संगठित और लाभ कमाने वाला अपराध है। ऐसे में यदि केवल नशे की खेप बरामद कर आरोपित को गिरफ्तार किया जाए तो तस्करी का नेटवर्क कुछ समय बाद फिर सक्रिय हो सकता है।
इसी कारण एसटीएफ को निर्देश दिए गए हैं कि व्यावसायिक मात्रा (कमर्शियल क्वांटिटी) और अन्य महत्वपूर्ण एनडीपीएस मामलों में जांच की शुरुआत से ही वित्तीय पड़ताल की जाए और डिजिटल साक्ष्यों को प्राथमिकता दी जाए।
बैंक खातों व लेनदेन को भी खंगालेंगे
जांच अधिकारी आरोपितों व उनके सहयोगियों के बैंक खातों, यूपीआइ भुगतान, मोबाइल बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट प्लेटफार्म, नकदी के प्रवाह और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का विश्लेषण करेंगे। इसके साथ ही हवाला नेटवर्क, चल-अचल संपत्तियों, वाहनों, व्यवसायों और बेनामी संपत्तियों की भी जांच की जाएगी।
आरोपितों के मोबाइल फोन, लैपटाप और अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरणों से प्राप्त डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखते हुए आवश्यकता पड़ने पर उनकी डिजिटल फोरेंसिक जांच कराई जाएगी।
एसटीएफ को सरकार ने दी पॉवर
कानून के तहत बैंक खाते और डिजिटल रिकार्ड की जांच की व्यवस्था पहले से मौजूद थी, लेकिन अब पहली बार इस नए आदेश के माध्यम से इसे बड़े ड्रग मामलों में अनिवार्य जांच प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया है। इससे सभी एसटीएफ इकाइयों के लिए एक समान कार्यप्रणाली तय हो गई है और वित्तीय जांच को किसी भी स्तर पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकेगा।
संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई भी होगी
अपराध से अर्जित संपत्तियों का पता लगाने, उन्हें फ्रीज करने, कुर्क करने और जब्त करने की कार्रवाई भी समानांतर रूप से की जाएगी। पुलिस मुख्यालय का मानना है कि ड्रग माफिया की सबसे बड़ी ताकत उसकी अवैध कमाई है। इसलिए केवल तस्करों को गिरफ्तार करने के बजाय उनकी आर्थिक जड़ों पर प्रहार करना अधिक प्रभावी रणनीति होगी।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद जांच एजेंसियां केवल नशे की खेप तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि उसके पीछे काम कर रहे फाइनांसर, सप्लायरों व पूरे ड्रग सिंडिकेट तक पहुंच सकेगी।
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